तेल की नदियों से तरबतर सऊदी अरब अब रेत के नीचे दबी सोने की चमक से जगमगा रहा है। हाल ही में देश के रेगिस्तानी इलाकों में हुई एक बड़ी खोज ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। राज्य समर्थित खनन कंपनी मआदेन ने चार अलग अलग जगहों पर करीब 221 टन सोने के विशाल भंडार की पुष्टि की है। यह खोज न सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी बल्कि तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगी।

रेगिस्तान में कैसे मिला इतना सोना
सऊदी अरब का ज्यादातर इलाका सुनसान रेगिस्तान है लेकिन इसके नीचे बिलियन साल पुरानी चट्टानों की परतें छिपी हुई हैं। इन्हें अरेबियन शील्ड कहा जाता है जो सोने तांबे और अन्य कीमती धातुओं से भरपूर है। पिछले कुछ सालों से मआदेन ने आधुनिक तकनीकों जैसे थ्री डी मॉडलिंग और गहन ड्रिलिंग से इस क्षेत्र की पड़ताल तेज कर दी थी। नतीजा चौंकाने वाला निकला। चार प्रमुख स्थलों वादी अल जव मंसूराह मस्साराह उरुक साउथ और उम अस्सलाम में कुल 7.8 मिलियन औंस सोना सामने आया। इनमें वादी अल जव सबसे बड़ा है जहां 3.8 मिलियन औंस का अनुमान है। मंसूराह जो पहले से ही दुनिया की अत्याधुनिक सोने की खदानों में शुमार है वहां 3 मिलियन औंस का इजाफा हुआ। बाकी दो जगहों से 1.67 मिलियन औंस की पुष्टि हुई।
यह खोज 2022 से चल रहे व्यापक एक्सप्लोरेशन अभियान का फल है। विशेषज्ञ बताते हैं कि यहां की मिट्टी में प्रति टन 10 से 20 ग्राम सोना मिल रहा है जो उच्च गुणवत्ता का संकेत देता है। मंसूराह मस्साराह पहले से 10 मिलियन औंस से ज्यादा उत्पादन कर चुकी है और अब यह और मजबूत हो गई।
कुबेर का खजाना क्यों कहा जा रहा?
लोग इसे कुबेर का खजाना कह रहे हैं क्योंकि सऊदी पहले से ही दुनिया के सबसे अमीर देशों में है। इसके सेंट्रल बैंक के पास 323 टन सोने के आधिकारिक भंडार मौजूद हैं जो वैश्विक स्तर पर ऊंची रैंक देते हैं। नई खोज से कुल संसाधन और बढ़ गए हैं। सोशल मीडिया पर यह खबर वायरल हो चुकी है जहां लोग तेल के बाद सोने के युग की बात कर रहे हैं। यह खोज Vision 2030 का हिस्सा है जिसमें क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान तेल के अलावा खनन पर्यटन और तकनीक पर जोर दे रहे हैं। देश का मौजूदा सोना उत्पादन 5 से 6 टन सालाना है लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह जल्द ही 20 से 30 टन तक पहुंच सकता है।
गोल्ड रेट में उछाल
इस खोज की घोषणा के बाद सऊदी में सोने के दामों में तेजी आई है। 21 फरवरी को 24 कैरेट सोना प्रति ग्राम करीब 657 रियाल यानी भारतीय रुपये में 15744 के आसपास कारोबार कर रहा है। यह पिछले दिन से 16 रुपये ऊपर है। 22 कैरेट 14432 और 18 कैरेट 11808 प्रति ग्राम पर पहुंचा। मक्का मदीना और रियाद के ज्वेलरी बाजारों में खरीदारी बढ़ गई है। वैश्विक बाजार के उतार चढ़ाव के बीच यह स्थिरता निवेशकों को लुभा रही है।
अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा
सोने का यह नया भंडार सऊदी को गोल्ड पावर बना सकता है। तेल कीमतों में अस्थिरता के दौर में खनन से नया राजस्व मिलेगा। सरकार का लक्ष्य 2030 तक खनन को जीडीपी का 10 प्रतिशत बनाना है। हालांकि पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी चुनौतियां बाकी हैं। फिर भी यह खोज मध्य पूर्व की आर्थिक तस्वीर बदलने वाली है। तेल की धरती अब सोने की चमक से नहा रही है और आने वाले साल इसका असर दुनिया देखेगी।









