
किसी भी बड़े काम या इंटरव्यू से पहले सैलून जाना आम बात है, लेकिन हेयरस्टाइलिस्ट को निर्देश देते समय सावधानी बरतना कितना जरूरी है, यह दिल्ली की मॉडल आशना रॉय के मामले से समझा जा सकता है। गलत हेयरकट के कारण मॉडल का पूरा लुक खराब हो गया था, जिसे ‘सेवा में कमी’ मानते हुए उपभोक्ता अदालत ने पहले 2 करोड़ रुपये का मुआवजा तय किया था।
हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए मुआवजे की राशि को तार्किक बनाने के लिए घटाकर 25 लाख रुपये कर दिया है। कोर्ट ने माना कि लापरवाही तो हुई है, लेकिन मुआवजे की रकम तथ्यों के आधार पर उचित होनी चाहिए।
जब एक हेयरकट ने मॉडल के करियर पर लगाया ब्रेक
यह मामला साल 2018 का है, जब आईजीएम (IIM) कलकत्ता की छात्रा और मॉडल आशना रॉय दिल्ली के प्रतिष्ठित ITC मौर्या होटल के सैलून में हेयरकट कराने गईं। उन्होंने अपने बालों के लिए खास ‘लेयर्ड स्टाइल’ (Layered styling) माँगी थी, लेकिन हेयरस्टाइलिस्ट की गलती से उनके बाल उनकी पसंद के खिलाफ बहुत छोटे कर दिए गए। आशना का दावा था कि इस गलत हेयरकट ने उन्हें मानसिक सदमे में डाल दिया और उनके मॉडलिंग करियर को भारी नुकसान पहुँचाया।
होटल ने अपनी सफाई में कहा कि मॉडल सेवा से संतुष्ट थीं, लेकिन मामला जब राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (NCDRC) पहुँचा, तो आयोग ने इसे ‘सेवा में कमी’ माना। आयोग ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि एक मॉडल के लिए उसके बाल उसकी सबसे बड़ी संपत्ति हैं और होटल को 2 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
क्यों 2 करोड़ से घटकर 25 लाख रह गया मुआवजा?
कंज्यूमर कोर्ट के 2 करोड़ रुपये के जुर्माने के खिलाफ ITC मौर्या होटल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। होटल की दलील थी कि मुआवजे की यह राशि बहुत अधिक है और मॉडल ने इतने बड़े आर्थिक नुकसान का कोई ठोस सबूत (जैसे बड़े कॉन्ट्रैक्ट का हाथ से निकलना) पेश नहीं किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क से सहमति जताते हुए कहा कि मुआवजा वास्तविक नुकसान के आधार पर तय होना चाहिए, न कि केवल शिकायतकर्ता के अनुमानों या मनमर्जी (Whims and Fancies) पर। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फोटोकॉपी और काल्पनिक आंकड़ों के आधार पर करोड़ों का हर्जाना नहीं दिया जा सकता। अंततः, सबूतों की कमी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जुर्माने को घटाकर 25 लाख रुपये कर दिया, जो अब होटल को मॉडल को भुगतान करना होगा।
अब घर बैठे दर्ज करें उपभोक्ता शिकायत, ₹5 लाख तक कोई फीस नहीं
आज के डिजिटल दौर में अपने अधिकारों के लिए लड़ना और भी आसान हो गया है। अगर किसी कंपनी या दुकानदार ने आपको घटिया सामान या सेवा दी है, तो आप ‘ई-दाखिल’ (e-Daakhil) पोर्टल के जरिए ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इस व्यवस्था की सबसे बड़ी राहत यह है कि यदि आपका मामला 5 लाख रुपये तक की कीमत वाले सामान या सेवा से जुड़ा है, तो आपको कोई भी कोर्ट फीस नहीं देनी होगी। यह पोर्टल न केवल समय बचाता है, बल्कि उपभोक्ताओं को बिना किसी आर्थिक बोझ के न्याय पाने का मौका भी देता है।









