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नोट छापने की मशीन है यह खास फूल! एक बार लगाएं और 25 साल तक बैठ कर कमाएं; हर घर में होती है इसकी भारी मांग

नोट छापने वाली मशीन है अनाट्टो फूल। कम खर्च में लगाओ, हर साल लाखों कमा। खाने से सिंदूर तक हर घर में डिमांड। सरल खेती, कोई टेंशन नहीं। जल्दी जानो ये कमाई का राज!

By Manju Negi

किसानों के लिए एक नया अवसर उभर रहा है। अनाट्टो नामक यह खास झाड़ीनुमा पौधा एक बार लगाने पर दो दशक से अधिक समय तक आय का स्रोत बन सकता है। इसके लाल-नारंगी फूलों और बीजों से निकलने वाला प्राकृतिक रंग खाद्य सामग्री से लेकर सौंदर्य प्रसाधनों तक हर जगह काम आता है। कम मेहनत और लागत में स्थिर मुनाफा देने की वजह से इसे नोट छापने वाली मशीन कहा जा रहा है।

नोट छापने की मशीन है यह खास फूल! एक बार लगाएं और 25 साल तक बैठ कर कमाएं; हर घर में होती है इसकी भारी मांग

अनाट्टो फसल की खासियतें

यह उष्णकटिबंधीय पौधा दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में आसानी से पनपता है। इसके बीजों से प्राप्त अन्नाटो रंग घी, पनीर, आइसक्रीम जैसे खाद्य पदार्थों में रंग भरता है। साथ ही साबुन, सिंदूर और कपड़ों के रंगाई में भी इसका भारी उपयोग होता है। पौधा सूखा सहन करने वाला है, इसलिए कम पानी वाले इलाकों में भी सफल होता है। इसके पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर हैं, जो पाचन सुधारने और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने में सहायक साबित होते हैं। हर घर में इस रंग की मांग बनी रहती है, जिससे बाजार हमेशा तैयार रहता है।

सरल खेती प्रक्रिया

खेती शुरू करना आसान है। अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी चुनें, जहां तापमान 20 से 35 डिग्री सेल्सियस रहे। मानसून के दौरान बीज या कलम से नर्सरी तैयार कर 5×5 मीटर दूरी पर रोपाई करें। एक एकड़ में 500 से 1000 पौधे आसानी से लग जाते हैं। पहले साल में पौधा मजबूत होता है, दूसरे साल फलन शुरू हो जाता है और तीसरे साल से पूरी पैदावार मिलने लगती है। साल में दो बार जैविक खाद दें, बिखरी धूप और हल्की सिंचाई पर्याप्त है। जलभराव से बचाएं, तो पौधा 25 साल तक उत्पादक बना रहता है। रखरखाव न्यूनतम होने से किसान अन्य कामों पर ध्यान दे सकते हैं।

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मुनाफे का मजबूत आधार

शुरुआती निवेश कम है, मात्र 50,000 से 1 लाख रुपये प्रति एकड़। इसमें नर्सरी, गड्ढे खोदना और खाद शामिल है। दूसरे साल से हर पौधे पर 1 किलो बीज मिल सकता है, यानी कुल 500 किलो से अधिक पैदावार। बाजार में भाव 200 से 300 रुपये प्रति किलो रहता है, जो सालाना 1 से 3 लाख रुपये की आय सुनिश्चित करता है। शुद्ध लाभ 2 से 4 लाख तक पहुंच सकता है। मांग बढ़ रही है क्योंकि रासायनिक रंगों पर पाबंदियां लग रही हैं। निर्यात बाजार जैसे अमेरिका और यूरोप भी आकर्षक हैं। सफल किसान हर साल बढ़ती कमाई से आर्थिक स्वतंत्रता हासिल कर रहे हैं।

चुनौतियां और समाधान

कुछ जोखिम भी हैं। प्रसंस्करण इकाइयों की कमी से कच्चे बीजों का दाम कभी कम हो सकता है। अधिक सेवन से स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है, इसलिए संतुलित उपयोग जरूरी। सरकारी योजनाएं जैसे राष्ट्रीय बागवानी मिशन सब्सिडी और प्रशिक्षण देती हैं। कृषि विशेषज्ञों से सलाह लें। अमृतसर जैसे क्षेत्रों में भी प्रयोग शुरू हो रहे हैं। यह फसल मिट्टी संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देती है।

किसान भाइयों, अनाट्टो आपके खेत को कमाई का स्थायी स्रोत बना सकता है। आज ही स्थानीय कृषि केंद्र से संपर्क करें और इस सुनहरे अवसर को अपनाएं। यह न केवल धन देगी, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल खेती का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।

Author
Manju Negi
अमर उजाला में इंटर्नशिप करने के बाद मंजु GyanOk में न्यूज टीम को लीड कर रही है. मूल रूप से उत्तराखंड से हैं और GyanOk नेशनल और राज्यों से संबंधित न्यूज को बारीकी से पाठकों तक अपनी टीम के माध्यम से पहुंचा रही हैं.

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