
हवाई अड्डों पर कस्टम ड्यूटी और ज्वेलरी के मूल्यांकन (Valuation) को लेकर होने वाली लंबी बहसें अब इतिहास बनने जा रही हैं। भारत सरकार ने 2 फरवरी 2026 से नए ‘बैगेज रूल्स’ लागू कर दिए हैं। इन नियमों का सबसे क्रांतिकारी हिस्सा यह है कि अब सोने-चांदी की ज्वेलरी पर छूट उसकी कीमत (Value) के आधार पर नहीं, बल्कि वजन (Weight) के आधार पर तय की जाएगी।
ज्वेलरी पर ‘वजन’ आधारित नया फॉर्मूला
अब तक यात्रियों को यह साबित करने में पसीने छूट जाते थे कि उनकी ज्वेलरी की कीमत निर्धारित सीमा के भीतर है, क्योंकि सोने के भाव रोज बदलते हैं। अब इस झंझट को खत्म करते हुए सरकार ने वजन की सीमा तय कर दी है:
- महिला यात्रियों के लिए: अब एक महिला यात्री अपने साथ 40 ग्राम तक की सोने की ज्वेलरी बिना किसी टैक्स के ला सकती हैं।
- पुरुष यात्रियों के लिए: पुरुषों के लिए यह सीमा 20 ग्राम तय की गई है।
- महत्वपूर्ण शर्त: यह छूट केवल ज्वेलरी के लिए है। यदि आप गोल्ड बार (ईंट) या सिक्के लाते हैं, तो उन पर पहले की तरह ही टैक्स लागू रहेगा।
शॉपिंग लिमिट में 50% का इजाफा
घूमने-फिरने और शॉपिंग के शौकीनों के लिए भी सरकार ने अपना खजाना खोला है। आम भारतीय यात्रियों के लिए ड्यूटी-फ्री लिमिट को ₹50,000 से बढ़ाकर अब ₹75,000 कर दिया गया है।
एक्सपर्ट टिप: ध्यान रहे कि यह ₹75,000 की सीमा व्यक्तिगत है। अगर परिवार के 4 सदस्य साथ हैं, तो वे इसे जोड़कर (Clubbing) एक ही महंगा सामान (जैसे ₹3 लाख का कैमरा) नहीं ला सकते।
NRI और प्रवासियों के लिए ‘होम-कमिंग’ गिफ्ट
लंबे समय बाद वतन लौटने वाले भारतीयों के लिए सरकार ने विशेष स्लैब तैयार किए हैं, ताकि वे अपना घर बसाने के लिए जरूरी सामान ला सकें:
- 1 साल बाद वापसी: ₹1.5 लाख तक की छूट।
- 1 से 2 साल बाद वापसी: ₹3 लाख तक की छूट।
- 2 साल से अधिक समय बाद वापसी: ₹7.5 लाख तक की भारी ड्यूटी-फ्री सीमा।
गैजेट्स और करेंसी पर क्या है नियम?
तकनीकी दौर को देखते हुए, 18 वर्ष से अधिक आयु का प्रत्येक यात्री अब अपने साथ एक नया लैपटॉप या नोटपैड पूरी तरह ड्यूटी-फ्री ला सकता है। हालांकि, नकद राशि (Currency) लाने के नियम अभी भी पुराने ‘फेमा’ (FEMA 2015) के तहत ही संचालित होंगे, जिसमें ₹25,000 से अधिक की भारतीय मुद्रा लाना प्रतिबंधित है।
इन बदलावों का प्राथमिक उद्देश्य ‘ईज ऑफ ट्रैवल’ (Ease of Travel) को बढ़ावा देना है। वजन आधारित गणना से कस्टम अधिकारियों की मनमानी कम होगी और यात्रियों को पहले से पता होगा कि वे कितना सामान ला सकते हैं।









