
वोटर लिस्ट में होने वाली गड़बड़ी और फर्जी मतदाताओं को हटाने के लिए चुनाव आयोग ने अब पूरे देश में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) अभियान चलाने का निर्णय लिया है। चुनाव आयोग के सचिव ने दिल्ली और कर्नाटक समेत 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों को इस काम को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। यह प्रक्रिया अप्रैल से शुरू होने की उम्मीद है, जिससे चुनाव प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और साफ-सुथरा बनाया जा सके।
अलग-अलग चरणों में वोटर लिस्ट का सुधार
चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने के लिए बिहार से शुरुआत करने के बाद अब दूसरे चरण का काम शुरू कर दिया है। 28 अक्टूबर 2025 से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सुधार की प्रक्रिया जारी है, जिसमें नए वोटरों के नाम जोड़ने और मृत व्यक्तियों के नाम हटाने जैसा ज़रूरी काम किया जा रहा है। यह अभियान उन राज्यों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जहाँ आने वाले समय में विधानसभा चुनाव होने हैं, जैसे हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड (2027) और तेलंगाना (2028)।
22 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों की लिस्ट जहां SIR होगा?
- आंध्र प्रदेश
- अरुणाचल प्रदेश
- चंडीगढ़
- दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव
- हरियाणा
- हिमाचल प्रदेश
- जम्मू- कश्मीर
- झारखंड
- कर्नाटक
- लद्दाख
- महाराष्ट्र
- मणिपुर
- मेघालय
- मिजोरम
- नगालैंड
- दिल्ली
- ओडिशा
- पंजाब
- सिक्किम
- त्रिपुरा
- तेलंगाना
- उत्तराखंड
क्या है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)?
वोटर लिस्ट को पूरी तरह शुद्ध और अपडेट करने की प्रक्रिया को ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) कहा जाता है। इस प्रक्रिया के तहत 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए युवाओं के नाम जोड़े जाते हैं, मृतकों के नाम हटाए जाते हैं और पुरानी गलतियों जैसे नाम, फोटो या पते को ठीक किया जाता है। चुनाव आयोग समय-समय पर इसे छोटे या बड़े स्तर पर आयोजित करता रहा है। ऐतिहासिक रूप से, 1951 से 2004 के बीच कुल 8 बार SIR कराया गया है, और अब 21 साल के लंबे अंतराल के बाद इसे फिर से बड़े स्तर पर लागू किया जा रहा है।
SIR की प्रक्रिया और अगले चरण
चुनाव आयोग ने अभी उन 22 राज्यों के लिए SIR शुरू करने की सटीक तारीखों की घोषणा नहीं की है, लेकिन इसकी शुरुआत अप्रैल 2026 से होने की पूरी उम्मीद है। वर्तमान में, सभी राज्यों के निर्वाचन अधिकारियों को तैयारी तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। इस तैयारी के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की नियुक्ति और पोलिंग स्टेशनों को अंतिम रूप देने जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य किए जाएंगे। एक बार यह जमीनी तैयारी पूरी हो जाने के बाद, आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा, जिसमें आवेदन करने, आपत्तियां दर्ज कराने और अंतिम वोटर लिस्ट जारी करने का पूरा शेड्यूल बताया जाएगा।
SIR अभियान का मुख्य उद्देश्य और महत्व
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का सबसे प्रमुख उद्देश्य वोटर लिस्ट की शुद्धता सुनिश्चित करना और विदेशी अवैध प्रवासियों, विशेषकर बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोगों की पहचान कर उन्हें सूची से बाहर करना है। बिहार के सफल प्रयोग के बाद अब अन्य राज्यों में भी यह प्रक्रिया लागू की जा रही है, जिससे फर्जी वोटिंग पर रोक लगेगी और चुनावी सिस्टम में पारदर्शिता आएगी।
