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मात्र 25 हजार में B.Tech! भारत का सबसे सस्ता इंजीनियरिंग कॉलेज, प्लेसमेंट भी है जबरदस्त

जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता, भारत का सबसे सस्ता माने जाने वाला इंजीनियरिंग कॉलेज है, जहाँ ज्यादातर बीटेक कोर्स की सालाना फीस मात्र 5710 रुपये है। फिर भी यह इंजीनियरिंग श्रेणी में NIRF रैंकिंग 2023 में 10वें स्थान पर है और यहाँ प्लेसमेंट भी राष्ट्रीय व राज्य‑स्तरीय स्तर पर मजबूत माना जाता है।

By Pinki Negi

मात्र 25 हजार में B.Tech! भारत का सबसे सस्ता इंजीनियरिंग कॉलेज, प्लेसमेंट भी है जबरदस्त

इंजीनियर बनने का सपना करोड़ों छात्रों के सिर चढ़कर बोलता है, लेकिन ज्यादातर घरों के लिए बीटेक की बढ़ती फीस एक बड़ी चुनौती बन जाती है। जब JEE Main के बाद छात्रों को जानकारी यह मिलती है कि बीटेक की फीस दो‑तीन लाख से लेकर दो‑दो लाख प्रति सेमेस्टर तक बढ़ चुकी है, तो कई परिवार पीछे हट जाते हैं। लेकिन इसी दौर में भारत में एक ऐसा इंजीनियरिंग कॉलेज भी है जहाँ ज्यादातर बीटेक कोर्स की सालाना फीस मात्र 5710 रुपये है- यानी इंजीनियरिंग की पढ़ाई की कीमत उससे ज़्यादा नहीं जो आम लोग महीने का होस्टल‑मेस भी नहीं भर सकते।

भारत की सबसे कम फीस वाली इंजीनियरिंग डिग्री

यह कॉलेज है जादवपुर विश्वविद्यालय (Jadavpur University), कोलकाता, जो न सिर्फ फीस में सस्ता है, बल्कि रैंकिंग और प्लेसमेंट में भी देश के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों में गिना जाता है। विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, यहाँ इंजीनियरिंग के अधिकतर बीटेक कोर्स (Non TFW श्रेणी में) की सालाना ट्यूशन फीस 5710 रुपये है। यह रकम उस दौर में जब निजी कॉलेजों में एक सेमेस्टर की फीस ही लाखों में पहुँच चुकी है, छात्रों के लिए एक राहत जैसी लगती है।

कुछ विशेष ब्रांचेज जैसे IT (Non TFW) और IT (IFW) की फीस थोड़ी ज़्यादा है – क्रमशः 30,860 और 24,86 atual रुपये प्रति साल – लेकिन यह भी देश के अन्य प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेजों की फीस के मुकाबले काफी कम स्तर पर है।​

JEE Main से इंजीनियरिंग की राह

जादवपुर विश्वविद्यालय में बीटेक के लिए भी इंजीनियरिंग दाखिले की प्रक्रिया JEE Main से जुड़ी है। इंजीनियर बनने की चाहत रखने वाले करोड़ों छात्र पहले JEE Main पास करते हैं, फिर अपनी रैंक के आधार पर राज्य स्तरीय या राष्ट्रीय काउंसिलिंग में भाग लेकर कॉलेज चुनते हैं। JEE Main में निचली रैंक वाले छात्र अक्सर महंगे प्राइवेट कॉलेजों की तरफ धकेले जाते हैं, लेकिन जादवपुर विश्वविद्यालय जैसे सस्ते और गुणवत्तापूर्ण संस्थानों का नाम अक्सर उनके राडार से छूट जाता है।

जादवपुर में बीटेक के लिए प्रवेश ज्यादातर WBJEE (वेस्ट बंगाल जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम) और JEE Main से आधारित काउंसिलिंग के जरिए होता है, जहाँ ट्यूशन फीस की तुलना में योग्यता और रैंक ज़्यादा मायने रखती है। यही वजह है कि यहाँ दाखिला पाना आसान नहीं होता, लेकिन जो एक बार यहाँ जगह बना लेता है, उसके लिए फीस का बोझ लगभग न के बराबर रहता है।​​

“5710 रुपये वाला B.Tech”- असली तस्वीर क्या है?

