
भारत में कुल 797 जिलों के साथ उत्तर प्रदेश जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है, जहां 75 जिले और 351 तहसीलें फैली हुई हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यूपी के किस जिले में सबसे ज्यादा तहसीलें हैं? अपने आपको जीके का धुरंधर बताने वाले भी इस सवाल का सटीक जवाब नहीं दे पाते। आखिरकार, उत्तर प्रदेश का यह खास जिला है प्रयागराज, जहां कुल 8 तहसीलें हैं। यह आंकड़ा न केवल प्रशासनिक दक्षता को दर्शाता है, बल्कि जिले की विशालता और ऐतिहासिक महत्व को भी उजागर करता है।
प्रयागराज: तहसीलों का केंद्र
प्रयागराज जिला, पहले इलाहाबाद के नाम से जाना जाता, उत्तर प्रदेश के 18 मंडलों में से प्रयागराज मंडल का हिस्सा है। यहां 8 तहसीलें हैं – सदर, फूलपुर, सोरांव, हंडिया, करछना, बारा, मेजा और कोरांव। प्रत्येक तहसील एक उपजिलाधिकारी के नेतृत्व में चलती है, जो राजस्व संग्रह, भूमि रिकॉर्ड और विकास कार्यों का जिम्मा संभालती हैं। उदाहरण के लिए, फूलपुर तहसील में 567 गांव हैं, जबकि कोरांव में 278। ये तहसीलें जिले को 23 विकास खंडों में विभाजित करती हैं, जो ग्रामीण विकास को गति प्रदान करती हैं।
यह संख्या अन्य जिलों से अधिक है। पहले आजमगढ़ को भी 8 तहसीलों वाला बताया जाता था, लेकिन हालिया आंकड़ों में प्रयागराज शीर्ष पर है। राज्य के 4 संभागों – पश्चिमी यूपी, पूर्वांचल, मध्य यूपी और बुंदेलखंड में प्रयागराज मध्य क्षेत्र का गढ़ है। जिले का क्षेत्रफल 5,482 वर्ग किलोमीटर है, जो लखीमपुर खीरी (7,680 वर्ग किमी, सबसे बड़ा) से छोटा लेकिन प्रशासनिक रूप से जटिल है। वहीं, सबसे छोटा जिला हापुड़ मात्र 660 वर्ग किमी में सिमटा है।
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
प्रयागराज केवल तहसीलों का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का त्रिवेणी संगम यहां स्थित है, जो हर 6 वर्ष में कुंभ और 12 वर्ष में महाकुंभ का आयोजन करता है। 2019 के कुंभ ने करोड़ों श्रद्धालुओं को आकर्षित किया, जिसके लिए इन तहसीलों ने रसद और सुरक्षा सुनिश्चित की। स्वतंत्रता संग्राम में भी प्रयागराज अहम रहा – 1885 में कांग्रेस की स्थापना और गांधीजी के अहिंसा आंदोलन की शुरुआत यहीं हुई।
जनसंख्या के लिहाज से जिला 59.54 लाख लोगों का घर है, जिसमें 31.32 लाख पुरुष और 28.23 लाख महिलाएं हैं। 3,178 गांवों के साथ यह पूर्वी बलिया और उत्तरी सहारनपुर के बीच स्थित है। पड़ोसी जिले प्रतापगढ़ (उत्तर), संत रविदास नगर (पूर्व), रीवा (दक्षिण) और कौशाम्बी (पश्चिम) हैं। झांसी की सबसे बड़ी तहसील होने के बावजूद, प्रयागराज की तहसीलें दक्षिणी दोआब क्षेत्र में महत्वपूर्ण हैं।
प्रशासनिक चुनौतियां और भविष्य
अधिक तहसीलों के बावजूद, प्रयागराज में भूमि विवाद और बाढ़ जैसी समस्याएं बनी रहती हैं। डिजिटल इंडिया के तहत तहसीलें अब ई-कोर्ट और भूलेख पोर्टल से जुड़ी हैं, जो सेवाओं को तेज बनाती हैं। राज्य सरकार ने हाल ही में नए जिलों का गठन किया, लेकिन प्रयागराज की संरचना अपरिवर्तित है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुंभ-2025 की तैयारी में ये तहसीलें फिर सुर्खियों में रहेंगी। यह जानकारी न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है, बल्कि यूपी की प्रशासनिक संरचना समझने के लिए भी। क्या आपको पता था? कमेंट में बताएं!









