
रेलवे टिकट कैंसिलेशन के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने यात्रियों को अधिक पारदर्शी, लेकिन अनुशासित सिस्टम की ओर बढ़ने का साफ संदेश दे दिया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार (24 मार्च) को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑपरेशंस, टिकटिंग और माल ढुलाई से जुड़े सुधारों की नई खेप घोषित की, जिन्हें 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 के बीच चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
मॉडर्नाइजेशन प्लान और टिकटिंग में पारदर्शिता
नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में रेल मंत्री ने कहा कि भारतीय रेलवे एक व्यापक मॉडर्नाइजेशन प्लान पर काम कर रहा है, जिसमें यात्री सुविधाओं के साथ-साथ टिकटिंग सिस्टम में पारदर्शिता और सीटों के बेहतर उपयोग पर खास जोर होगा। इसी के तहत, कन्फर्म टिकट कैंसिलेशन पर रिफंड की गणना अब पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगी कि यात्री ट्रेन के रवाना होने से कितने समय पहले टिकट रद्द करता है। सरकार का दावा है कि इससे आखिरी समय पर हो रहे कैंसिलेशन पर अंकुश लगेगा और प्रतीक्षा सूची वाले यात्रियों को भी कन्फर्म सीट मिलने की संभावना बढ़ेगी।
‘क्लोज्ड रिफंड विंडो’ और 8 घंटे वाला नियम
सबसे बड़ा बदलाव “क्लोज्ड रिफंड विंडो” के रूप में सामने आया है। नए नियमों के अनुसार, ट्रेन के तय समय से 8 घंटे से कम समय पहले कैंसिल किए गए कन्फर्म टिकटों पर अब कोई रिफंड नहीं दिया जाएगा, यानी इस अवधि में टिकट रद्द करना पूरी तरह यात्री का जोखिम होगा। रेलवे का तर्क है कि इस कदम से टिकटों की कालाबाजारी पर रोक लगेगी और ऑपरेशनल प्लानिंग अधिक सटीक हो सकेगी।
नया कैंसिलेशन स्लैब
किराए में कटौती का नया स्लैब भी स्पष्ट कर दिया गया है। अगर कोई यात्री ट्रेन के रवाना होने से 72 घंटे से ज्यादा समय पहले टिकट कैंसिल करता है, तो उसे सबसे ज्यादा रिफंड मिलेगा और प्रति यात्री केवल एक तय कैंसिलेशन शुल्क काटा जाएगा। 72 घंटे से 24 घंटे के बीच टिकट रद्द करने पर कुल किराए का 25% बतौर कैंसिलेशन चार्ज काटा जाएगा, जबकि यह कटौती न्यूनतम फिक्स्ड चार्ज के अधीन भी होगी।
वहीं, 24 से 8 घंटे के बीच किए गए कैंसिलेशन को ‘लेट-कैंसिलेशन स्लैब’ में रखा गया है, जिसमें यात्रियों को किराए का 50% तक नुकसान उठाना पड़ेगा और बाकी आधा रिफंड के रूप में वापस मिलेगा। 8 घंटे के भीतर, यानी क्लोज्ड-रिफंड विंडो में, कोई राशि वापस नहीं होगी।
क्लास अपग्रेड और बोर्डिंग पॉइंट में लचीलापन
रेल मंत्री ने इस मौके पर यात्रियों के लिए लचीलापन बढ़ाने वाले कुछ सकारात्मक उपाय भी पेश किए। अब यात्री ट्रेन के रवाना होने से 30 मिनट पहले तक अपनी यात्रा श्रेणी (क्लास) अपग्रेड कर सकेंगे और बोर्डिंग पॉइंट बदलने का विकल्प भी चुन सकेंगे, जबकि पहले ये बदलाव सिर्फ रिजर्वेशन चार्ट बनने से पहले संभव थे। मंत्रालय का मानना है कि इससे अंतिम समय पर यात्रा योजना में बदलाव करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और खाली पड़ी बेहतर क्लास की सीटों का उपयोग भी बढ़ेगा।
माल ढुलाई सुधार और 2026 ‘रेलवे सुधारों का वर्ष’
माल ढुलाई के मोर्चे पर भी रेलवे नए सिंगल-डेक और डबल-डेक वैगन लाने की तैयारी में है, जिनका इस्तेमाल खास तौर पर नमक और ऑटोमोबाइल सेक्टर की लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा। सरकार ने रेलवे निर्माण परियोजनाओं की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी और टेक्नोलॉजी के ज्यादा इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि 2026 को रेलवे सुधारों का वर्ष बनाया जा रहा है।
यात्रियों के लिए नया संदेश
नई कैंसिलेशन पॉलिसी और फ्लेक्सिबल टिकटिंग नियम एक साथ मिलकर ऐसे समय में आए हैं, जब रेलवे डिजिटल टिकटिंग, डायनेमिक प्राइसिंग और रियल-टाइम सीट मैनेजमेंट जैसे उपायों के जरिए अपने नेटवर्क को अधिक कुशल और यात्री-अनुकूल बनाने की कोशिश में है। यात्रियों के लिए संदेश साफ है- यदि यात्रा रद्द करनी हो तो फैसला जितना जल्दी होगा, नुकसान उतना कम; और अगर योजना बदलनी हो, तो अब सिस्टम में पहले से कहीं ज्यादा लचीलापन मौजूद रहेगा।









