
1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए Income Tax Act, 2025 के तहत ट्रेडिशनल Form‑16 की जगह नया Form‑130 आ जाएगा।
सैलरीड कर्मचारियों को अब वही काम करने वाला, लेकिन ज्यादा डिटेल्ड और सिस्टम‑जनरेटेड TDS सर्टिफिकेट Form‑130 के रूप में मिलेगा।
महत्त्वपूर्ण बात यह है कि FY 2025‑26 के लिए (जो आप मई-जून 2026 में इस्तेमाल करेंगे) आपको अभी भी पुराना Form‑16 ही मिलेगा; Form‑130 पहली बार FY 2026‑27 के लिए जारी होगा।
क्यों बदला जा रहा है Form‑16?
सरकार का लक्ष्य टैक्स रिपोर्टिंग को ज्यादा ट्रांसपेरेंट, स्टैंडर्ड और पूरी तरह डिजिटल बनाना है। पुराने Form‑16 में कई बार मैन्युअल एंट्री, फॉर्मेट का फर्क और डेटा‑मिसमैच की समस्या रहती थी, जिसके कारण ITR में गलती और रिफंड में देरी होती थी। Form‑130 सिस्टम‑जनरेटेड होगा, TRACES से निकलेगा और TDS रिटर्न के डेटा से सीधे लिंक रहेगा, जिससे मैन्युअल गलती की गुंजाइश काफी कम हो जाएगी।
Form‑130 में क्या‑क्या होगा?
जॉब करने वालों के लिए Form‑130 वही करेगा जो अभी Form‑16 करता है, लेकिन ज्यादा साफ और ब्रेकअप के साथ:
- Part A: एम्प्लॉयर और कर्मचारी की पूरी डिटेल – नाम, PAN, TAN, पता, पीरियड ऑफ एम्प्लॉयमेंट आदि।
- Part B: सैलरी, अलाउंसेज, परक्विजिट्स, डिडक्शन (जैसे स्टैंडर्ड डिडक्शन, प्रोफेशनल टैक्स) और कुल TDS की समरी।
- Part C: टैक्सेबल इनकम की डिटेल्ड कैलकुलेशन – कुल ग्रॉस सैलरी से लेकर सेक्शन‑वार कटौतियों, पुराने/नए टैक्स रेजीम का चुनाव और फाइनल टैक्स लैबिलिटी तक का ब्रेकअप।
यानी जो गणित आप खुद या CA बैठकर करते थे, उसका स्ट्रक्चर्ड वर्जन अब सीधे सिस्टम से निकलेगा।
Form‑130 कैसे और कब मिलेगा?
Form‑130 को TRACES पोर्टल से ही डाउनलोड किया जाएगा, जैसे आज TDS/TCS के कई फॉर्म आते हैं। हर तिमाही TDS रिटर्न प्रोसेस होने के बाद यह ऑटो‑जनरेट होगा और नियोक्ता अपने कर्मचारियों को डिजिटल कॉपी दे सकेंगे या डाउनलोड करने का विकल्प देंगे। चूंकि इसे मैन्युअली तैयार नहीं किया जा सकेगा, इसलिए सैलरी, TDS और सेक्शन‑वार छूट का डेटा सीधे विभाग के रिकॉर्ड से मैच करेगा।
ITR फाइलिंग और रिफंड पर असर
नए ITR फॉर्म्स को भी 2026 से री‑डिजाइन किया जा रहा है ताकि Form‑130, AIS और नए Form‑168 (पुराना 26AS) से डेटा सीधे प्री‑फिल हो सके। इसका मतलब:
- पहले से ज्यादा प्री‑फिल्ड इनकम और डिडक्शन डेटा, जिन्हें आप सिर्फ वेरिफाई/एडिट करेंगे।
- कैपिटल गेन, एसेट्स और इन्वेस्टमेंट का क्लीनर डिस्क्लोजर, जिससे हाई‑इनकम, इन्वेस्टर्स और NRI के लिए कंप्लायंस आसान लेकिन ज्यादा पारदर्शी हो जाएगा।
- डेटा मैच होने पर रिफंड प्रोसेसिंग तेज होगी, क्योंकि विभाग को कम मैन्युअल चेकिंग करनी पड़ेगी और मिसमैच कम होंगे।
रिफंड की बुनियाद आगे भी यही रहेगी: ITR में दिखी इनकम‑टैक्स देनदारी बनाम विभाग के पास AIS/Form‑168 और Form‑130 में कैप्चर डेटा।
सैलरीड क्लास के लिए टेक‑अवे
- “Form‑16 नहीं मिलेगा तो ITR कैसे भरेंगे?” – इसका जवाब साफ है: Form‑16 सिर्फ नाम बदलकर Form‑130 हो रहा है, आपका सैलरी‑TDS सर्टिफिकेट बंद नहीं हो रहा।
- आपको अपनी सैलरी कंपोनेंट्स, इनवेस्टमेंट प्रूफ (80C, 80D आदि), और बैंक/डिमैट डेटा पहले से ज्यादा व्यवस्थित रखना होगा, क्योंकि सिस्टम‑ड्रिवन मैचिंग में छोटी गलती भी तुरंत दिख जाएगी।
- अच्छा पक्ष यह है कि सही डेटा भरने वाले करदाताओं के लिए ITR फाइलिंग अधिक ऑटोमेटेड होगी और रिफंड पहले से तेज और स्मूथ मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
न्यूज़ एंगल से देखें तो यह “बुरी खबर” कम, और भारत की टैक्स सिस्टम को पेपरलेस, डेटा‑ड्रिवन और फिनटेक‑फ्रेंडली बनाने की दिशा में बड़ा स्ट्रक्चरल रिफॉर्म ज्यादा है – जिसका असर अगले कुछ सालों में साफ दिखेगा।









