
क्या आपको भी लगता है कि महीने की 4-5 हजार रुपये की किस्त से आपके वित्तीय स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता? अगर हां, तो तुरंत संभल जाइए। आज एक नया और बहुत खतरनाक आर्थिक संकट युवाओं, खासकर जेन-Z (Gen Z), को अपनी चपेट में ले रहा है, जिसे वित्तीय विशेषज्ञ ‘Silent Debt’ (साइलेंट डेट) कह रहे हैं। यह वह कर्ज है जो इतने चुपके से जमा होता है कि शुरुआत में किसी का ध्यान ही नहीं जाता, लेकिन एक दिन अचानक पता चलता है कि आप करोड़ों के कर्ज में डूब चुके हैं।
यह जाल कैसे बनता है?
‘साइलेंट डेट’ की शुरुआत एक छोटी सी चाहत से होती है- सोशल मीडिया पर दिखी कोई फैंसी गैजेट, दोस्तों के साथ अचानक बना ट्रिप, या वह नया स्मार्टफोन जो सभी के पास है। आजकल ‘Buy Now Pay Later’ (BNPL) और ‘आसान EMI’ के आगमन ने इसे और भी घातक बना दिया है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स बताते हैं, “साइलेंट डेट वह कर्ज है जो धीरे-धीरे जमा होता है। छोटे-छोटे पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड की मिनी-EMIs और BNPL प्लान अलग-अलग एप्स और बैंकों पर बिखरे होते हैं, इसलिए हमें एहसास ही नहीं होता कि कुल मिलाकर हम कितने बड़े कर्ज के बोझ तले दब चुके हैं.”
देखते ही देखते एक ₹5,000 की EMI, 10-12 ऐसे ही अन्य लोन के साथ जुड़कर साल भर में ₹15-20 लाख तक का बोझ बन सकती है, जिससे निकलना लगभग असंभव हो जाता है।
युवाओं का सबसे बड़ा संकट
आज के युवाओं के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है that उनकी सैलरी सालाना 7-11% की रफ़्तार से बढ़ती है, वहीं वे जो अनसिक्योर्ड लोन (क्रेडिट कार्ड, डिजिटल पर्सनल लोन) लेते हैं, उन पर ब्याज दर 36% से 48% तक होती है। यानी, आपकी कमाई से कर्ज की वृद्धि रफ़्तार से 4-5 गुना तेज है। इस गणित में पैसा कब निकल जाता है, यह समझना नामुमकिन हो जाता है।
कर्ज बढ़ने के तीन मुख्य कारण:
- FOMO (फियर ऑफ मिसिंग आउट): सोशल मीडिया पर दूसरों की लग्जरी लाइफ देखकर लोग अपनी हैसियत से कहीं ज्यादा खर्च करने लगते हैं।
- लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन: जैसे-जैसे सैलरी बढ़ती है, बचत करने के बजाय लोगों का रहन-सहन महंगा हो जाता है।
- लोन पर लोन: पुरानी EMI भरने के लिए नया लोन लेना, जो लोगों को एक कभी न खत्म होने वाले दलदल में धकेल देता है।
अगर ये दिखें तो तुरंत अलर्ट हो जाएं
- आपकी आधी से ज्यादा सैलरी सिर्फ EMI भरने में चली जा रही है।
- एक किस्त चुकाने के लिए आपको दूसरा नया लोन लेना पड़ रहा है।
- आपकी EMIs अवॉंस (बाउंस) होने लगी हैं या लेटने चार्ज लग रहा है।
- महीने के अंत में आपके पास बिल्कुल कोई पैसा नहीं बचता (Paycheque-to-Paycheque)।
- इमरजेंसी के लिए आपके पास कोई सेविंग या फंड ही नहीं है।
बचने और बाहर निकलने का फॉर्मूला
विशेषज्ञों की सलाह है कि सबसे पहले एक डायरी उठाएं और सभी लोन/EMIs का एक्सेस-हिसाब लगाएं- कुल रकम, ब्याज दर और अगली किस्त की तारीख। सबसे ज्यादा ब्याज (आमतौर पर क्रेडिट कार्ड) वाले कर्ज को सबसे पहले खत्म करें। अगर लोन बहुत ज्यादा हैं, तो उन्हें एक कम-ब्याज वाले पर्सनल लोन (Debt Consolidation) में बदल दें ताकि एक ही EMI भरनी पड़े।
याद रखें, अपनी सैलरी का 35-40% से ज्यादा हिस्सा कभी भी EMI में न जाने दें। अपनी ‘जरूरतों’और ‘चाहतों’ के बीच अंतर करना सीखें और दिखावे की दुनिया से दूरी बनाएं। एक छोटी सी सतर्कता ही आपको भविष्य में करोड़ों के कर्ज के जाल से बचा सकती है।









