
पैन कार्ड (Permanent Account Number) से जुड़ी प्रक्रिया में 1 अप्रैल 2026 से बड़े बदलाव आने वाले हैं, जिसका सीधा असर लाखों ऐसे नागरिकों पर पड़ेगा जो अभी तक पैन नहीं बनवा पाए हैं या नया आवेदन करने की योजना बना रहे हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के नए निदेश के अनुसार, केवल आधार कार्ड के आधार पर पैन कार्ड बनवाने की सुविधा 31 मार्च 2026 के बाद पूरी तरह खत्म हो जाएगी ।
अब अतिरिक्त दस्तावेज़ अनिवार्य
नए नियम लागू होते ही आवेदकों को पहचान और जन्म तिथि के अतिरिक्त प्रमाण पत्र जमा करने होंगे। केवल आधार-OTP वेरिफिकेशन पर e-PAN जारी नहीं किया जाएगा। स्वीकार्य दस्तावेज़ों की सूची में शामिल हैं:
- जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)
- कक्षा 10 का मार्कशीट/सर्टिफिकेट (जिसमें जन्म तिथि अंकित हो)
- पासपोर्ट
- ड्राइविंग लाइसेंस
- वोटर आईडी कार्ड
इसका मतलब है कि प्रक्रिया पहले की तुलना में लंबी और जटिल हो जाएगी, क्योंकि अब दस्तावेज़ों की स्कैन कॉपी अपलोड करना और उनकी वैलिडिटी की जाँच अनिवार्य होगी ।
नाम और विवरण का आधार से 100% मिलान जरूरी
नए सिस्टम में नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि और पता का आधार डेटाबेस के साथ पूर्णतः मेल खाना अनिवार्य है। यदि आवेदन फॉर्म में लिखा नाम आधार कार्ड से एक अक्षर का भी भिन्न होगा, तो आवेदन तुरंत रद्द कर दिया जाएगा । इसलिए सरकार ने सभी को सलाह दी है कि वे आवेदन करने से पहले अपने आधार विवरणों को अपडेट कर लें।
पुराने फॉर्म अब नहीं चलेंगे
1 अप्रैल 2026 से पुराने फॉर्म 49A और 49AA मान्यता खो देंगे। उनके स्थान पर इनकम टैक्स विभाग द्वारा जारी नए डिजिटल फॉर्म का उपयोग ही किया जा सकेगा, जिनमें अधिक विस्तृत जानकारी मांगी जाएगी । यह बदलाव इनकम टैक्स रूल्स 2026 के अंतर्गत लाया गया है ताकि टैक्स सिस्टम को और अधिक पारदर्शी और फ्रॉड-मुक्त बनाया जा सके।
पैसा क्यों फंस सकता है?
सिर्फ पैन बनवाने की प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि बड़े आर्थिक लेन-देन में भी नए नियमों का सीधा असर होगा। 1 अप्रैल से PAN अनिवार्यता की पैमाने (Threshold Limits) बढ़ा दिए गए हैं:
- नकद जमा/निकासी: ₹10 लाख प्रति वर्ष (पहले ₹5 लाख)
- संपत्ति खरीद: ₹20 लाख (पहले ₹10 लाख)
- मोटर वाहन खरीद: ₹5 लाख (पहले ₹2 लाख)
- होटल/रेस्टोरेंट बिल: ₹1 लाख (पहले ₹50 हज़ार)
हालांकि सीमाएं बढ़ी हैं, लेकिन यदि आपका PAN आधार से लिंक नहीं है या वह ‘inoperative’ (असक्रिय) है, तो TDS/TCS की दर दुगुनी हो जाती है और बैंक, ब्रोकर या रजिस्ट्रार लेन-देन रोक सकते हैं । 31 दिसंबर 2025 तक बिना लिंक किए गए पैन अब असक्रिय होने के कगार पर हैं, जिससे टैक्स रिफंड अटक सकता है और कराधान चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
31 मार्च तक का फायदा उठाएं
कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSC) और NSDL/UTIITSL ने स्पष्ट किया है कि 31 मार्च 2026 तक ही केवल आधार के माध्यम से त्वरित e-PAN प्राप्त किया जा सकता है । जिन नागरिकों का पैन नहीं है, उनके लिए यह आखिरी सरल अवसर है। उसके बाद प्रक्रिया में कुछ दिनों से लेकर हफ्तों तक की देरी हो सकती है।







