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Apple का लोगो आधा कटा हुआ क्यों है? स्टीव जॉब्स ने इसके पीछे छिपाई थी ये गहरी कहानी

आज एप्पल का आधा कटा लोगो स्टाइल और स्टेटस का प्रतीक है। 1977 में डिजाइनर रॉब जैनोफ ने इसे इसे चेरी या टमाटर से भ्रम रोकने के लिए 'बाइट' दिया था, न कि एलन ट्यूरिंग को श्रद्धांजली के तौर पर। न्यूटन वाले जटिल लोगो से शुरू होकर, यह 50 साल में दुनिया का सबसे पहचानने योग्य ब्रांड बन गया।

By Pinki Negi

mysterious story behind apple bitten logo

आज के डिजिटल दौर में iPhone की लोकप्रियता इतनी बढ़ चुकी है कि शायद ही ऐसा कोई हो जो इसके बारे में न जानता हो। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई जानता है कि वह चमकदार सेब का निशान किस कंपनी का है। भले ही किसी को कंपनी का नाम तुरंत याद न आए, लेकिन उस आधे कटे हुए लोगो को देखते ही सब पहचान जाते हैं। आज एप्पल का लोगो सिर्फ एक ब्रांड की पहचान नहीं, बल्कि स्टाइल, प्रीमियम क्वालिटी और स्टेटस का सिंबल बन चुका है।

1 अप्रैल 2026 को अपनी शुरुआत के 50 वर्ष पूरे करने वाली इस मैफिक कंपनी की सफलता के पीछे सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि एक बेमिसाल ब्रांडिंग की कहानी है। ऐसे में दुनियाभर के करोड़ों iPhones, MacBooks और iPads पर दिखने वाला वह आधा कटा हुआ सेब अक्सर लोगों के मन में सवाल पैदा करता है: आखिर एप्पल ने अपने लोगो के लिए एक पूरा सेब क्यों नहीं चुना? क्या इसके पीछे कोई राज है या सिर्फ डिजाइन की कलाकारी?

न्यूटन से आधुनिक एप्पल तक का सफर

एप्पल कंपनी की स्थापना 1 अप्रैल 1976 को स्टीव जॉब्स, स्टीव वोजनियाक और रॉन वेन ने की थी, लेकिन तब इसका लोगो आज जैसा नहीं था।Company का पहला लोगो काफी जटिल था, जिसमें प्रसिद्ध वैज्ञानिक सर आइजैक न्यूटन को एक सेब के पेड़ के नीचे बैठे दिखाया गया था। यह चित्र गुरुत्वाकर्षण की खोज का प्रतीक था, लेकिन यह डिजाइन बहुत भारी और जटिल था, जिसे बॉर्डर पर या छोटी स्क्रीन पर पहचानना मुश्किल था।

इसी समस्या को हल करने के लिए 1977 में स्टीव जॉब्स ने प्रसिद्ध ग्राफिक डिजाइनर रॉब जैनोफ (Rob Janoff) से संपर्क किया। जैनोफ ने केवल दो हफ्तों में एक पूरी तरह नया, सरल और यादगार लोगो डिजाइन किया- एक साधारण सेब जिसके एक तरफ से एक बाइट (काटा हुआ निशान) लिया गया था। यही लोगो 1977 में लॉन्च हुए ‘एप्पल I व्यक्तिगत कम्प्यूटर पर पहली बार दुनिया के सामने आया और इतिहास रच गया।

कटा हुआ सेब

अक्सर लोग सोचते हैं कि इस कटे हुए सेब के पीछे कोई गहरा दार्शनिक या ऐतिहासिक राज़ छिपा है। कई किंवदंतियां हैं, जैसे कि यह प्रसिद्ध कंप्यूटर विज्ञानी एलन ट्यूरिंग को श्रद्धांजली है, जिनकी आत्महत्या सायानास विष से भरे सेब खाकर की गई थी। हालाँकि, डिजाइनर रॉब जैनोफ और एप्पल ने आधिकारिक तौर पर इसे खंडित किया है।

जैनोफ का कहना है कि कटा हुआ सेब कोई प्रतीकात्मक संदेश नहीं, बल्कि व्यावहारिक डिजाइन की जरूरत थी। उनका तर्क था: “अगर सेब पूरा गोल रखा जाता, तो दूर से या छोटे आकार में लोग इसे चेरी, टमाटर या किसी अन्य गोल फल से भ्रमित हो सकते थे। सेब होने को स्पष्ट रूप से पहचानने के लिए उसमें एक ‘बाइट’ का निशान जरूरी था।” यह “बाइट” देखते ही दिमाग को संकेत देता है कि यह एक सेब ही है, कोई अन्य फल नहीं।

समय के साथ बदला लोगो का रूप

1977 से लेकर आज तक, एप्पल का लोगो कई बार बदला है, लेकिन उसकी मूल संरचना वही रही है। शुरू में लोगो राइनबो रंगों में था, जो विविधता और सृजन की भावना का प्रतीक था। 1998 में जब स्टीव जॉब्स वापस आए, तो कंपनी ने न्यूनतमवाद अपनाया और लोगो को एक ही रंग (काला, सफेद, चांदी या ग्लॉसी ब्लैक) में बदल दिया। आज हम जो ग्रे या चांदी वाला लोगो देखते हैं, वही आधुनिक एप्पल की पहचान है।

आज, 50 साल बाद, वह आधा कटा सेब दुनिया का सबसे पहचानने वाला ब्रांड प्रतीक बन चुका है। यह साबित करता है कि कभी-कभी सबसे सरल डिजाइन ही सबसे गहरे प्रभाव छोड़ते हैं।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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