जब सोशल मीडिया या न्यूज पोर्टल पर लिखा जाता है कि “मात्र 25 हजार रुपये सालाना वाला बीटेक या मात्र 5710 रुपये सालाना फीस वाला इंजीनियरिंग कॉलेज”, तो आम भाषा में यह थोड़ा भ्रम पैदा कर सकता है। असल में, यह रकम केवल ट्यूशन फीस है, न कि हॉस्टल, मेस, ट्रैवल या अन्य खर्चों की कुल लागत। फिर भी, अगर छात्र स्थानीय निवासी है या राज्य‑सरकार की छात्रवृत्ति/फीस‑वेवर स्कीम के तहत आता है, तो बीटेक के चार साल का कुल खर्च आम निजी कॉलेजों के एक‑दो सेमेस्टर के बराबर भी नहीं पहुँचता।​

इस तरह की फीस‑संरचना विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों के लिए इंजीनियरिंग की दिशा में दरवाज़ा खोल देती है। यहाँ फीस इतनी कम होने की वजह से छात्रों को अक्सर छोटे‑मझोले लोन या स्टेट‑स्कॉलरशिप पर भी पूरी पढ़ाई पूरी करने में मदद मिल जाती है, जबकि दूसरी तरफ लाखों रुपये फीस वाले कॉलेजों में ही उनकी अधिकांश आय खर्च हो भी सकती है।

इतिहास: 1905 से चलती आ रही तकनीकी विरासत

जादवपुर विश्वविद्यालय की जड़ें 20वीं सदी की शुरुआत में तकनीकी शिक्षा के विकास के मंच पर डूबी हुई हैं। प्रारंभ में यह **बंगाल टेक्निकल इंस्टीट्यूट **(Bengal Technical Institute) के नाम से 1905 में बनाया गया था, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश भारत में इंजीनियरिंग और टेक्निकल शिक्षा को बढ़ावा देना था। बाद में 1955 में पश्चिम बंगाल विधानमंडल के एक अधिनियम के तहत इसे जादवपुर यूनिवर्सिटी के रूप में राज्य‑विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया, जिससे यहाँ इंजीनियरिंग से लेकर आर्ट्स, विज्ञान और फार्मेसी तक कई विषयों में गुणवत्तापूर्ण शोध‑आधारित शिक्षा का बाज़ार बन गया।​​

एक सदी से अधिक समय से जारी यह इतिहास इस बात का सबूत है कि यहाँ शिक्षा की गुणवत्ता और छात्र‑सेंट्रिक फीस‑पॉलिसी हमेशा एक साथ बनी रही है।

रैंकिंग और प्लेसमेंट

एनआईआरएफ रैंकिंग 2023 के अनुसार, जादवपुर विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग श्रेणी में 10वें, फार्मेसी में 18वें, यूनिवर्सिटी श्रेणी में चौथे और समग्र राष्ट्रीय रैंकिंग में 13वें स्थान पर है। यह आंकड़े दिखाते हैं कि यहाँ फीस निम्न होते हुए भी पढ़ाई की गुणवत्ता और रिसर्च और प्लेसमेंट का नेटवर्क बहुत मजबूत है।​

कई वर्षों से यहाँ इंजीनियरिंग ब्रांचेज – खासकर मैकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटर साइंस और संबंधित विषयों- के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियाँ कैंपस‑प्लेसमेंट आयोजित करती रही हैं। CA, IT फर्म, PSUs और राज्य‑स्तरीय तकनीकी विभाग यहाँ से अभ्यर्थियों को चुनते हैं।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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