
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने 17 से 25 फरवरी तक आयोजित होने वाली 10वीं (मैट्रिक) परीक्षा के लिए अत्यंत कड़े नियम जारी किए हैं। लगभग 15 लाख 12 हजार 963 परीक्षार्थी इस परीक्षा में भाग लेंगे, लेकिन बोर्ड ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि परीक्षा केंद्र में जूता या मोजा पहनकर प्रवेश बिल्कुल वर्जित है।
उल्लंघन करने वालों को न केवल प्रवेश से रोका जाएगा, बल्कि दो साल के लिए परीक्षा से निष्कासित कर दिया जाएगा। यह नियम नकल के प्रयासों को रोकने और परीक्षा का निष्पक्ष संचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
परीक्षा शेड्यूल और भागीदारी
BSEB की मैट्रिक परीक्षा दो पालियों में होगी। पहली पाली सुबह 9:30 से दोपहर 12:30 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2:00 से शाम 5:00 बजे तक चलेगी। बोर्ड ने सभी 38 जिलों के जिलाधिकारियों और सिविल सर्जन को निर्देश दिए हैं कि परीक्षा केंद्रों पर सख्ती से नियमों का पालन कराया जाए। परीक्षा में लड़के और लड़कियां दोनों शामिल होंगे, जिसमें पटना, मुजफ्फरपुर, गया जैसे प्रमुख जिलों से सबसे अधिक संख्या दर्ज की गई है। बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि यह नियम पिछले वर्षों के अनुभवों पर आधारित हैं, जब जूतों में छिपाकर चिट लाने के प्रयास पकड़े गए थे।
जूता-मोजा पर पूर्ण प्रतिबंध
सबसे चर्चित नियम जूता-मोजा पर है। परीक्षार्थियों को केंद्र पहुंचते ही जूते-मोजे उतारकर चप्पल पहननी होगी। बोर्ड का कहना है कि यह कदम परीक्षा भवन की स्वच्छता, सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक है। यदि कोई छात्र जूता-मोजा पहने दिखा, तो उसे तत्काल बाहर किया जाएगा। यह नियम 2018 से लागू है और हर साल सख्ती बढ़ती जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जूतों के अंदर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या पेपर छिपाने की प्रवृत्ति रोकने के लिए यह प्रभावी साबित हुआ है। छात्रों को सलाह दी जाती है कि सर्दी के मौसम में भी हल्की चप्पल चुनें।
प्रवेश समय और अवैध तरीकों पर सजा
समय पालन को लेकर भी जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। पहली पाली के लिए प्रवेश सुबह 8:30 बजे से शुरू होगा और 9:00 बजे (परीक्षा शुरू होने के 30 मिनट पहले) बंद हो जाएगा। दूसरी पाली में दोपहर 1:00 से 1:30 बजे तक प्रवेश मिलेगा। लेट आने वाले छात्रों को किसी भी सूरत में अंदर नहीं घुसाया जाएगा।
यदि कोई दीवार फांदकर या जबरदस्ती प्रवेश करने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ FIR दर्ज होगी और दो साल का बैन लगेगा। केंद्राध्यक्ष यदि ऐसा करता है, तो निलंबन की कार्रवाई होगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यह नियम परीक्षा की पवित्रता बचाने के लिए है।
प्रतिबंधित और अनुमत वस्तुएं
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जैसे मोबाइल, स्मार्टवॉच, कैलकुलेटर पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। पारदर्शी पेंसिल बॉक्स, एडमिट कार्ड, पानी की पारदर्शी बोतल, एनालॉग घड़ी और स्टेशनरी ले जाना अनिवार्य है। कपड़ों में स्कूल यूनिफॉर्म या सादे हल्के वस्त्र पहनें। बोर्ड ने जिलों को निर्देश दिया है कि फ्रिस्किंग के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात करें।
छात्रों और अभिभावकों के लिए सलाह
छात्र समय से एक घंटा पहले पहुंचें, नियमों का अध्ययन करें। अभिभावक घर से ही जागरूक करें। बोर्ड का उद्देश्य नकलमुक्त परीक्षा है, जो छात्रों के भविष्य के लिए जरूरी है। पिछले वर्ष 2025 में इसी नीति से 99% परीक्षा शांतिपूर्ण रही। विशेषज्ञ कहते हैं कि ये नियम बिहार जैसे घनी आबादी वाले राज्य में आवश्यक हैं।









