
राज्यसभा में मंगलवार को केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया। पूरे देश में अब 18,646 जन औषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं, जो गरीबों से लेकर मध्यम वर्ग तक को 50-80 प्रतिशत सस्ती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य इलाज का खर्च कम करना है, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं हर नागरिक की पहुंच में हों।
योजना की असली कहानी 2008 से शुरू होती है, जब यूपीए सरकार के तहत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने ‘जन औषधि योजना’ की शुरुआत की। पहला केंद्र राजस्थान के भाम्बोरिया गांव में 13 दिसंबर 2008 को खुला। लेकिन 2014 तक मात्र 80 केंद्र ही स्थापित हो सके, जो सीमित सफलता दर्शाता है। नरेंद्र मोदी सरकार ने 2015 में इसे ‘प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना’ (PMBJP) के रूप में पुनर्जनन किया। इसके बाद तेज विस्तार हुआ – 28 फरवरी 2025 तक 15,057 केंद्र, जून 2025 में 16,912 और नवंबर 2025 तक 17,610 पहुंच गए। आज 18,646 केंद्रों का आंकड़ा इसकी सफलता का प्रमाण है।
अस्पतालों में सुविधा, व्यापक दवा सूची
नड्डा ने बताया कि 18,646 केंद्रों में से 2,370 सरकारी अस्पतालों के अंदर हैं। इससे मरीजों को ओपीडी से ही सस्ती दवाएं मिल जाती हैं, अस्पतालों का आर्थिक बोझ कम होता है। योजना में 2,110 प्रकार की दवाएं और 315 सर्जिकल उपकरण, मेडिकल कंज्यूमेबल्स उपलब्ध हैं। ये हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, संक्रमण, एलर्जी व पेट रोगों के इलाज में कारगर हैं। राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची की लगभग सभी जेनेरिक दवाएं (लैब रिएजेंट्स व टीके छोड़कर) यहां मिलती हैं।
मजबूत सप्लाई चेन और मुफ्त दवा पहल
दवाओं की निरंतर उपलब्धता के लिए पांच बड़े वेयरहाउस और 41 वितरक आईटी-सक्षम सिस्टम से जुड़े हैं। यह ट्रैकिंग सुनिश्चित करता है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ‘फ्री ड्रग्स सर्विस पहल’ के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाएं दी जा रही हैं। केंद्र राज्यों को वित्तीय सहायता भी देता है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हो रही हैं।
पिछले दशक में जन औषधि केंद्रों से 6,975 करोड़ की बिक्री हुई, जिससे 30,000 करोड़ की बचत हुई। प्रतिदिन 10-12 लाख लोग इनका लाभ लेते हैं। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक केंद्र हैं, जो योजना की लोकप्रियता दिखाते हैं। सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक 25,000 केंद्र खोलना है। हालांकि, कुछ जगहों पर अधिक मूल्य के आरोप भी लगे हैं। कुल मिलाकर, जन औषधि केंद्र स्वास्थ्य क्रांति का प्रतीक बन चुके हैं। यूपीए की नींव पर मोदी सरकार ने इसे जन-जन तक पहुंचाया, जो गरीब भारत के लिए वरदान सिद्ध हो रहा है।









