बदलते मौसम और अनियमित मानसून ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना छोटे किसानों के लिए उम्मीद की किरण बन रही है। इस योजना से खेतों में बोरिंग कराने वालों को 10,000 रुपये तक की आर्थिक मदद मिल रही है। खासतौर पर सीमांत और लघु किसान जो अपनी फसलों को पानी की कमी से जूझते देखते हैं, उनके लिए यह वरदान साबित हो रही है। योजना के तहत निजी नलकूपों से सिंचाई सुविधा बढ़ाने का लक्ष्य है, जिससे फसल उत्पादन में इजाफा हो।

योजना की खासियतें
यह योजना तीन मुख्य श्रेणियों में बंटी है – उथले, मध्यम और गहरे नलकूप। उथले बोरिंग के लिए 30 मीटर तक की गहराई पर 12,500 से 19,000 रुपये तक सहायता दी जाती है। मध्यम गहराई 31 से 60 मीटर वाले नलकूपों पर करीब डेढ़ लाख रुपये का अनुदान मिलता है, जिसमें नलकूप निर्माण, पाइपलाइन और ऊर्जीकरण शामिल है। गहरे नलकूपों के लिए 60 मीटर से ऊपर की खुदाई पर 1.78 लाख या इससे अधिक मदद उपलब्ध है। पंपसेट और पाइप पर अतिरिक्त सब्सिडी भी जोड़ी गई है। इससे किसान बिना ज्यादा खर्च के अपने खेतों तक पानी पहुंचा पाते हैं।
किसे मिलेगा लाभ
सिर्फ उत्तर प्रदेश के निवासी ही पात्र हैं। न्यूनतम आधा एकड़ जमीन वाले छोटे किसान प्राथमिकता में हैं। पहले से सरकारी सिंचाई योजना का लाभ न ले चुके लोग आवेदन कर सकते हैं। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग को अधिकतम राशि मिलती है। जमीन के दस्तावेज साफ होने चाहिए और भूजल नियमों का पालन अनिवार्य है। अतिदोहित इलाकों को छोड़कर सभी जिलों में यह लागू है। किसान सम्मान निधि या पारदर्शी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है।
आवेदन कैसे करें?
ऑनलाइन प्रक्रिया सबसे आसान है। लघु सिंचाई विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर नया आवेदन भरें। फॉर्म में व्यक्तिगत विवरण, जमीन का विवरण और बैंक खाता डालें। दस्तावेज अपलोड कर सबमिट करें। सत्यापन के बाद विभाग टेक्नीशियन भेजता है। ऑफलाइन विकल्प के तहत ब्लॉक कार्यालय या सीएससी केंद्र पर फॉर्म जमा करें। पहले आओ पहले पाओ के सिद्धांत पर काम होता है, इसलिए जल्दी आवेदन करें। स्वीकृति मिलने पर राशि डीबीटी से खाते में आ जाती है।
आवश्यक कागजात
आधार कार्ड, जमीन के खसरा-खतौनी, जाति और आय प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक, फोटो और मोबाइल नंबर तैयार रखें। पंपसेट आईएसआई मार्क वाला ही लें।
असर और भविष्य
इस योजना से हजारों किसान लाभान्वित हो चुके हैं। गेहूं, धान और सब्जी उत्पादन बढ़ा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जल संकट के दौर में यह आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है। सरकार जागरूकता अभियान चला रही है ताकि कोई पात्र किसान पीछे न छूटे। लुधियाना जैसे पंजाब क्षेत्रों के किसान भी स्थानीय योजनाओं की तलाश करें। अधिक जानकारी के लिए नजदीकी कृषि कार्यालय से संपर्क करें। यह योजना न सिर्फ फसल बचाएगी बल्कि किसानों की आय दोगुनी करने में मदद करेगी।









