झारखंड सरकार ने अपनी ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की प्राणशक्ति सहिया बहनों को सशक्त बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। आगामी 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर राज्य भर की करीब 42,000 सहिया बहनों के बैंक खातों में एकमुश्त 24,000 रुपये की राशि हस्तांतरित कर दी जाएगी। यह राशि उनके पूरे वर्ष के मानदेय के बराबर है और सीधे डिजिटल माध्यम से उनके पास पहुंचेगी। इस घोषणा से न केवल इन बहनों में उत्साह का संचार हुआ है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।

सहिया बहन योजना
झारखंड के दुर्गम पहाड़ी इलाकों, घने जंगलों और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में सहिया बहनें स्वास्थ्य सेवाओं का चेहरा हैं। ये महिलाएं प्रतिदिन घर-घर जाकर मां-बच्चों की देखभाल करती हैं, टीकाकरण अभियान चलाती हैं, बीमारियों से बचाव के उपाय बताती हैं और सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाती हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में पैदल चलकर या साइकिल पर सवार होकर ये अपनी जिम्मेदारियां निभाती हैं। राज्य में इनकी संख्या 42,000 के आसपास है, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का अभिन्न हिस्सा हैं। इन्हें स्मार्टफोन दिए जाते हैं ताकि वे डेटा दर्ज कर सकें और स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बना सकें।
मानदेय का नया स्वरूप
सामान्य दिनों में सहिया बहनों को मासिक रूप से 2,000 रुपये का प्रोत्साहन राशि मिलती है, जो साल भर में ठीक 24,000 रुपये बनती है। लेकिन अतीत में भुगतान में देरी की शिकायतें आम रही हैं। इस बार सरकार ने इसे एकमुश्त राशि के रूप में देने का फैसला किया है, जो महिला दिवस को खास बनाने के साथ-साथ इन बहनों के आर्थिक बोझ को कम करेगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह कदम उनकी मेहनत को सम्मान देने का प्रतीक है। आने वाले दिनों में उनका मासिक मानदेय भी बढ़ाने की योजना पर काम चल रहा है, जिससे उनकी आय में और स्थिरता आएगी।
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महिला सशक्तिकरण की व्यापक पहल
यह घोषणा झारखंड सरकार की महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाती है। सहिया बहनें न सिर्फ स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान दे रही हैं, बल्कि परिवार और समाज को मजबूत करने में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। इस राशि से वे अपनी जरूरतों को पूरा कर सकेंगी, बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दे सकेंगी और घरेलू जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभा सकेंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी पहलों से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में इजाफा होगा, क्योंकि प्रेरित कार्यकर्ता अधिक समर्पण से काम करते हैं।
भविष्य की उम्मीदें और चुनौतियां
हालांकि यह उपहार स्वागतयोग्य है, फिर भी सहिया बहनों की कुछ मांगें लंबित हैं। वे सरकारी कर्मचारी का पूर्ण दर्जा चाहती हैं, ताकि उन्हें पेंशन, बीमा और अन्य सुविधाएं मिल सकें। सरकार ने इन मुद्दों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। 8 मार्च से पहले सभी लाभार्थियों को अपने बैंक खाते के विवरण अपडेट कर लेने की सलाह दी गई है। यह पहल निश्चित रूप से झारखंड की ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी और अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल कायम करेगी।
झारखंड की ये सहिया बहनें साबित कर रही हैं कि छोटे-छोटे कदम भी बड़े परिवर्तन ला सकते हैं।









