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CBSE 10th Maths का पेपर देख चकराया सबका सिर! छात्र खुश पर एक्सपर्ट्स परेशान, क्या बोर्ड ने गिरा दिया है पढ़ाई का स्तर?

सीबीएसई 10वीं गणित की परीक्षा के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है! जहां छात्र आसान पेपर से खुश हैं, वहीं एक्सपर्ट्स शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर चिंतित हैं। क्या वाकई बोर्ड ने पेपर बहुत सरल कर दिया है? जानें इस वायरल विवाद के पीछे की पूरी सच्चाई।

By Pinki Negi

CBSE 10th Maths का पेपर देख चकराया सबका सिर! छात्र खुश पर एक्सपर्ट्स परेशान, क्या बोर्ड ने गिरा दिया है पढ़ाई का स्तर?
CBSE 10th Maths

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी, 2026 से शुरू हो गईं। पहले ही दिन गणित (Mathematics) का पेपर देकर बाहर निकले छात्रों के चेहरे पर मायूसी दिखी। अधिकांश विद्यार्थियों का कहना था कि प्रश्न पत्र उम्मीद से कहीं ज्यादा कठिन और बहुत लंबा था। कठिन सवालों और समय की कमी के कारण कई छात्र अपना पेपर पूरा नहीं कर पाए, जिससे घबराकर कुछ छात्र परीक्षा केंद्रों के बाहर ही रोने लगे। छात्रों को अब कम अंक आने या परफॉर्मेंस सुधारने के लिए दोबारा परीक्षा देने का डर सता रहा है।

गणित के पेपर पर बंटी छात्रों की राय

माइक्रोब्लॉगिंग साइट X (ट्विटर) पर सीबीएसई गणित के पेपर को लेकर छात्रों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां छात्रों का एक गुट कठिन पेपर सेट करने के लिए बोर्ड की आलोचना कर रहा है, वहीं एक बड़े वर्ग का मानना है कि पेपर ‘औसत से आसान’ था। इन छात्रों का तर्क है कि ज्यादातर सवाल सीधे NCERT की किताबों से पूछे गए थे। सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी है कि अगर छात्र इन सवालों को भी मुश्किल बता रहे हैं, तो शिक्षा का स्तर काफी नीचे गिर चुका है। अब यह चर्चा का विषय बन गया है कि पेपर वास्तव में कठिन था या छात्रों की तैयारी में कमी थी।

सोशल मीडिया पर फूटा छात्रों का गुस्सा

परीक्षा की कठिनाई को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक छात्र ने सीधे सीबीएसई (@cbseindia29) को टैग करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की है। छात्र ने लिखा कि कक्षा 10वीं का ‘गणित (स्टैंडर्ड)’ का पेपर न केवल बहुत कठिन था, बल्कि काफी लंबा भी था। छात्र ने यह भी बताया कि परीक्षा केंद्रों से बाहर निकलते समय कई विद्यार्थी रो रहे थे। पोस्ट में एक गंभीर सवाल भी उठाया गया कि क्या पेपर को जानबूझकर इतना कठिन बनाया गया था ताकि छात्र कम अंक आने के डर से दूसरी बोर्ड परीक्षा में बैठने को मजबूर हों? यह सवाल अब इंटरनेट पर काफी चर्चा बटोर रहा है।

‘ट्रिकी’ थे गणित के सवाल, लेकिन बेसिक मैथ रहा औसत

छात्रों के गुस्से के बीच कई शिक्षकों और कोचिंग सेंटरों का मानना है कि गणित का पेपर थोड़ा घुमावदार और लंबा जरूर था, लेकिन इसका स्तर ‘औसत’ (Moderate) था। गुवाहाटी के मॉडर्न इंग्लिश स्कूल के शिक्षक तन्मय दास के अनुसार, ‘बेसिक मैथमेटिक्स’ का पेपर औसत दर्जे का था।

