
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखने लगा है। कच्चे तेल की सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों के मद्देनजर साउथ कोरिया ने फ्यूल बचत के लिए सख्त कदम उठाते हुए ‘5-डे व्हीकल रिस्ट्रिक्शन सिस्टम’ लागू करने का फैसला किया है। इस नए नियम के तहत अब पेट्रोल और डीजल वाहनों को हफ्ते में केवल पांच दिन ही सड़कों पर चलने की अनुमति होगी।
क्या है नया सिस्टम?
यह नियम दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों में लागू ‘ऑड-ईवन’ फॉर्मूले से मिलता-जुलता है, लेकिन इसे कार्यदिवनों (सोमवार से शुक्रवार) के हिसाब से डिजाइन किया गया है। सरकार ने सभी निजी वाहनों को उनकी नंबर प्लेट के अंतिम अंक के आधार पर पांच अलग-अलग ग्रुप्स में विभाजित किया है। प्रत्येक ग्रुप के लिए सप्ताह के पांच दिनों में से एक विशेष दिन ‘नो-ड्राइव डे’ तय किया गया है। उदाहरण के लिए, यदि किसी वाहन का निर्धारित दिन बुधवार है, तो उस दिन वह वाहन सड़क पर बिल्कुल नहीं चल सकेगा।
सरकार ने इस व्यवस्था को लागू करने की शुरुआत बुधवार से सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) से की है। इस दौरान अधिकारियों की कड़ी निगरानी रहेगी और नियम का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना तथा प्रशासनिक कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।
ईवी मालिकों को राहत
इस कड़े नियम के बीच इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और हाइड्रोजन फ्यूल सेल कार चलाने वालों के लिए अच्छी खबर है। साउथ कोरियाई सरकार ने पर्यावरण अनुकूल वाहनों को इस पाबंदी से पूरी तरह छूट दी है। इसका सीधा मतलब है कि ईवी मालिक अपनी वाहन का उपयोग सप्ताह के सातों दिन बिना किसी रोक-टोक के कर सकेंगे। सरकार का यह कदम इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में एक रणनीतिक प्रोत्साहन के रूप में देखा जा रहा है।
किस पर लागू होगा नियम?
फिलहाल, यह व्यवस्था अनिवार्य रूप से केवल सरकारी कर्मचारियों और सरकारी वाहनों के लिए लागू की गई है। निजी कंपनियों और आम नागरिकों को अभी स्वैच्छिक रूप से इसका पालन करने की सलाह दी गई है। हालांकि, सरकार ने चेतावनी दी है कि यह केवल शुरुआत है। साउथ कोरिया में वर्तमान में तेल संकट का स्तर ‘लेवल-2’ पर पहुंच चुका है।
अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि स्थिति बिगड़ती है और संकट ‘लेवल-3’ तक पहुंचता है, तो यह प्रतिबंध निजी क्षेत्र और आम जनता के लिए भी अनिवार्य कर दिया जाएगा। ऐसे में सड़कों पर निगरानी बढ़ा दी जाएगी और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
वैश्विक संकेत
विश्लेषकों का मानना है कि साउथ कोरिया का यह फैसला अन्य देशों के लिए भी एक संकेत हो सकता है। यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो भारत सहित कई तेल आयातक देशों को भी ऐसे ही कठोर उपायों पर विचार करना पड़ सकता है। फिलहाल, साउथ कोरियाई नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें और आवश्यक यात्राओं को ही प्राथमिकता दें।









