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Railway Ticket Code: वेटिंग टिकट पर लिखे RSWL और PQWL का क्या है मतलब? जान लीजिए वरना बीच सफर में होगी बड़ी परेशानी

ट्रेन टिकट पर RSWL (Roadside Station WL) छोटे स्टेशनों के लिए सीमित कोटा, PQWL (Pooled Quota WL) साझा पूल है। दोनों में कन्फर्मेशन चांस बहुत कम। WL टिकट से चढ़ना प्रतिबंधित, सफर रुक सकता है। PNR चेक करें, ऐप्स से प्रेडिक्शन लें। स्मार्ट बुकिंग से बचें परेशानी!

By Pinki Negi

Railway Ticket Code: वेटिंग टिकट पर लिखे RSWL और PQWL का क्या है मतलब? जान लीजिए वरना बीच सफर में होगी बड़ी परेशानी

 भारत में रोजाना 13,000 से ज्यादा ट्रेनें दौड़ती हैं, लाखों यात्री सफर करते हैं। लेकिन टिकट बुकिंग के बाद PNR के नीचे लिखे RSWL, PQWL जैसे कोड देखकर ज्यादातर लोग कन्फ्यूज हो जाते हैं। गूगल पर सर्च करने वाले करोड़ों पैसेंजर्स में से कई को इनका सही मतलब नहीं पता। नतीजा? चार्ट तैयार होने पर टिकट कैंसल, स्टेशन पर खाली हाथ। विशेषज्ञ चेताते हैं – इन कोड्स को नजरअंदाज करने से सफर बीच में रुक सकता है। आइए, इंडियन रेलवे के इन रहस्यमयी कोड्स को डीकोड करें।

RSWL: रोडसाइड स्टेशनों का सीमित कोटा

RSWL यानी Roadside Station Waiting List। यह कोटा उन यात्रियों को मिलता है जो ट्रेन के ओरिजिनेटिंग स्टेशन से छोटे-मोटे ‘रोडसाइड स्टेशनों’ (महत्वपूर्ण नहीं) तक छोटी दूरी का सफर बुक करते हैं। उदाहरण के लिए, दिल्ली से चलने वाली ट्रेन में कानपुर के बाद का कोई छोटा स्टेशन। रेलवे ने ऐसे स्टेशनों के लिए अलग कोटा रखा है, लेकिन सीटें बेहद सीमित।

कन्फर्मेशन चांस? बहुत कम। चूंकि ये स्टेशन मुख्य रूट पर नहीं, कैंसिलेशन भी कम होते हैं। अगर आपका टिकट RSWL 10 है, तो चार्ट बनने तक CNF या RAC मिलना मुश्किल। लाखों यात्री अनजाने में ऐसे टिकट ले लेते हैं और स्टेशन पर TTE से झड़प कर बैठते हैं। रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक, RSWL टिकटों का 80% हिस्सा वेटिंग ही रहता है।

PQWL: पूल्ड कोटे की साझा वेटिंग लिस्ट

PQWL मतलब Pooled Quota Waiting List। यह छोटे स्टेशनों का साझा पूल है। ट्रेन के स्टार्टिंग और एंडिंग स्टेशन के बीच पड़ने वाले कई छोटे स्टेशनों के यात्रियों के लिए एक कॉमन कोटा। जैसे, मुंबई-हावड़ा एक्सप्रेस में बीच के 5-6 स्टेशनों का PQWL शेयर होता है।

इसका कन्फर्मेशन चांस RLWL या GNWL से भी कम। कारण? सीटें कुल कोटे का महज 5-10% हिस्सा। कैंसिलेशन पर ही आगे बढ़ता है। चार्ट फाइनल होने पर PQWL क्लियर न होने पर e-टिकट ऑटोमैटिक कैंसल हो जाता है, रिफंड खाते में आ जाता है। लेकिन स्टेशन पहुंचे यात्री को अल्टरनेटिव ढूंढना पड़ता है।

सभी वेटिंग कोड्स की तुलना

कोडपूरा नामकब मिलता है?CNF चांस
RSWLRoadside Station WLछोटे रोडसाइड स्टेशन से सफर ​बहुत कम
PQWLPooled Quota WLछोटे स्टेशनों का साझा पूल कम
GNWLGeneral Waiting Listमुख्य स्टेशन से लंबा सफर सबसे ज्यादा
RLWLRemote Location WLदूर के स्टेशन मध्यम

सफर में क्यों होती परेशानी?

WL टिकट से ट्रेन में चढ़ना प्रतिबंधित। TTE चेकिंग में उतार दिया जा सकता है। पीक सीजन (दीवाली, छुट्टियां) में RSWL/PQWL तेजी से बढ़ते हैं। एक सर्वे बताता है कि 40% यात्री इन कोड्स से बुकिंग करते हैं। नतीजा- 1000 करोड़ का नुकसान रिफंड में।

रेलवे विशेषज्ञों के सुझाव

रेलवे अधिकारियों का कहना है- बुकिंग से पहले स्टेशन कोटा चेक करें। ConfirmTkt, Trainman जैसे ऐप्स प्रेडिक्शन देते हैं। टिप्स:

  1. PNR ट्रैक करें: चार्ट 4 घंटे पहले तैयार। IRCTC ऐप से लाइव अपडेट।
  2. अल्टरनेटिव चुनें: Tatkal, Premium Tatkal या वेटिंग कम वाली ट्रेन।
  3. RAC प्रेफर: आधी सीट मिलती है, शेयरिंग संभव।
  4. हेल्पलाइन: 139 पर कॉल करें स्टेटस के लिए।

निष्कर्षतः, RSWL और PQWL को हल्के में न लें। जागरूक पैसेंजर स्मार्ट ट्रैवलर। अगली बुकिंग से पहले कोड डीकोड करें, सफर सुगम बनाएं। सुरक्षित यात्रा! 

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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