यह अभियान एक ‘कट-ऑफ’ के रूप में काम करेगा, जो भविष्य के लिए एक ठोस और साफ-सुथरी वोटर लिस्ट तैयार करेगा। गौरतलब है कि दिल्ली और उत्तराखंड जैसे राज्यों में भी लंबे समय (2006-2008) के बाद अब जाकर दोबारा इतने बड़े स्तर पर सुधार होने जा रहा है।
SIR की प्रशासनिक संरचना और शिकायत निवारण
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को सुचारू रूप से चलाने के लिए चुनाव आयोग ने एक मजबूत ढांचा तैयार किया है। इसके तहत प्रत्येक पोलिंग स्टेशन पर अधिकतम 1,000 मतदाता तय किए गए हैं, जिनकी जिम्मेदारी एक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को सौंपी जाएगी।
पूरी विधानसभा के कामकाज की देखरेख इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) करेंगे, जो SDM स्तर के अधिकारी होंगे, और उनकी सहायता के लिए हर तहसील में असिस्टेंट ऑफिसर तैनात रहेंगे। यदि किसी नागरिक को ERO के निर्णय पर आपत्ति है, तो वे पहली अपील जिला मजिस्ट्रेट (DM) के पास और दूसरी अपील राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के पास कर सकते हैं।
चुनाव आयोग की संगठनात्मक संरचना (SIR के दौरान)
| पद (Designation) | कार्यक्षेत्र (Jurisdiction) | मुख्य जिम्मेदारी |
| BLO | पोलिंग स्टेशन (1000 वोटर) | जमीनी स्तर पर डेटा का सत्यापन करना। |
| AERO | तहसील स्तर | ERO की सहायता और आवेदन प्रक्रिया संभालना। |
| ERO (SDM) | विधानसभा क्षेत्र | वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने/हटाने पर अंतिम निर्णय लेना। |
| DM | जिला स्तर | पहली अपील (शिकायत) की सुनवाई करना। |
| CEO | राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | दूसरी और अंतिम अपील की सुनवाई करना। |
SIR के लिए आवश्यक दस्तावेज (Documents)
वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने या सुधार करवाने के लिए आपको अपनी पहचान (Identity) और निवास (Address) का प्रमाण देना होगा। चुनाव आयोग ने इसके लिए कई विकल्पों को मान्यता दी है, जिनमें आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड और राशन कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा, आप बिजली, पानी या गैस का बिल, बैंक पासबुक, मनरेगा जॉब कार्ड, निवास प्रमाण पत्र या यहाँ तक कि 2002 की पुरानी वोटर लिस्ट की कॉपी का भी उपयोग कर सकते हैं। ये सभी दस्तावेज़ व्यक्ति के स्थायी पते और सही पहचान की पुष्टि के लिए अनिवार्य होंगे।
वोटर लिस्ट और नागरिकता वेरिफिकेशन के लिए जरूरी दस्तावेज
वोटर आईडी कार्ड बनवाने और अपनी भारतीय नागरिकता प्रमाणित करने के लिए चुनाव आयोग ने 12 मुख्य दस्तावेजों को मान्यता दी है। इनमें बर्थ सर्टिफिकेट सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह आपके जन्म और नागरिकता का प्राथमिक प्रमाण है। इसके अलावा, वैध पासपोर्ट, हाईस्कूल की मार्कशीट, और सरकारी सर्विस आईडी का उपयोग पहचान और जन्मतिथि के लिए किया जा सकता है।
जनजातीय क्षेत्रों के लिए फॉरेस्ट राइट सर्टिफिकेट, सामाजिक पहचान के लिए कास्ट सर्टिफिकेट, और पते की पुष्टि के लिए जमीन अलॉटमेंट लेटर या फैमिली रजिस्टर जैसे विकल्प भी मौजूद हैं। विशेष रूप से, अब आधार कार्ड को भी इस लिस्ट में 12वें स्थान पर शामिल कर लिया गया है, जो पहचान और पते के लिए एक सशक्त दस्तावेज है।









