
एक से ज्यादा बैंक अकाउंट रखने का चलन आज आम बात है, लेकिन इन्हीं खातों की अनदेखी आगे चलकर पेनल्टी, खराब क्रेडिट स्कोर और साइबर फ्रॉड जैसे बड़े खतरे में बदल रही है। नौकरी बदलने पर पुराना सैलरी अकाउंट, किसी ऑफर में खुलवाया गया जीरो बैलेंस खाता या फैमिली जरूरतों के लिए खोला गया जॉइंट अकाउंट- समय के साथ ऐसे कई खाते हमारी नजर से ओझल हो जाते हैं। हम उन्हें न तो इस्तेमाल करते हैं और न ही औपचारिक रूप से बंद करवाते हैं, जबकि बैंकिंग सिस्टम में वे लगातार एक्टिव या इनएक्टिव स्टेटस में बने रहते हैं।
छोटा अकाउंट, बड़ा आर्थिक नुकसान
लोगों की धारणा होती है कि खाली पड़ा या कम बैलेंस वाला अकाउंट कोई नुकसान नहीं करेगा, लेकिन रियलिटी इससे बिल्कुल उलट है। ज्यादातर बैंकों में सेविंग अकाउंट पर मिनिमम बैलेंस की शर्त होती है, जिसे पूरा न करने पर हर महीने पेनल्टी कटती रहती है और धीरे‑धीरे बची हुई रकम खत्म हो सकती है या बैलेंस नेगेटिव में चला जाता है। लंबे समय तक ग्राहक‑प्रेरित लेनदेन न होने पर ऐसे खाते पहले इनएक्टिव और फिर डोरमेंट कैटेगरी में चले जाते हैं, जिन्हें दोबारा ऑपरेटिव बनाने के लिए ग्राहक को ब्रांच जाकर KYC और अन्य औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं।
इन खातों पर सिर्फ मिनिमम बैलेंस पेनल्टी ही नहीं, बल्कि डेबिट कार्ड, SMS अलर्ट और अन्य सर्विस चार्ज भी समय पर लगते रहते हैं, जिनका बोझ आखिरकार ग्राहक पर ही आता है।
क्रेडिट स्कोर पर छुपा हुआ वार
साधारण सेविंग अकाउंट सीधे CIBIL स्कोर में दर्ज नहीं होता, लेकिन उससे जुड़ी सुविधाएं किसी भी समय आपकी क्रेडिट प्रोफाइल को डेंट दे सकती हैं। कई बैंक सेविंग अकाउंट के साथ ओवरड्राफ्ट (OD) सुविधा ऑफर करते हैं; अगर OD लिमिट का बकाया समय पर न चुकाया जाए या अकाउंट निगेटिव बैलेंस में पड़ा रहे, तो बैंक इसे अनपेड लोन की तरह रिपोर्ट कर सकता है, जिससे क्रेडिट स्कोर गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
इसी तरह पुराने खातों से अक्सर इंश्योरेंस प्रीमियम, होम/पर्सनल लोन की EMI, म्यूचुअल फंड SIP या डिमैट अकाउंट की चार्जेस ऑटो‑डेबिट रहते हैं। अगर खाता नजरअंदाज कर दिया गया और बैलेंस पर्याप्त नहीं रहा, तो ये पेमेंट बाउंस हो सकते हैं, जिससे लेट फीस, पेनल्टी और खराब क्रेडिट हिस्ट्री का रिस्क और बढ़ जाता है।
इनएक्टिव अकाउंट और साइबर फ्रॉड का कॉम्बो रिस्क
बैंकों और साइबर एजेंसियों की रिपोर्ट बताती हैं कि ज्यादा खतरा उन्हीं खातों में होता है जिन्हें ग्राहक महीनों तक चेक नहीं करते। पुराने अकाउंट में अगर मोबाइल नंबर या ईमेल अपडेट नहीं है, तो संदिग्ध ट्रांजैक्शन के SMS या ईमेल अलर्ट ग्राहक तक पहुंचते ही नहीं, और फ्रॉड देर से पकड़ा जाता है।
एक से ज्यादा बचत खाते रखने से मैनेजमेंट मुश्किल होता है, और निष्क्रिय पड़े खातों में जालसाजी की संभावना सबसे अधिक मानी जा रही है। इन्हीं जोखिमों को देखते हुए RBI ने इनएक्टिव और डोरमेंट खातों पर निगरानी बढ़ाने, समय‑समय पर KYC रिव्यू करने और जरूरत पड़ने पर ऐसे खातों को क्लोज़ या प्रतिबंधित करने के लिए बैंकों को नई गाइडलाइंस जारी की हैं।
खाता बंद करने से पहले ज़रूरी होमवर्क
एक्सपर्ट्स का साफ सुझाव है कि बहुत सारे खातों की बजाय 1-2 मुख्य और एक्टिव अकाउंट रखना ज्यादा सुरक्षित और प्रैक्टिकल है। लेकिन किसी पुराने खाते को बंद करने से पहले कुछ अहम कदम उठाना जरूरी है:
- सबसे पहले पिछले 2-3 साल का बैंक स्टेटमेंट डाउनलोड या प्रिंट कर लें, ताकि टैक्स, लोन डॉक्यूमेंटेशन या किसी विवाद की स्थिति में आपके पास रिकॉर्ड मौजूद रहे।
- इसके बाद ध्यान से चेक करें कि उस खाते से कोई EMI, इंश्योरेंस प्रीमियम, म्यूचुअल फंड SIP, गैस सब्सिडी, सैलरी क्रेडिट या कोई अन्य ऑटो‑डेबिट/ऑटो‑क्रेडिट लिंक तो नहीं है; जरूरत पड़ने पर इन्हें नए मुख्य खाते में शिफ्ट करें।
- सिर्फ पैसा निकाल लेना काफी नहीं है; ब्रांच में जाकर औपचारिक क्लोज़र फॉर्म भरें, लिखित कन्फर्मेशन या क्लोज़र सर्टिफिकेट लें और डेबिट कार्ड को नष्ट करके चेकबुक बैंक में जमा कर दें।
समय पर कार्रवाई ही ढाल
डिजिटल बैंकिंग और बढ़ते साइबर क्राइम के दौर में “पुराना लेकिन खुला” बैंक अकाउंट अब सिर्फ कागज़ी औपचारिकता नहीं, बल्कि आपके लिए संभावित खतरा बन चुका है। समय रहते गैर‑ज़रूरी खातों की समीक्षा, जरूरी लिंक अपडेट और अप्रयुक्त खातों को औपचारिक रूप से बंद कर देना आपकी वित्तीय सेहत और डिजिटल सुरक्षा दोनों को सुरक्षित रखने का एक आसान लेकिन बेहद अहम कदम है।









