
टेक्नोलॉजी के इतिहास में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए दुनिया की 15 दिग्गज कंपनियों ने जर्मनी में आयोजित ‘म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस’ के दौरान हाथ मिलाया है। इन कंपनियों ने मिलकर ‘ट्रस्टेड टेक अलायंस’ (TTA) बनाने का ऐलान किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है।
भारत के लिए यह बड़े गर्व की बात है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज की ‘जियो प्लेटफॉर्म्स’ को इस पावरफुल वैश्विक समूह में प्रमुख स्थान दिया गया है। यह गठबंधन आने वाले समय में पूरी दुनिया के डिजिटल भविष्य को नई दिशा देने का काम करेगा।
गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और जियो का ऐतिहासिक गठबंधन
‘ट्रस्टेड टेक अलायंस’ (TTA) कोई साधारण समूह नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली टेक लीडर्स का एक ‘सुपर-ग्रुप’ है। इसमें क्लाउड कंप्यूटिंग के महारथी गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न (AWS) शामिल हैं, तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया से एंथ्रोपिक और कोहियर जैसे बड़े नाम जुड़े हैं।
टेलीकॉम और हार्डवेयर के क्षेत्र से एरिक्सन, नोकिया, और एनटीटी जैसी दिग्गज कंपनियां इस मुहिम का हिस्सा बनी हैं। इनके साथ ही कसावा टेक्नोलॉजीज, हनवा और सैप (SAP) जैसी वैश्विक कंपनियों ने भी हाथ मिलाया है। इस विशिष्ट क्लब में भारत की जियो प्लेटफॉर्म्स की मौजूदगी यह साबित करती है कि अब दुनिया के डिजिटल फैसले बिना भारत के नहीं लिए जाएंगे।
AI और डेटा चोरी के डर को खत्म करेगा यह अलायंस
आज के दौर में AI और डेटा सुरक्षा को लेकर बढ़ते खतरों के बीच यह अलायंस एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा। इसका मुख्य लक्ष्य एक ऐसा ‘टेक्नोलॉजी स्टैक’ तैयार करना है, जो पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित हो।
आसान भाषा में कहें तो, आपके इंटरनेट से लेकर मोबाइल चिप, सॉफ्टवेयर और क्लाउड स्टोरेज तक के लिए ऐसे ग्लोबल स्टैंडर्ड तय किए जाएंगे, जिनसे डेटा चोरी और निजता (Privacy) के उल्लंघन का खतरा खत्म हो जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा आम यूजर्स को होगा, जिन्हें अब इंटरनेट और एआई सेवाओं का इस्तेमाल करते समय अपनी पर्सनल जानकारी को लेकर डरना नहीं पड़ेगा।
ग्लोबल टेक मैप पर भारत का दबदबा
ट्रस्टेड टेक अलायंस (TTA) में जियो प्लेटफॉर्म्स का शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि भारत अब दुनिया के लिए केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि तकनीक बनाने और उसके नियम तय करने वाला देश बन चुका है। जियो के सीईओ किरण थॉमस ने स्पष्ट किया कि वैश्विक डिजिटल विकास के लिए पारदर्शिता और भरोसा सबसे जरूरी है।
यह समूह यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य की तकनीक केवल मुनाफे के लिए न हो, बल्कि पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद हो। साथ ही, समाज पर पड़ने वाले तकनीक के बुरे प्रभावों को रोकने के लिए ये सभी 15 कंपनियां एक साझा रणनीति पर काम करेंगी, जिससे आम लोगों का डिजिटल अनुभव सुरक्षित और सकारात्मक होगा।









