
भारत के सोलर सेक्टर के लिए आने वाला समय थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। दुनिया भर में सोलर वेफर, इंगट और सेल का 95% उत्पादन करने वाले देश चीन में कच्चे माल की कीमतें बढ़ गई हैं। भारत की सोलर मॉड्यूल बनाने वाली कंपनियाँ इन पुर्जों के लिए काफी हद तक चीन पर निर्भर हैं। अब चीन से ये चीजें महंगे दामों पर आने के कारण भारतीय कंपनियों की लागत बढ़ रही है, जिसका सीधा असर सौर ऊर्जा परियोजनाओं के बजट और सोलर उपकरणों की कीमतों पर पड़ सकता है।
सोलर पैनल की कीमतों में बढ़ोतरी तय
भारत में सोलर मॉड्यूल बनाने वाली कंपनियों के लिए अब कीमतें बढ़ाना मजबूरी हो गया है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, चीन में सोलर वेफर, इंगट और सेल की कीमतों में 10 से 15 फीसदी का उछाल आया है। चूंकि भारतीय कंपनियां सोलर सेल की आपूर्ति के लिए काफी हद तक चीन पर निर्भर हैं, इसलिए कच्चे माल की इस बढ़ी हुई लागत का सीधा असर अब तैयार सोलर मॉड्यूल की कीमतों पर पड़ेगा। आने वाले दिनों में सोलर पैनल लगवाना आम ग्राहकों के लिए पहले के मुकाबले अधिक महंगा हो सकता है।
सोलर प्रोजेक्ट्स पर लगा ‘ब्रेक’
बढ़ती कीमतों के कारण भारत में कई सोलर कंपनियों ने अपने प्रोजेक्ट्स का काम फिलहाल रोकने का फैसला किया है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च तक पुराने ऑर्डर्स को पूरा करने के दबाव में सोलर सेल की कीमतें अस्थायी रूप से बढ़ी हैं। कंपनियों को उम्मीद है कि अप्रैल 2026 तक बाजार स्थिर हो जाएगा और कीमतें दोबारा पुराने स्तर पर आ सकती हैं। तब तक के लिए, कंपनियां भारी घाटे से बचने के लिए नए प्रोजेक्ट्स को टाल रही हैं और मॉड्यूल के दाम घटने का इंतज़ार कर रही हैं।
बंद होने की कगार पर भारतीय सोलर कारखाने
भारत का सोलर पैनल उद्योग इस समय एक बड़े संकट से गुजर रहा है। दुनिया भर में सोलर वेफर और इंगट का 95% उत्पादन अकेले चीन में होता है। भारतीय कंपनियाँ या तो सीधे सोलर सेल आयात करती हैं या फिर चीन से वेफर और इंगट मंगाकर यहाँ मॉड्यूल तैयार करती हैं। कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल और आपूर्ति में कमी के कारण अब कई कंपनियों के पास अपने कारखाने कुछ महीनों के लिए बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। चीन पर इस अत्यधिक निर्भरता ने भारतीय मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के संचालन पर सवालिया निशान लगा दिया है।
सोलर सेल का स्टॉक खत्म
भारत में सोलर मॉड्यूल बनाने वाली कंपनियों के पास फिलहाल केवल इस महीने (फरवरी 2026) तक का ही सोलर सेल स्टॉक बचा है। चीन में कच्चे माल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति में देरी की वजह से कंपनियों के सामने काम ठप होने का संकट खड़ा हो गया है। इस स्थिति से निपटने के लिए कई कंपनियाँ अब हवाई जहाज (Air Freight) के जरिए सोलर सेल मंगाने पर विचार कर रही हैं।
बिना प्लानिंग वाली कंपनियों पर भारी पड़ रही कीमतों की अनिश्चितता
सौर ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान संकट केवल सप्लाई की कमी नहीं, बल्कि कीमतों में होने वाले भारी उतार-चढ़ाव का है। जिन कंपनियों ने भविष्य की योजना और कच्चे माल का स्टॉक पहले से तैयार नहीं रखा था, उन्हें सबसे अधिक नुकसान हो रहा है।
हालांकि, उन कंपनियों के लिए राहत की बात है जो बड़े बिजली प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ घरों की छतों (Rooftop Solar) पर पैनल लगाने का काम करती हैं। रूफटॉप सोलर के अनुबंध (Contracts) अक्सर लचीले होते हैं, जिससे कंपनियां बढ़ती लागत के हिसाब से कीमतों में बदलाव कर पाती हैं और इस मुश्किल समय में खुद को सुरक्षित रख सकती हैं।
संकट से निपटने के दो अलग तरीके
| ग्राहक का प्रकार | प्रभाव और समाधान |
| बड़े बिजली प्रोजेक्ट (Utility Scale) | सख्त अनुबंधों के कारण कीमतों में बदलाव मुश्किल, घाटे की संभावना ज्यादा। |
| रूफटॉप सोलर (घरों की छतें) | लचीले कॉन्ट्रैक्ट्स; बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों के साथ साझा करने की सुविधा। |









