
भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में चुनाव की सुचिता इस बात पर निर्भर करती है कि उसकी मतदाता सूची (Voter List) कितनी सटीक है। वर्तमान में निर्वाचन आयोग देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक व्यापक अभियान चला रहा है। इस अभियान का उद्देश्य तकनीकी खामियों, फर्जी नामों और दोहरी प्रविष्टियों को पूरी तरह समाप्त करना है। इसके लिए आयोग ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ और ‘स्पेशल रिवीजन’ जैसी दो प्रक्रियाओं का सहारा ले रहा है।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision): एक नई शुरुआत
जब निर्वाचन आयोग को लगता है कि किसी क्षेत्र की मतदाता सूची में बहुत अधिक विसंगतियां (गलतियां) आ गई हैं या वहां की जनसंख्या में बड़े बदलाव हुए हैं, तो वह ‘इंटेंसिव रिवीजन’ का आदेश देता है।
- शून्य आधारित प्रक्रिया (Zero-Base Process): इसमें पुरानी वोटर लिस्ट को आधार नहीं बनाया जाता। इसके बजाय, यह मान लिया जाता है कि लिस्ट नए सिरे से तैयार करनी है।
- घर-घर दस्तक: बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) आपके घर की चौखट पर आते हैं। वे परिवार के प्रत्येक सदस्य का नया डाटा इकट्ठा करते हैं और नए सिरे से ‘अनुसूची’ (Enumeration Form) भरते हैं।
- शुद्धता का पैमाना: क्योंकि डाटा फ्रेश कलेक्शन से आता है, इसलिए इसमें पुरानी गलतियां (जैसे किसी पुराने निवासी का नाम रह जाना) अपने आप खत्म हो जाती हैं। उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में अक्सर सघन आबादी के कारण इसे अपनाया जाता है।
स्पेशल रिवीजन (Special Revision)
यह एक ‘समरी’ (Summary) प्रक्रिया है। यह तब की जाती है जब सूची को केवल अपडेट करने की आवश्यकता होती है।
- विद्यमान सूची का आधार: यहाँ BLO के पास आपके क्षेत्र की पहले से छपी हुई वोटर लिस्ट होती है।
- सत्यापन पर जोर: BLO घर-घर जाकर यह वेरीफाई करते हैं कि लिस्ट में मौजूद जानकारी अभी भी सही है या नहीं। यदि कोई नया युवा 18 वर्ष का हुआ है, तो उसका नाम जोड़ा जाता है, और यदि किसी की मृत्यु हुई है, तो नाम हटाया जाता है।
सत्यापन के दौरान किन 4 मुख्य बिंदुओं पर होती है जांच?
निर्वाचन आयोग ने डेटा की शुद्धता पक्का करने के लिए सख्त मानक तय किए हैं:
- निवास की स्थिति (Presence Check): अधिकारी यह सुनिश्चित करते हैं कि वोटर वास्तव में उसी पते पर रह रहा है। यदि कोई व्यक्ति हमेशा के लिए शहर छोड़ चुका है, तो उसका नाम उस क्षेत्र की लिस्ट से हटाकर नए पते पर ट्रांसफर करने की प्रक्रिया की जाती है।
- मृतकों का विलोपन (Deletion of Deceased): यह सबसे संवेदनशील हिस्सा है। फर्जी वोटिंग रोकने के लिए मृतकों के नाम हटाना अनिवार्य है। इसके लिए स्थानीय मृत्यु रजिस्टर और पड़ोसियों से पूछताछ का सहारा लिया जाता है।
- विवरण में सुधार (Correction of Details): अक्सर वोटर आईडी में नाम की स्पेलिंग, फोटो धुंधली होना या जेंडर में गलती होती है। इस प्रक्रिया के दौरान आधार कार्ड या अन्य सरकारी दस्तावेजों के जरिए इन्हें ऑन-द-स्पॉट ठीक किया जाता है।
- दोहरी प्रविष्टि की रोकथाम (De-duplication): सॉफ़्टवेयर की मदद से यह चेक किया जाता है कि एक ही वोटर का नाम दो अलग-अलग विधानसभाओं या राज्यों में तो नहीं है। यदि ऐसा मिलता है, तो नियमानुसार एक जगह से नाम हटाया जाता है।
वोटर के रूप में आपकी जिम्मेदारी
जब BLO आपके घर आएं, तो सुनिश्चित करें कि:
- आप अपने पास आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र या निवास प्रमाण पत्र की कॉपी रखें।
- अपने परिवार के सभी पात्र सदस्यों (जो 18 वर्ष के हो चुके हैं) का नाम लिस्ट में जरूर चेक करें।
- यदि आपकी फोटो पुरानी है, तो नई फोटो अपडेट करवाएं ताकि वोटिंग के दिन पहचान में दिक्कत न हो।









