
मोटापा और मेटाबोलिक बीमारियों के इलाज में क्रांतिकारी साबित GLP-1 दवाओं की बढ़ती लोकप्रियता के बीच भारत की दवा नियामक संस्था केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने बड़ा कदम उठाया है। हाल के महीनों में सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर सेमाग्लूटाइड और ओज़ेम्पिक जैसी दवाओं को ‘फास्ट वेट लॉस’ का जादुई समाधान बताकर प्रमोट किया जा रहा था। बिना डॉक्टर की सलाह के इनके दुरुपयोग से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ने पर CDSCO ने 10 मार्च 2026 को सख्त एडवाइजरी जारी कर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष विज्ञापनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया।
गलत प्रचार पर नकेल कसने की कार्रवाई
CDSCO की जांच में 49 ऑनलाइन फार्मेसी और क्लिनिक्स का निरीक्षण किया गया, जहां कई को नोटिस थमाए गए। एडवाइजरी में स्पष्ट कहा गया कि ये प्रिस्क्रिप्शन दवाएं केवल एंडोक्रिनोलॉजिस्ट या इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञों की सलाह पर ही उपलब्ध होंगी। ‘डिजीज अवेयरनेस’ कैंपेन के नाम पर छिपा प्रमोशन, इंफ्लुएंसर मार्केटिंग या डिजिटल विज्ञापनों को भ्रामक करार देते हुए संस्था ने चेतावनी दी कि उल्लंघन पर लाइसेंस रद्द, भारी जुर्माना या कानूनी कार्रवाई होगी।
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट, 1954 का हवाला देते हुए CDSCO ने फार्मा कंपनियों को रिस्क मैनेजमेंट प्लान (RMP) लागू करने और प्रोडक्ट जानकारी में हेल्पलाइन अनिवार्य करने के निर्देश दिए।
GLP-1 दवाओं का विज्ञान और जोखिम
GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट्स मूल रूप से टाइप-2 डायबिटीज के लिए विकसित की गईं, जो भूख दबाती हैं, ब्लड शुगर नियंत्रित करती हैं और वजन घटाने में सहायक हैं। भारत में ओज़ेम्पिक, वेगोवी और मौनजारो जैसी ब्रांडेड दवाओं की मांग आसमान छू रही थी, खासकर युवा प्रोफेशनल्स में। लेकिन बिना निगरानी के इस्तेमाल से मतली, उल्टी, पाचन विकार, हृदय समस्याएं और हार्मोनल असंतुलन जैसे साइड इफेक्ट्स सामने आए।
विशेषज्ञों का मानना है कि मोटापा जटिल बीमारी है, जिसका समाधान केवल दवाओं से नहीं, बल्कि संतुलित आहार, व्यायाम और लाइफस्टाइल बदलाव से संभव है। विज्ञापनों में इनकी अनदेखी को CDSCO ने नियमों का उल्लंघन ठहराया।
बाजार प्रभाव और भविष्य की राह
सेमाग्लूटाइड का पेटेंट 20 मार्च 2026 को समाप्त होने से जेनरिक दवाएं 50% सस्ती होंगी, जिससे बाजार में उछाल की उम्मीद है। लेकिन नियामक सख्ती से कंपनियां डॉक्टर आउटरीच पर शिफ्ट हो रही हैं। भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) को भी निगरानी सौंपी गई है। PIB के अनुसार, आपूर्ति श्रृंखला पर पहले से नजर है, जिसमें केवल विशेषज्ञ डॉक्टर ही प्रिस्क्रिप्शन लिख सकेंगे। यह कदम जन स्वास्थ्य की रक्षा के साथ बाजार को नैतिक दिशा देगा। विशेषज्ञ सलाह लें, शॉर्टकट से बचें।









