
शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए मुंबई से एक बहुत बड़ी खबर आई है। बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) को अपनी हरी झंडी दे दी है। पिछले काफी समय से अटके इस मेगा आईपीओ का निवेशक बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। अब मंजूरी मिलने के बाद यह संभावना प्रबल हो गई है कि अगले कुछ ही महीनों के भीतर आम निवेशकों को NSE के शेयरों में पैसा लगाने का शानदार मौका मिल सकता है। यह भारतीय शेयर बाजार के इतिहास के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण आईपीओ में से एक होने वाला है।
NSE को मिली सेबी से NOC
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के लिए कल का दिन ऐतिहासिक रहा, जब सेबी (SEBI) ने आखिरकार इसे ‘अनापत्ति प्रमाण-पत्र’ (NOC) दे दिया। भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज पिछले 10 सालों से शेयर बाजार में लिस्ट होने की कोशिश कर रहा था, लेकिन विभिन्न नियामकीय बाधाओं के कारण इसे मंजूरी नहीं मिल पा रही थी।
इस लंबे इंतजार के दौरान NSE ने अपनी कार्यप्रणाली में बड़े सुधार किए और कई बार सख्त जांचों का सामना कर खुद को साबित किया। अब इस मंजूरी के बाद NSE की पब्लिक लिस्टिंग का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है, जो भारतीय वित्तीय बाजार के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।
चेयरमैन श्रीनिवास इंजेटी ने बताया IPO मंजूरी को ऐतिहासिक
NSE की चेयरमैन श्री श्रीनिवास इंजेटी ने सेबी (SEBI) से मिली मंजूरी पर गहरा हर्ष व्यक्त करते हुए इसे एक्सचेंज की विकास यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव बताया है। उन्होंने कहा कि यह मंजूरी न केवल NSE के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि निवेशकों और सभी हितधारकों (Stakeholders) के लिए लाभ कमाने का एक नया अध्याय भी खोलेगी। उनके अनुसार, यह कदम इस बात को साबित करता है कि NSE भारतीय पूंजी बाजार और देश की अर्थव्यवस्था की एक मजबूत स्तंभ है। अब NSE पारदर्शिता और भरोसे के साथ अपनी नई पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
मार्च तक आ सकता है ड्राफ्ट पेपर
सेबी (SEBI) से हरी झंडी मिलने के बाद अब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) अपने आईपीओ के ढांचे और उसे लॉन्च करने के समय पर तेजी से काम कर रहा है। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है, लेकिन खबरों के अनुसार NSE मार्च के अंत तक अपने ‘ड्राफ्ट लिस्टिंग पेपर’ (DRHP) दाखिल कर सकता है।
इसके लिए एक्सचेंज ने निवेश बैंकरों और कानूनी फर्मों के साथ मिलकर तैयारी शुरू कर दी है, ताकि प्रॉस्पेक्टस को अंतिम रूप दिया जा सके। आने वाले कुछ महीने निवेशकों के लिए काफी हलचल भरे हो सकते हैं, क्योंकि देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज की लिस्टिंग की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है।
दुनिया का नंबर-1 डेरिवेटिव एक्सचेंज
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि NSE के आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिलेगा। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत के शेयर और डेरिवेटिव मार्केट पर NSE का एकछत्र राज है। ट्रेडिंग वॉल्यूम यानी सौदों की संख्या के मामले में NSE दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज बन चुका है। इसमें पहले से ही बड़े विदेशी संस्थानों (Institutional Investors) से लेकर आम जनता (Retail Investors) तक, शेयरधारकों की एक बहुत बड़ी फौज शामिल है। अपने मजबूत बिजनेस मॉडल और बाजार में पकड़ की वजह से इस आईपीओ को लेकर निवेशकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
2016 से क्यों अटका था NSE का IPO?
NSE साल 2016 से ही शेयर बाजार में लिस्ट होने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ‘को-लोकेशन’ (Co-location) सुविधा से जुड़ी गड़बड़ियों और प्रशासनिक खामियों के कारण सेबी ने इसे मंजूरी नहीं दी थी। यह मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।
पिछले साल, इस कानूनी विवाद को खत्म करने के लिए NSE ने 1,387 करोड़ रुपये के निपटान (Settlement) का प्रस्ताव भी दिया था। हालांकि, अब हालात बदल गए हैं। सेबी ने बड़ी कंपनियों के लिए ‘पब्लिक फ्लोट’ (बाजार में बेचे जाने वाले शेयरों की संख्या) के नियमों में ढील दी है, जिससे NSE जैसी बड़ी संस्थाओं के लिए लिस्टिंग की राह अब पहले से कहीं अधिक आसान और अनुकूल हो गई है।









