
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहर मेरठ में अब रियल एस्टेट का गणित बदलने वाला है। यदि आप भी गंगा एक्सप्रेसवे या रिंग रोड के आसपास निवेश की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। आईजी निबंधन के ताजा आदेश के बाद, जिला प्रशासन ने कृषि भूमि के खसरा नंबरों का नए सिरे से सर्वे शुरू कर दिया है। इस कदम से आने वाले दिनों में रजिस्ट्री का खर्च 20 से 50 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
सर्वे की जरूरत क्यों पड़ी?
मेरठ जनपद में बीते कुछ वर्षों में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का कायाकल्प हुआ है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के बाद अब गंगा एक्सप्रेसवे और दौराला से हापुड़ रोड को जोड़ने वाली रिंग रोड का काम युद्ध स्तर पर है। नियम यह कहता है कि जैसे ही कोई कच्चा रास्ता पक्का होता है या कोई खेत आबादी के करीब आता है, उसकी कीमत और सरकारी शुल्क बढ़ जाता है। विभाग का मानना है कि कई ऐसे इलाके हैं जो अब ‘प्रीमियम’ श्रेणी में आ चुके हैं, लेकिन वहां अभी भी पुराने और सस्ते रेट पर रजिस्ट्री हो रही है।
रजिस्ट्री पर कितना पड़ेगा बोझ?
स्टांप एक्ट के कड़े नियमों के तहत शुल्क की गणना इस प्रकार की जाएगी:
- लिंक रोड और हाईवे: मुख्य मार्गों या हाईवे से सटी कृषि भूमि पर 20 से 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी चुकानी होगी।
- आबादी का दायरा: गांव या शहर की घनी आबादी से 200 मीटर की त्रिज्या (Radius) में आने वाले खसरा नंबरों पर 30 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगेगा।
चूंकि मेरठ शहर का विस्तार तेजी से हो रहा है, इसलिए हजारों नए खसरा नंबर अब इस ‘एक्स्ट्रा चार्ज’ की जद में आ जाएंगे।
डीएम ने संभाली कमान, तहसीलदारों को अल्टीमेटम
जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह ने इस सर्वे को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए सभी तहसीलों के एसडीएम और तहसीलदारों को जिम्मेदारी सौंपी है। राजस्व टीम जमीन पर जाकर यह देखेगी कि कौन से खेत अब आबादी का हिस्सा बन चुके हैं और किन खसरा नंबरों को नई सड़कों ने छू लिया है। यह रिपोर्ट मिलते ही निबंधन विभाग अपनी सर्किल रेट सूची को अपडेट कर देगा।
निवेश पर असर
एआईजी निबंधन, शर्मा नवीन कुमार एस के अनुसार, “यह प्रक्रिया राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ रिकॉर्ड को अपडेट करने के लिए भी जरूरी है। शहर और कस्बे बढ़ रहे हैं, तो नियमों का लाभ सरकारी खजाने को भी मिलना चाहिए।”
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस सर्वे के बाद जमीनों की सरकारी कीमतें बढ़ेंगी, जिससे काला धन (Black Money) के प्रवाह पर अंकुश लगेगा, लेकिन मध्यम वर्गीय खरीदार के लिए जमीन की रजिस्ट्री कराना अब पहले से काफी महंगा सौदा होगा।









