
भारतीय सेना सिर्फ हथियारों की ताकत नहीं, बल्कि परंपरा, वीरता और बलिदान का जीवंत प्रतीक है। दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं में शुमार इंडियन आर्मी के जवान सीमाओं पर हमेशा सतर्क रहते हैं, दुश्मन की किसी भी साजिश को चकनाचूर करने को तैयार। आर्मी की रेजिमेंटें इसकी रीढ़ हैं, जिनकी कहानियां युद्धक्षेत्रों से लेकर गणतंत्र दिवस परेड तक गूंजती हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत की 5 सबसे खतरनाक रेजिमेंट कौन-सी हैं? इनके नाम मात्र से पाकिस्तान और चीन जैसे दुश्मन देश थर-थर कांपने लगते हैं। इन रेजिमेंट्स के जवान न सिर्फ शारीरिक रूप से मजबूत हैं, बल्कि उनकी ट्रेनिंग और युद्ध कौशल दुश्मन को मिनटों में धूल चटा देते हैं। आइए, गहराई से जानते हैं इन वीरों की कहानी।
गोरखा रेजिमेंट
गोरखा रेजिमेंट को भारतीय सेना की सबसे खूंखार इकाई माना जाता है। 24 अप्रैल 1815 को स्थापित यह रेजिमेंट नेपाली गोरखाओं की निडरता का प्रतीक है। इनका युद्धघोष ‘जय मां काली, आयो गोरखाली’ सुनते ही दुश्मन का मनोबल टूट जाता है। खुकरी से लैस ये जवान द्वितीय विश्व युद्ध, भारत-पाक युद्धों और गलवान संघर्ष में अमर हो चुके हैं। पाकिस्तानी और चीनी सेना इनके नाम से डरती है, क्योंकि गोरखा सैनिक कभी पीछे नहीं हटते। गणतंत्र दिवस 2026 परेड में इनकी मार्चिंग ने राष्ट्र को गौरवान्वित किया। इनकी कठोर ट्रेनिंग दुनिया भर में मशहूर है।
पैराशूट रेजिमेंट
पैराशूट रेजिमेंट भारतीय सेना की एलीट स्पेशल फोर्स है, जो हवाई हमलों में माहिर। कारगिल युद्ध में 5वीं, 6वीं और 7वीं बटालियन ने मुश्कोह घाटी और बाटालिक पॉइंट पर कब्जा कर दुश्मन को खदेड़ा। 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक में पैरा कमांडो ने LoC पार कर आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया। इनकी ट्रेनिंग इतनी कठिन है कि चुनिंदा जवान ही इसे पास करते हैं। दुश्मन इलाके में पैराशूट से उतरकर अचानक हमला करना इनका धंधा है। गणतंत्र दिवस 2026 में इनकी परफॉर्मेंस ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
बिहार रेजिमेंट
बिहार रेजिमेंट अपनी दृढ़ता के लिए जानी जाती है। द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर 1971 के युद्ध, सोमालिया शांति मिशन और गलवान घाटी में चीनी सैनिकों को धूल चटाने तक इनका शौर्य बेमिसाल। ‘जय बजरंगबली’ का नारा गूंजते ही दुश्मन कांप उठता है। गलवान में इनके जवानों ने नंगे हाथों लड़कर चीन को सबक सिखाया। यह रेजिमेंट कठिन परिस्थितियों में भी अडिग रहती है।
कुमाऊं रेजिमेंट
कुमाऊं रेजिमेंट का इतिहास 1794 से जुड़ा है, जब इसे रेमंट कोर कहा जाता था। 1945 में इसका नाम बदला गया। 1965-71 युद्धों में वाल्फ मैदान जैसी लड़ाइयों में पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी। पहाड़ी इलाकों में विशेषज्ञ ये जवान अनुशासन और साहस के प्रतीक हैं। दुश्मन इनकी चालाकी और जज्बे से घबराता है।
राजपूत रेजिमेंट
राजपूत रेजिमेंट (राजपूताना राइफल्स) 1940 में स्थापित, आर्मी की सबसे पुरानी इकाईयों में से एक। 1971 के लोंगेवाला युद्ध में इनकी वीरता अमर है। ‘बोल राजपूतों का राजा बनेगा’ का उद्घोष दुश्मन को भयभीत कर देता है। गणतंत्र दिवस पर इनकी परेड राष्ट्रप्रेम जगाती है।
ये रेजिमेंटें न सिर्फ युद्ध में विजयी होती हैं, बल्कि राष्ट्र की एकता का प्रतीक हैं। गणतंत्र दिवस 2026 में इनकी झलक देखकर हर भारतीय का सीना चौड़ा हो गया। भारतीय सेना का जज्बा सीमाओं पर अटल है!









