
दुनिया में जहां औसत उम्र 70-80 साल है, वहीं पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान में बसी हुंजा घाटी के लोग 120-150 साल तक जीवित रहते हैं। 80 साल की महिलाएं भी 30-40 जैसी जवानी दिखाती हैं, और कैंसर जैसी बीमारियां यहां नाममात्र की हैं। फोर्ब्स ने इसे दुनिया की सबसे खूबसूरत जगहों में गिना, लेकिन असली रहस्य इनकी डाइट और लाइफस्टाइल में छिपा है। आइए, गहराई से जानें इस ‘ब्लू जोन’ का चमत्कार।
प्रकृति का आशीर्वाद
समुद्र तल से 2,500 मीटर ऊंचाई पर कराकोरम पहाड़ों में बसी हुंजा वैली शुद्ध हवा, ग्लेशियर पानी और हरियाली से लबालब है। बुरुशो और वाखी समुदाय यहां रहता है, जिन्हें सिकंदर महान के वंशज भी कहा जाता है- हालांकि ऐतिहासिक प्रमाण अधूरे हैं। दिल्ली से महज 889 किमी दूर ये जगह पर्यटकों को लुभाती है, लेकिन स्थानीय कभी बीमार नहीं पड़ते। 1984 में ब्रिटेन ने एक बुजुर्ग महिला को वीजा न देने का हवाला दिया कि उसका जन्म 1832 में हुआ! ग्लेशियर पानी खनिजों से भरपूर होता है, जो इम्यूनिटी बढ़ाता है।
फल-मेवों का साम्राज्य
हुंजा लोगों की डाइट 70% फल (खूबानी, आड़ू), 20% सब्जियां-मेवे (अखरोट, बादाम), 10% अनाज (जौ, बाजरा) है। चीनी-नमक न्यूनतम, कम फैट दही और कड़वी खूबानी का तेल जोड़ों के दर्द व कैंसर से बचाता है। विटामिन B-17 एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर। सर्दियों में उपवास रखते हैं, सिर्फ फल खाते हैं। ये डाइट हृदय रोग 90% कम रखती है। रिसर्च बताते हैं, उच्च फाइबर से पाचन मजबूत और तनाव शून्य।
श्रम ही स्वास्थ्य का मूलमंत्र
सुबह 5 बजे उठना, 10 किमी पैदल चलना, पहाड़ चढ़ना और खेती – ये उनकी दिनचर्या है। नशा मुक्त, तनावरहित सामुदायिक जीवन। उबड़-खाबड़ रास्ते स्टेमिना बढ़ाते हैं। महिलाएं 60-65 में मां बन सकती हैं, पुरुष 90 में पिता। स्टडीज (नेशनल ज्योग्राफिक, 1970s) से साबित: जीन + लाइफस्टाइल से उम्र बढ़ती है।
| लंबी उम्र के प्रमुख कारक | विवरण |
|---|---|
| डाइट | फल-मेवे प्रधान, कम कैलोरी |
| पानी | ग्लेशियर, खनिज युक्त |
| व्यायाम | रोज पैदल चलना, श्रम |
| मानसिक शांति | समुदायिक जीवन, नो स्ट्रेस |
| पर्यावरण | शुद्ध हवा, ऊंचाई |
वैज्ञानिक नजरिया और चुनौतियां
WHO के अनुसार वैश्विक औसत 73 साल है, लेकिन हुंजा ‘ब्लू जोन’ में शुमार। हालांकि कुछ स्टडीज उम्र के दावों पर सवाल उठाती हैं- जन्म रिकॉर्ड न होने से। फिर भी, उनकी फिटनेस निर्विवाद। आधुनिकीकरण से खतरा: जंक फूड घुसपैठ कर रहा। भारत में भी इसे अपनाएं – खूबानी-अखरोट खाएं, वॉक करें।









