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Barrier-Free Toll: टोल प्लाजा पर रुकने का झंझट खत्म! बिना फास्टैग और बैरियर के अपने आप कटेगा पैसा; जानें कैसे काम करेगा नया सिस्टम

टोल पर लगने वाले जाम से अब मिलेगी पक्की छुट्टी! गुजरात के सूरत में शुरू हुई बिना फाटक वाली नई टोल तकनीक। जानें कैसे अब आपकी गाड़ी बिना रुके हाइवे पार करेगी और कैसे हाई-टेक कैमरों से अपने आप कट जाएगा आपका टोल टैक्स।

By Pinki Negi

Barrier-Free Toll: टोल प्लाजा पर रुकने का झंझट खत्म! बिना फास्टैग और बैरियर के अपने आप कटेगा पैसा; जानें कैसे काम करेगा नया सिस्टम
Barrier-Free Toll

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने देश के टोलिंग सिस्टम को पूरी तरह बदलने की तैयारी कर ली है। गुजरात के सूरत में स्थित चोरयासी टोल प्लाजा (Choryasi Toll Plaza) देश का पहला ऐसा केंद्र बन गया है, जहाँ ‘बैरियरलेस’ यानी बिना फाटक वाली तकनीक का सफल परीक्षण शुरू किया गया है। इसका मतलब है कि अब गाड़ियों को टोल देने के लिए न रुकना पड़ेगा और न ही रफ्तार धीमी करनी होगी।

क्या है यह नई तकनीक और कैसे करती है काम?

इस नए सिस्टम को मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) कहा जाता है। इसमें सड़क पर पारंपरिक टोल बूथ और लोहे के बैरियर नहीं होते। इसकी जगह हाईवे पर बड़े-बड़े लोहे के ढांचे (Overhead Gantries) लगाए गए हैं, जिन पर आधुनिक सेंसर और कैमरे लगे हैं:

  1. ANPR कैमरे: ये हाई-रिजोल्यूशन कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट को 80 किमी/घंटा की रफ्तार में भी स्कैन कर लेते हैं।
  2. LiDAR और रडार: ये सेंसर गाड़ी के आकार और वजन को पहचानते हैं ताकि सही श्रेणी का टोल (जैसे कार, बस या ट्रक) काटा जा सके।
  3. FASTag इंटीग्रेशन: जैसे ही गाड़ी इन सेंसर के नीचे से गुजरती है, टोल की राशि सीधे फास्टैग वॉलेट से कट जाती है।

बिना फास्टैग वालों का क्या होगा?

इस सिस्टम में टोल चोरी करना लगभग नामुमकिन है। अगर किसी गाड़ी पर फास्टैग नहीं लगा है या उसमें बैलेंस कम है, तो कैमरे उसके नंबर प्लेट की फोटो खींच लेंगे। सिस्टम तुरंत वाहन मालिक की पहचान कर लेगा और उसे ई-चालान या जुर्माना भरने का नोटिस भेज देगा। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि मैन्युअल टोल कलेक्शन में होने वाली गलतियां भी खत्म हो जाएंगी।

ईंधन और समय की भारी बचत

नितिन गडकरी के नेतृत्व वाले मंत्रालय के अनुसार, देशभर में इस तकनीक के लागू होने से सालाना करीब 1,500 करोड़ रुपये के ईंधन की बचत होगी। टोल पर गाड़ियों के खड़ा न होने से प्रदूषण कम होगा और लॉजिस्टिक्स की लागत में भी गिरावट आएगी, जिससे सामान की कीमतें कम होने में मदद मिलेगी।

सूरत के सफल ट्रायल के बाद, सरकार का लक्ष्य है कि दिसंबर 2026 तक देश के सभी प्रमुख नेशनल हाईवे से फिजिकल टोल बूथ हटा दिए जाएं। इसकी जगह जीपीएस (GPS) और सैटेलाइट आधारित टोलिंग सिस्टम ले लेगा, जहाँ आप जितनी दूरी तय करेंगे, केवल उतना ही पैसा आपके खाते से कटेगा।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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