Tags

सावधान! चेक बाउंस हुआ तो होगी जेल या भारी जुर्माना? धारा 138 के तहत जानें अपनी सुरक्षा और कानून के कड़े नियम

क्या एक साधारण चेक बाउंस आपको जेल की सलाखों के पीछे पहुँचा सकता है? राजपाल यादव जैसे मामलों ने 'धारा 138' की गंभीरता को साफ कर दिया है। जानें नोटिस मिलने के बाद वो 15 दिन क्यों महत्वपूर्ण हैं और भारी जुर्माने से बचने के कानूनी तरीके क्या हैं।

By Pinki Negi

सावधान! चेक बाउंस हुआ तो होगी जेल या भारी जुर्माना? धारा 138 के तहत जानें अपनी सुरक्षा और कानून के कड़े नियम
चेक बाउंस

मशहूर अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस होने के पुराने मामले में जेल की सजा काटनी पड़ी है। यह विवाद साल 2010 में शुरू हुआ था, जब उन्होंने अपनी एक फिल्म बनाने के लिए 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असफल होने के कारण वे समय पर पैसा नहीं लौटा पाए, जिससे ब्याज और जुर्माने के चलते कुल बकाया राशि 9 करोड़ रुपये तक पहुँच गई। कर्ज चुकाने के लिए उन्होंने जो चेक दिए थे, वे बैंक में बाउंस हो गए, जिसके बाद मामला अदालत पहुँचा और कानूनी पेचीदगियों के कारण आखिरकार अभिनेता को सरेंडर करना पड़ा।

चेक बाउंस को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी

अक्सर लोग चेक बाउंस होने को एक साधारण बैंक संबंधी गलती मान लेते हैं, लेकिन अभिनेता राजपाल यादव का मामला एक बड़ी चेतावनी है। भारतीय कानून के अनुसार, चेक बाउंस होना कोई छोटी प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक गंभीर आर्थिक अपराध है। ‘

नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट 1881′ की धारा 138 के तहत, यदि बैंक खाते में पर्याप्त बैलेंस न होने के कारण चेक बाउंस होता है, तो यह एक आपराधिक मामला बन जाता है। यदि लेनदार (पैसे लेने वाला) तय समय सीमा के भीतर कानूनी नोटिस भेजता है और फिर भी भुगतान नहीं होता, तो देनदार को कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं और जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।

चेक बाउंस होने पर 2 साल की जेल और दोगुना जुर्माना

भारतीय कानून की धारा 138 के तहत चेक बाउंस होना एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए कठोर सजा का प्रावधान है। यदि बैंक किसी चेक को खाते में पैसे की कमी या किसी अन्य वैध कारण से ‘डिशऑनर’ (खारिज) कर देता है, तो चेक जारी करने वाले व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है।

अदालत द्वारा दोष सिद्ध होने पर दोषी को 2 साल तक की जेल, चेक में लिखी राशि का दोगुना जुर्माना, या दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं। हालांकि, यह कानूनी कार्रवाई तभी प्रभावी होती है जब चेक बाउंस होने के बाद पीड़ित व्यक्ति द्वारा कानूनी नोटिस भेजा गया हो और नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर देनदार ने भुगतान न किया हो।

चेक बाउंस होने पर कानूनी समय-सीमा और भारी बैंक चार्ज

चेक बाउंस होने के बाद की कानूनी प्रक्रिया बेहद सटीक समय-सीमा (Timeline) पर आधारित होती है। जैसे ही चेक बाउंस होता है, बैंक एक रिटर्न मेमो जारी करता है। इसके बाद, पैसे लेने वाले व्यक्ति को 30 दिनों के भीतर कानूनी नोटिस भेजना अनिवार्य है। नोटिस मिलने के बाद चेक जारी करने वाले को 15 दिनों की मोहलत दी जाती है। यदि इन 15 दिनों में भी भुगतान नहीं होता, तो अगले 30 दिनों के भीतर मजिस्ट्रेट की अदालत में मामला दर्ज किया जा सकता है। नियम के मुताबिक, इन मामलों का निपटारा 6 महीने के भीतर होना चाहिए।

चेक बाउंस होने के मुख्य कारण और कानूनी बारीकियां

चेक बाउंस होने के पीछे कई तकनीकी और वित्तीय कारण हो सकते हैं। सबसे आम कारणों में खाते में पर्याप्त बैलेंस न होना, चेक की 3 महीने की समय-सीमा खत्म हो जाना, हस्ताक्षर (Signature) न मिलना, ओवरराइटिंग या चेक का फटा होना शामिल है। हालांकि, कानूनी रूप से सबसे गंभीर और दंडनीय अपराध खाते में रकम की कमी को माना जाता है।

कानूनी कार्रवाई (Section 138) के लिए नोटिस भेजते समय यह ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है कि नोटिस में वही राशि लिखी हो जो चेक पर दर्ज है; राशि में ज़रा सा भी अंतर आपके नोटिस को अमान्य कर सकता है। साथ ही, कानून तभी लागू होता है जब चेक किसी वैध ऋण या कानूनी देनदारी (Legal Liability) को चुकाने के लिए दिया गया हो।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

अभी-अभी मोदी का ऐलान

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें