
दुनिया की चकाचौंध और शोर-शराबे से दूर उरुग्वे के तट पर बसा काबो पोलोनियो एक ऐसा अनोखा गाँव है, जहाँ आधुनिक सुविधाएँ आज भी एक सपना हैं। अटलांटिक महासागर के किनारे बसे इस गाँव में न तो बिजली की लाइनें हैं, न सड़कों का जाल और न ही नलों में पानी की सुविधा।
यहाँ के लोग आज भी रात के अंधेरे को दूर करने के लिए मोमबत्तियों और चाँदनी की रोशनी पर निर्भर रहते हैं। मुख्य हाईवे से मात्र 7 किलोमीटर दूर होने के बावजूद, यहाँ पहुँचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है, जो इस जगह को आधुनिक दुनिया से पूरी तरह अलग और बेहद शांत बनाती है।
काबो पोलोनियो
उरुग्वे के इस अनोखे गाँव तक पहुँचना किसी रोमांच से कम नहीं है, जहाँ पर्यटकों को रेत के ऊँचे टीलों पर पैदल चलना पड़ता है या विशेष 4×4 गाड़ियों का सहारा लेना पड़ता है। पूरे गाँव में केवल एक लाइटहाउस ही बिजली से जुड़ा है, जबकि बाकी ग्रामीण मोबाइल चार्ज करने के लिए भी संघर्ष करते हैं और पानी के लिए कुओं या बारिश पर निर्भर हैं।
सीमित संसाधनों और सौर ऊर्जा के भरोसे चलने वाले इस गाँव की असली खूबसूरती यहाँ की शांति और वन्यजीव हैं। यहाँ दक्षिण अमेरिका की सबसे बड़ी सी-लॉयन (Sea lion) कॉलोनियाँ पाई जाती हैं, जिन्हें लाइटहाउस की ऊँचाई से पत्थरों पर आराम करते हुए देखना एक अद्भुत अनुभव होता है।
सितारों की रोशनी और व्हेल मछलियों का बसेरा
प्राकृतिक खूबसूरती से भरपूर काबो पोलोनियो में सितंबर से नवंबर के बीच शांत समुद्र में व्हेल मछलियों को देखना एक आम लेकिन यादगार अनुभव है। स्ट्रीट लाइट और प्रदूषण न होने के कारण यहाँ का आसमान उरुग्वे में सबसे साफ माना जाता है, जहाँ रात में दूधिया चाँदनी और अनगिनत सितारे एकदम स्पष्ट दिखाई देते हैं।
शहरी शोर-शराबे से दूर सुकून की तलाश में आने वाले पर्यटकों के लिए यह जगह किसी जन्नत जैसी है, हालांकि यहाँ की जिंदगी उतनी ही चुनौतीपूर्ण है। मोबाइल चार्ज करने जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भी लोगों को स्थानीय दुकान के जनरेटर पर निर्भर रहना पड़ता है। सर्दियों में सन्नाटे में डूबा रहने वाला यह गाँव गर्मियों में सैलानियों की पहली पसंद बन जाता है।









