
भारत के मैदानी इलाकों में बढ़ते तापमान के साथ ही जायद (गर्मी) की फसलों का सीजन शुरू हो चुका है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, फरवरी का दूसरा पखवाड़ा उन किसानों के लिए सोने के समान है जो कम समय में अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं। इस समय लोबिया (बरबटी) की खेती एक ऐसी फसल बनकर उभरी है, जो शुरुआती बाजार में ₹40 से ₹100 प्रति किलो तक का भाव दिलाने की क्षमता रखती है।
20 फरवरी से पहले बुवाई क्यों है जरूरी?
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि जो किसान 20 फरवरी से पहले लोबिया की बुवाई कर लेते हैं, उनकी फसल बाजार में तब पहुंचती है जब मांग अधिक और आपूर्ति कम होती है। अगेती फसल होने के कारण मंडी में इसके दाम आसमान छूते हैं। 25 से 35 डिग्री सेल्सियस का वर्तमान तापमान बीजों के अंकुरण और पौधों के विकास के लिए सबसे आदर्श माना जाता है।
मिट्टी और खाद का सही प्रबंधन
लोबिया एक ऐसी फसल है जो मिट्टी की उर्वरता को भी बढ़ाती है (नाइट्रोजन स्थिरीकरण के जरिए)। बेहतर पैदावार के लिए:
- खेत की तैयारी: 2-3 बार गहरी जुताई करें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए।
- जैविक खाद: प्रति एकड़ 2 से 3 ट्रॉली सड़ी हुई गोबर की खाद जरूर डालें।
- रासायनिक खाद: बुवाई के समय डीएपी (DAP), यूरिया और पोटाश (MOP) का संतुलित मात्रा में प्रयोग करें।
बुवाई की आधुनिक तकनीक
ज्यादा उत्पादन पाने के लिए किसानों को ‘लाइन सोइंग’ (कतारों में बुवाई) पद्धति अपनानी चाहिए:
- दूरी: कतार से कतार की दूरी 45 से 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर रखें।
- बीज की मात्रा: एक एकड़ के लिए 4 से 5 किलो स्वस्थ बीज पर्याप्त होते हैं।
- गहराई: बीजों को 2-3 सेंटीमीटर से ज्यादा गहरा न बोएं।
इन उन्नत किस्मों का करें चयन
बाजार में कई ऐसी किस्में उपलब्ध हैं जो कम समय में अधिक फलियां देती हैं:
- वीएनआर (VNR) काशी निधि: इसकी फलियां लंबी और गहरे हरे रंग की होती हैं।
- नामधारी: यह वैरायटी बीमारियों के प्रति सहनशील मानी जाती है।
- अंकुर केतकी: गर्मी के मौसम में इस किस्म का प्रदर्शन बहुत शानदार रहता है।
- अर्का गरिमा और पूसा कोमल: ये सरकारी संस्थानों द्वारा विकसित अधिक पैदावार देने वाली किस्में हैं।
लागत और कमाई का गणित
लोबिया की फसल 60 से 70 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। एक एकड़ से लगभग 50 से 70 क्विंटल तक हरी फलियों का उत्पादन लिया जा सकता है। यदि शुरुआती भाव ₹60 किलो भी मिलता है, तो किसान भाई एक एकड़ से लाखों की कमाई कर सकते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि जोखिम कम करने के लिए लोबिया के साथ भिंडी या खीरा जैसी फसलें भी लगाएं।









