
भारतीय रेलवे ने अपनी कमाई बढ़ाने और सीटों के बेहतर इस्तेमाल के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब ट्रेनों में तैनात ऑन-बोर्ड स्टाफ (जैसे एसी मैकेनिक और वेंडिंग स्टाफ) के लिए आरक्षित सीटों के कोटे में कटौती की जाएगी। रेलवे का मानना है कि स्टाफ के पास खाली रहने वाली इन सीटों को यात्रियों को अलॉट करने से न केवल उन्हें कन्फर्म टिकट मिलने में आसानी होगी, बल्कि प्रीमियम कोचों (AC) से होने वाली आय में भी बड़ा इजाफा होगा। यह कदम रेलवे के संसाधनों के कुशल उपयोग और राजस्व बढ़ाने की दिशा में एक अहम बदलाव माना जा रहा है।
AC-1 और AC-2 से स्टाफ कोटा खत्म, यात्रियों को मिलेंगी लग्जरी सीटें
भारतीय रेलवे ने अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए एक कड़ा कदम उठाया है। नए नियमों के अनुसार, अब एसी प्रथम (1st AC) और एसी द्वितीय (2nd AC) कोचों में मेंटेनेंस या ऑन-बोर्ड स्टाफ के लिए कोई भी सीट आरक्षित या ‘ब्लॉक’ नहीं रखी जाएगी। अभी तक इन प्रीमियम कोचों की कीमती सीटें स्टाफ के पास रहती थीं, जिससे रेलवे को भारी आर्थिक नुकसान होता था।
साल 2016 और 2018 के पुराने नियमों को रद्द करते हुए रेलवे ने अब ये सभी सीटें यात्रियों के लिए खोल दी हैं। इस बदलाव से हर ट्रेन में औसतन 4 से 6 अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी, जिससे यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने में आसानी होगी और रेलवे की रोजाना की कमाई में भी लाखों रुपये का इजाफा होगा।
अब प्रीमियम कोच नहीं, स्लीपर और थर्ड एसी में ही एडजस्ट होगा स्टाफ
राजस्व बढ़ाने के लिए रेलवे ने ऑन-बोर्ड स्टाफ के बैठने के नियमों को कड़ा कर दिया है। अब राजधानी और दुरंतो जैसी ट्रेनों में स्टाफ को एसी-1 या एसी-2 के बजाय केवल थर्ड एसी (3AC) में मात्र दो सीटें दी जाएंगी। स्लीपर ट्रेनों में उन्हें अनिवार्य रूप से स्लीपर क्लास में ही सफर करना होगा।
हाउसकीपिंग स्टाफ (सफाईकर्मियों) के लिए भी ‘स्प्रेड मॉडल’ लागू किया गया है, जिसके तहत उन्हें स्लीपर या थर्ड एसी में अधिकतम 4 ‘साइड लोअर’ बर्थ ही मिलेंगी। सबसे बड़ा बदलाव पेंट्री कार वाली ट्रेनों में हुआ है, जहाँ वेंडिंग स्टाफ को अब कोच के भीतर एक भी सीट नहीं मिलेगी; उन्हें अपनी जगह पेंट्री कार में ही बनानी होगी।
सीटों के दुरुपयोग पर रेलवे का ‘हंटर’
रेलवे ने स्टाफ सीटों के गलत इस्तेमाल और वित्तीय नुकसान को रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। रेलवे बोर्ड के निदेशक (पैसेंजर मार्केटिंग) संजय मनोचा के अनुसार, जिन ट्रेनों में पेंट्री कार है, वहाँ वेंडिंग स्टाफ को कोच के भीतर कोई सीट नहीं मिलेगी, उन्हें पेंट्री में ही रहना होगा।
जिन ट्रेनों में पेंट्री कार नहीं है, वहाँ उन्हें अधिकतम दो सीटें ही दी जाएंगी। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य सीटों के दुरुपयोग को खत्म करना और वेटिंग लिस्ट को कम करना है। इन सीटों के सिस्टम (यात्रियों के लिए उपलब्ध) में वापस आने से रेलवे के मुनाफे में सीधा इजाफा होगा और आम यात्रियों को कन्फर्म बर्थ के लिए कम इंतजार करना पड़ेगा।









