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Ancestral Property Rule: क्या खानदानी जमीन रिश्तेदारों को बताए बिना बेच सकते हैं? जानें कानूनी नियम

पैतृक संपत्ति बेचने का सच्चा नियम! हिंदू कानून में बंटवारा हो या न हो, बिना सहमति बिक्री रद्द हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से चौंकिए लाखों का नुकसान टल जाए! विवाद से बचें, पूरा कानून जानें और हक मजबूत करें। अभी पढ़ें!

By Manju Negi

भारत के लाखों परिवारों में पैतृक संपत्ति को लेकर अक्सर विवाद खड़े होते हैं। खासकर खानदानी जमीन बेचने का सवाल सबसे ज्यादा उलझन पैदा करता है। क्या बंटवारे वाली जमीन को रिश्तेदारों को सूचना दिए बिना बेचा जा सकता है? कानूनी जानकारों का कहना है कि यह संपत्ति के स्वरूप पर निर्भर करता है। अविभाजित पैतृक जमीन पर सभी परिवारजनों का जन्म से अधिकार होता है, जबकि बंटवारे के बाद अलग हुआ हिस्सा व्यक्तिगत माना जाता है।

Ancestral Property Rule: क्या खानदानी जमीन रिश्तेदारों को बताए बिना बेच सकते हैं? जानें कानूनी नियम

पैतृक संपत्ति क्या होती है?

पैतृक या खानदानी संपत्ति वह जमीन या मकान है जो पिता, दादा या परदादा से चार पीढ़ियों तक बिना बांटे विरासत में मिली हो। हिंदू कानून के अनुसार ऐसी संपत्ति पर सभी संयुक्त मालिकों यानी सहदायिकों का बराबर हक रहता है। इसमें बेटे और बेटियां दोनों शामिल हैं, क्योंकि 2005 के कानूनी संशोधन ने महिलाओं को पूर्ण अधिकार दिया। अगर जमीन अभी भी संयुक्त रूप से दर्ज है, तो कोई एक व्यक्ति इसे अकेले नहीं बेच सकता। ऐसा करने पर बाकी सदस्य अदालत जा सकते हैं।

बंटवारे का महत्व

परिवार में अगर पहले से बंटवारा हो चुका है और partition deed से आपका हिस्सा अलग हो गया है, तो वह आपकी निजी संपत्ति बन जाती है। इस स्थिति में रजिस्ट्री आपके नाम पर होने पर रिश्तेदारों को बताए बिना बिक्री करना पूरी तरह वैध है। ज्यादातर मामले इसी पर टिके होते हैं। हालांकि, पारदर्शिता बनाए रखना हमेशा बेहतर होता है, ताकि भविष्य में कोई अनावश्यक दावा न उठे। किसान परिवारों में यह नियम खासतौर पर लागू होता है, जहां जमीन मुख्य आय का स्रोत होती है।

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बिक्री पर प्रतिबंध कब लगता है?

अगर जमीन अविभाजित है, तो सभी सहदायिकों की सहमति जरूरी होती है। बिना सहमति बेची गई संपत्ति पर खरीदार का मालिकाना हक कमजोर पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों ने स्पष्ट किया है कि संयुक्त संपत्ति में एकतरफा फैसला अमान्य होता है। ऐसे में अन्य वारिस सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर कर बिक्री रद्द करवा सकते हैं। पंजाब जैसे राज्यों में कृषि भूमि पर ये नियम और सख्ती से लागू होते हैं।

संभावित जोखिम और बचाव के उपाय

बिना सूचना बेचने से धोखाधड़ी का आरोप लग सकता है, जो आपराधिक मामला बन जाता है। इसके अलावा partition suit लंबे समय तक चल सकता है। बचाव के लिए राजस्व रिकॉर्ड, म्यूटेशन एंट्री और परिवारिक समझौते के दस्तावेजों की जांच करवाएं। भूलेख पोर्टल पर ऑनलाइन सत्यापन आसान हो गया है। वकील से सलाह लेकर नोटरी से एफिडेविट बनवाएं। डिजिटल युग में ये कदम विवादों को कम करते हैं।

परिवारिक समझौते की सलाह

विशेषज्ञ सुझाते हैं कि परिवार लिखित रूप से family arrangement कर लें। इससे भविष्य के झगड़े रुक जाते हैं। लुधियाणा जैसे शहरों में सोलर प्रोजेक्ट्स या सरकारी योजनाओं के तहत जमीन उपयोग के लिए ये नियम महत्वपूर्ण हैं। स्थानीय तहसील या पटवारी से संपर्क करें। कुल मिलाकर कानून पारदर्शिता पर जोर देता है, भले नैतिकता ही सही। संपत्ति बेचने से पहले सोच-समझकर कदम उठाएं।

Author
Manju Negi
अमर उजाला में इंटर्नशिप करने के बाद मंजु GyanOk में न्यूज टीम को लीड कर रही है. मूल रूप से उत्तराखंड से हैं और GyanOk नेशनल और राज्यों से संबंधित न्यूज को बारीकी से पाठकों तक अपनी टीम के माध्यम से पहुंचा रही हैं.

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