
आजकल हर घर में RO वॉटर प्यूरीफायर आम हो गया है। दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रदूषित इलाकों में नल का पानी पीना जोखिम भरा लगता है, इसलिए लोग RO पर भरोसा करते हैं। लेकिन सावधान! RO का पानी अगर सही TDS (टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड्स) स्तर पर न हो, तो यह अमृत के बजाय धीमा जहर बन सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पानी में घुले खनिजों का सही संतुलन ही स्वास्थ्य का आधार है। गलत TDS से थकान, हड्डियों की कमजोरी, किडनी की समस्या तक हो सकती है। आइए, गहराई से समझें इस ‘TDS गणित’ को।
TDS क्या है?
TDS यानी पानी में कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम जैसे खनिजों और नमक की कुल मात्रा, जो मिलीग्राम प्रति लीटर (mg/L या ppm) में मापी जाती है। RO सिस्टम बैक्टीरिया, भारी धातुओं को हटाता है, लेकिन जरूरी मिनरल्स भी निकाल फेंकता है। नतीजा? TDS 50 ppm से नीचे चला जाता है, जो लंबे समय में हानिकारक साबित होता है।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के दिशानिर्देशों के अनुसार, पीने के पानी का आदर्श TDS 50-150 mg/L होना चाहिए। इस रेंज में पानी स्वादिष्ट, पौष्टिक और ‘अमृत’ समान होता है।
क्या है TDS का सही स्तर
- 50-150 mg/L: यह सबसे बेहतरीन स्तर है। यहां जरूरी मिनरल्स का संतुलन बना रहता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है, इम्यूनिटी बढ़ाता है और पाचन सुधारता है। विशेषज्ञ कहते हैं, इस पानी से थकान दूर रहती है और त्वचा चमकदार बनी रहती है।
- 150-300 mg/L: WHO इसे भी सुरक्षित मानता है। स्वाद अच्छा रहता है, कोई बड़ा खतरा नहीं। अगर आपके क्षेत्र का नल का पानी इसी रेंज में है, तो RO लगाने की बजाय UV/UF फिल्टर काफी।
गलत TDS बनता है ‘विष’
दूसरी तरफ, गलत TDS ‘विष’ का काम करता है:
- 50 mg/L से कम: RO का आम प्रभाव। पानी ‘डिमिनरलाइज्ड’ हो जाता है। कमी से मांसपेशियों में ऐंठन, जोड़ों का दर्द, थकान और बच्चों में ग्रोथ रुक सकती है। लंबे समय में हृदय रोग और ऑस्टियोपरोसिस का खतरा बढ़ता है।
- 500 mg/L से अधिक: BIS की ऊपरी सीमा। पानी खारा लगता है, किडनी पर बोझ पड़ता है। पथरी, हाई ब्लड प्रेशर और पाचन विकार आम हो जाते हैं। दिल्ली जैसे शहरों में नल का TDS अक्सर 700-1000 ppm होता है, इसलिए RO जरूरी, लेकिन बिना मिनरलाइजर के नुकसानदेह।
विशेषज्ञों की चेतावनी
डॉक्टरों का कहना है कि शुद्धता के चक्कर में मिनरल्स की कमी भारी पड़ रही है। एक सर्वे में पाया गया कि RO यूजर्स में 30% को मिनरल डेफिशिएंसी के लक्षण दिखे। WHO ने भी RO पानी पर चिंता जताई है, क्योंकि यह प्राकृतिक खनिजों से वंचित करता है।
समाधान: स्मार्ट कदम उठाएं
- TDS चेक करें: ₹200-500 में TDS मीटर खरीदें। RO आउटलेट पर 80-150 ppm सेट करवाएं।
- मिनरलाइजर जोड़ें: कॉपर या मिनरल कार्ट्रिज लगवाएं। यह प्राकृतिक खनिज वापस डालता है, बिना केमिकल्स।
- जरूरत जांचें: अगर इनपुट TDS 300 से कम है, तो RO न लगाएं। UV पर्याप्त।
- रखरखाव: हर 6 महीने सर्विसिंग। मिनरल वाटर, नारियल पानी या फल-सब्जियों से मिनरल्स पूर्ति करें।









