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Zomato से खाना मंगवाना हुआ और भी महंगा! कंपनी ने फिर बढ़ा दी अपनी फीस, अब देने होंगे इतने रुपये

Zomato ने प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाकर ₹14.90 (GST से पहले) कर दी, जो पहले ₹12.50 थी। यह 19.2% की बढ़ोतरी है। Swiggy भी लगभग उतनी ही फीस लेता है। नियमित यूजर्स पर सालाना ₹600-700 का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। बढ़ते ऑपरेशनल खर्च और ईंधन की कीमतें इसके मुख्य कारण हैं।

By Pinki Negi

Zomato से खाना मंगवाना हुआ और भी महंगा! कंपनी ने फिर बढ़ा दी अपनी फीस, अब देने होंगे इतने रुपये

ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato ने अपने ग्राहकों के लिए एक बार फिर झटका दिया है। कंपनी ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में 19.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। अब हर ऑर्डर पर यूजर्स को ₹12.50 की जगह ₹14.90 (GST से पहले) देने होंगे। 18 प्रतिशत GST जोड़ने के बाद यह राशि प्रति ऑर्डर लगभग ₹17.58 हो जाती है। यह बदलाव पूरे भारत में लागू हो गया है और सीधे तौर पर करोड़ों यूजर्स के मासिक खर्च को प्रभावित करेगा।

यह कोई पहली बार नहीं है जब Zomato ने फीस बढ़ाई हो। अगर पिछले तीन सालों का आंकड़ा देखा जाए, तो 2023 में यह फीस सिर्फ ₹2 थी, जो धीरे-धीरे बढ़कर अब ₹14.90 तक पहुंच गई है। सितंबर 2025 में भी कंपनी ने फीस में इजाफा किया था, और अब छह महीने के भीतर फिर से वही रणनीति दोहराई गई है।

Swiggy के बराबर पहुंची फीस

इस नए बदलाव के बाद Zomato की प्लेटफॉर्म फीस अब अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंदी Swiggy के करीब पहुंच गई है। Swiggy फिलहाल ₹14.99 प्रति ऑर्डर (GST सहित) चार्ज करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों कंपनियां अब कीमतों के मामले में समान रणनीति अपना रही हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा कम और मुनाफे पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।

हर ऑर्डर पर लगने वाला अतिरिक्त बोझ

प्लेटफॉर्म फीस वह चार्ज है जो हर बार ऐप से ऑर्डर करने पर लगता है। यह डिलीवरी चार्ज या रेस्टोरेंट की कीमत से अलग होता है और हर यूजर को अनिवार्य रूप से देना पड़ता है। अगर कोई यूजर हफ्ते में पांच बार ऑर्डर करता है, तो महीने भर में उसे अतिरिक्त ₹48 से ₹50 (GST सहित लगभग ₹58) ज्यादा देने होंगे। सालाना हिसाब से यह बोझ ₹600–700 तक पहुंच सकता है।

क्यों बढ़ रही है फीस?

कंपनी के मुताबिक, ऑपरेटिंग लागत में लगातार वृद्धि हो रही है। इसमें डिलीवरी लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी मेंटेनेंस और फ्यूल की बढ़ती कीमतें शामिल हैं। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं, जिसका सीधा असर डिलीवरी पार्टनर्स के खर्च पर पड़ रहा है। ऐसे में कंपनियां अपने मुनाफे को स्थिर रखने के लिए प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाने का रास्ता अपना रही हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि प्लेटफॉर्म फीस कंपनियों के लिए सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाला हिस्सा है, क्योंकि इसमें बहुत कम लागत जुड़ी होती है। ब्रोकरेज फर्म Nomura के अनुमान के मुताबिक, इस बढ़ोतरी से Zomato को हर तिमाही में लगभग ₹64–65 करोड़ की अतिरिक्त कमाई हो सकती है।

यूजर्स के व्यवहार में बदलाव की आशंका

फीस बढ़ने का असर अब यूजर्स के ऑर्डरिंग पैटर्न पर भी दिख सकता है। कई ग्राहक अब एक बार में ज्यादा खाना ऑर्डर कर सकते हैं, ताकि बार-बार फीस देने से बचा जा सके। वहीं, कीमत को लेकर संवेदनशील यूजर्स ऑर्डर की संख्या कम कर सकते हैं या घर पर खाना बनाने की ओर लौट सकते हैं।

कंपनियां अब उन ग्राहकों को वापस लाने के लिए डिस्काउंट, कॉम्बो डील्स और Zomato Gold जैसे सब्सक्रिप्शन ऑफर्स पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये ऑफर्स बढ़ती फीस के बोझ को कम कर पाएंगे? फूड डिलीवरी सेक्टर के भविष्य को देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह ट्रंड जारी रहा, तो ऑनलाइन खाना मंगवाना अब ‘सुविधा’ से ज्यादा ‘महंगी आदत’ बन सकता है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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