
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए योगी सरकार अपने नए बजट में जनता के लिए बड़ी घोषणाएं करने की तैयारी में है। इस बजट में युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों के कल्याण के लिए कई नई योजनाएं शुरू की जाएंगी और उनके लिए भारी फंड दिया जाएगा। साथ ही, राज्य को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सड़कों और बुनियादी सुविधाओं के विकास पर भी खास जोर दिया जाएगा, ताकि उत्तर प्रदेश को एक विकसित प्रदेश बनाया जा सके।
कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस बजट में भारी बढ़ोतरी
योगी सरकार का मानना है कि बिना सुरक्षित माहौल के विकास मुमकिन नहीं है। इसीलिए, अपराध के प्रति अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को और सख्त बनाने के लिए सरकार इस बार पुलिस विभाग के बजट में बड़ा इजाफा कर सकती है। उम्मीद है कि पुलिस महकमे को आधुनिक बनाने और सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए 45 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक की धनराशि आवंटित की जाएगी।
यूपी बजट 2026-27
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अगले वित्त वर्ष के लिए करीब नौ लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक बजट पेश करने जा रही है, जिसमें से ढाई लाख करोड़ रुपये से ज्यादा सिर्फ विकास कार्यों पर खर्च किए जाएंगे। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा 11 फरवरी को पेश किए जाने वाले इस बजट में चुनावी साल को देखते हुए जनता के लिए कई बड़ी घोषणाएं होने की उम्मीद है। सरकार अपने पुराने संकल्पों को पूरा करने के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन (वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन) को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये प्रतिमाह कर सकती है। मुख्यमंत्री के संकेतों से साफ है कि राज्य की प्रगति और जन-सुविधाओं के लिए खजाने का द्वार पूरी तरह खुला रहेगा।
मेधावी छात्राओं को स्कूटी और शिक्षा मित्रों के मानदेय में वृद्धि की तैयारी
योगी सरकार इस बजट के माध्यम से अपने अधूरे चुनावी वादों को पूरा करने पर ध्यान दे रही है। इस साल मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी देने का संकल्प पूरा किया जा सकता है, जबकि बुजुर्ग महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की घोषणा चुनाव के और करीब आने पर होने की उम्मीद है। इसके अलावा, राज्य के करीब 1.43 लाख शिक्षा मित्रों के लिए बड़ी खुशखबरी आ सकती है; उनका मासिक मानदेय 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 17 से 20 हजार रुपये तक किया जा सकता है, जिसके लिए बजट में 250 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान होने की संभावना है।
यूपी बजट में सड़कों और हाईटेक पुलिसिंग पर भारी निवेश
योगी सरकार प्रदेश के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा को आधुनिक बनाने के लिए बड़े कदम उठा रही है। सड़कों और पुलों के जाल को मजबूत करने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) को 42 हजार करोड़ रुपये से अधिक मिलने की उम्मीद है, जिससे गांवों से लेकर शहरों तक का आवागमन आसान होगा। वहीं, गृह विभाग के 45 हजार करोड़ रुपये के प्रस्तावित बजट से पुलिस को हाईटेक बनाया जाएगा, जिसमें नए वाहन, आधुनिक भवन और साइबर अपराध रोकने के पुख्ता इंतजाम शामिल होंगे। इसके अलावा, यातायात को सुरक्षित और सुलभ बनाने के लिए नई इलेक्ट्रिक बसें खरीदने, सीसीटीवी कैमरे लगाने और जेवर एयरपोर्ट सहित हवाई पट्टियों के विकास के लिए भी हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
स्कूलों से लेकर मेट्रो तक के लिए बजट का पिटारा
योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के बजट में करीब ढाई हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी करने जा रही है, जिससे बेसिक शिक्षा का कुल बजट 81 हजार करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है। इसमें जर्जर स्कूलों की मरम्मत और कस्तूरबा गांधी विद्यालयों के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, शहरों को आधुनिक बनाने के लिए आवास विभाग को भारी फंड दिया जाएगा, जिसमें नई टाउनशिप विकसित करने, लखनऊ मेट्रो के विस्तार और लखनऊ, मेरठ व कानपुर जैसे बड़े शहरों में बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा, पूर्वांचल और बुंदेलखंड के विकास के साथ-साथ राज्य की नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को रफ्तार देने के लिए भी अलग से भारी धनराशि आवंटित की जा सकती है।
खेल सुविधाओं का विस्तार और औद्योगिक विकास के लिए बड़ा बजट
योगी सरकार प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है। इसके तहत आगरा, अयोध्या और झांसी समेत कई जिलों में नए स्पोर्ट्स कॉलेज खोले जाएंगे, जबकि मेरठ के मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय को आधुनिक उपकरणों और लैब से लैस किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं के लिए ओपन जिम और स्टेडियम बनाने के लिए भी ₹350 करोड़ का प्रावधान किया जा सकता है। साथ ही, उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए ‘अटल इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन’ के तहत 4,000 करोड़ रुपये और अनुसूचित जाति बहुल गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए ₹2,000 करोड़ खर्च किए जाने की तैयारी है।
बजट के आवंटन और खर्च की जमीनी हकीकत
बजट में भारी-भरकम धनराशि मिलने के बावजूद उत्तर प्रदेश के कई विभागों में खर्च की रफ्तार काफी धीमी रही है। मुख्यमंत्री के अधीन लोक निर्माण विभाग (PWD) को मिले बजट का 10 महीनों में मात्र 40% हिस्सा ही इस्तेमाल हो पाया है, जबकि आवास और परिवहन जैसे विभागों में यह आंकड़ा और भी कम (क्रमशः 37% और 34%) है। ‘रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना’ जैसी बड़ी घोषणाओं के लिए 400 करोड़ रुपये आवंटित तो हुए, लेकिन छात्राओं को अब तक स्कूटी नहीं मिल सकी है। इसी तरह कुकरैल नाइट सफारी और मां अन्नपूर्णा कैंटीन जैसी योजनाएं भी अभी तक पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर पाई हैं। सरकार के सामने अब चुनौती यह है कि वह आगामी बजट के संकल्पों को केवल कागजों तक सीमित न रखकर समय पर पूरा करे।