उन्होंने बताया कि हालांकि पेपर का ढांचा जाना-पहचाना था, लेकिन बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) काफी लंबे थे, जिन्हें हल करने में छात्रों का काफी समय खर्च हुआ। इसके विपरीत, ‘केस स्टडी’ वाले सवाल सीधे और स्पष्ट थे, क्योंकि वे उन विषयों पर आधारित थे जिनका छात्रों ने बार-बार अभ्यास किया था। कुल मिलाकर, पेपर में गहराई से समझने वाले छात्रों को बढ़त मिली है।

5 नंबर वाले सवालों ने दी राहत, लेकिन ‘सर्कल’ के सवाल ने उलझाया

शिक्षकों के अनुसार, गणित के पेपर में 5 अंकों वाले सवाल सीधे और अच्छे थे, जिससे छात्रों को अपनी जानकारी विस्तार से दिखाने का मौका मिला। हालांकि, ‘सर्कल’ (वृत्त) से जुड़े एक सवाल ने छात्रों की जमकर परीक्षा ली, क्योंकि वह काफी घुमावदार था और उसमें उच्च-स्तरीय सोच (Higher-order thinking) की जरूरत थी।

पेपर के अन्य हिस्सों की बात करें तो, 3 अंकों वाले सवाल औसत दर्जे के थे और 2 अंकों वाले सवाल काफी आसान और सीधे पूछे गए थे। शिव नादर स्कूल, गुरुग्राम के विशेषज्ञों ने भी फीडबैक दिया है कि ‘स्टैंडर्ड’ और ‘बेसिक’ दोनों ही पेपरों में एक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई थी, ताकि औसत और मेधावी दोनों तरह के छात्र अच्छा प्रदर्शन कर सकें।

स्टैंडर्ड मैथ्स पेपर का विश्लेषण

सीबीएसई कक्षा 10वीं का ‘मैथमेटिक्स स्टैंडर्ड’ (041) का पेपर काफी संतुलित और सही स्तर का रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग 70% प्रश्न सीधे NCERT के सिलेबस और किताबों में दिए गए फॉर्मेट पर आधारित थे। जिन छात्रों ने NCERT से अच्छी तैयारी की थी, उनके लिए पेपर काफी आसान रहा।

पेपर में ‘बेसिक प्रोपोर्शनैलिटी थ्योरम’ (BPT) का प्रूफ, साइक्लिक क्वाड्रिलेट्रल (चक्रीय चतुर्भुज), टेंजेंट और रेडियस के गुण, तथा मीडियन और मोड (माध्यिका और बहुलक) निकालने जैसे सीधे सवाल पूछे गए थे। इसके अलावा, अर्थमैटिक प्रोग्रेशन (AP) पर आधारित केस स्टडी के सवालों ने छात्रों की विश्लेषणात्मक क्षमता की परीक्षा ली। कुल मिलाकर, यह पेपर कॉन्सेप्ट और एप्लीकेशन का एक बेहतरीन मिश्रण था।

NCERT से मिला सहारा, लेकिन ‘लंबे’ सवालों ने लिया समय

सीबीएसई कक्षा 10वीं का ‘मैथमेटिक्स बेसिक’ (241) का पेपर पूरी तरह से NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग 60% प्रश्न सीधे तौर पर टेक्स्टबुक के उदाहरणों और कॉन्सेप्ट्स से लिए गए थे, जिससे अच्छी तैयारी करने वाले छात्रों को काफी राहत मिली। हालांकि, पेपर में कुछ हिस्से चुनौतीपूर्ण भी रहे। ‘क्वाड्रेटिक इक्वेशन’ (द्विघात समीकरण), ‘एरिया रिलेटेड टू सर्कल्स’ (वृत्त से संबंधित क्षेत्रफल) और ‘अर्थमैटिक प्रोग्रेशन’ (AP) की केस-स्टडी से जुड़े सवाल काफी लंबे थे। इन्हें हल करने के लिए छात्रों को काफी विस्तृत कैलकुलेशन करनी पड़ी, जिससे समय का प्रबंधन थोड़ा मुश्किल रहा।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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