
शुक्रवार को बाजार में सोने और चांदी के दामों में बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिससे पिछले कई महीनों का रिकॉर्ड टूट गया। चांदी की कीमत करीब 17% कम होकर 3.32 लाख रुपये प्रति किलो और सोना लगभग 9% गिरकर 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुँच गया। इस गिरावट की मुख्य वजह निवेशकों द्वारा अपना मुनाफा निकालना, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आई कमजोरी और डॉलर का मजबूत होना रहा। भारी बिकवाली के दबाव के कारण इन कीमती धातुओं की चमक इस बार फीकी रही।
चांदी के भाव में ऐतिहासिक गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में शुक्रवार को अब तक की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई, जहाँ मार्च डिलीवरी वाली चांदी लगभग 17% (67,891 रुपये) सस्ती होकर 3,32,002 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। हैरानी की बात यह है कि गुरुवार को ही चांदी 4,20,048 रुपये के रिकॉर्ड स्तर को छूने के बाद करीब 4 लाख रुपये पर बंद हुई थी, लेकिन अगले ही दिन कीमतों में आए इस भारी बदलाव ने बाजार को चौंका दिया।
रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट
चांदी की ही तरह सोने के वायदा बाजार में भी भारी गिरावट दर्ज की गई, जहाँ MCX पर सोना लगभग 15,246 रुपये (9%) सस्ता होकर 1,54,157 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। गौर करने वाली बात यह है कि गुरुवार को सोना 1,80,779 रुपये के अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर (रिकॉर्ड हाई) पर पहुँच गया था। लेकिन बाजार में मुनाफा कमाने की होड़ और बिकवाली के दबाव के कारण इसकी कीमतों में यह बड़ी गिरावट देखने को मिली।
सोने और चांदी में ‘लोअर सर्किट’ और निवेशकों की मुनाफावसूली
मोतीलाल ओसवाल के एक्सपर्ट मानव मोदी के अनुसार, शुक्रवार को भारी बिकवाली की वजह से सोना और चांदी के सभी कॉन्ट्रैक्ट्स में ‘लोअर सर्किट’ लग गया, जिसका मतलब है कि कीमतों में गिरावट की एक सीमा तय हो गई। बाजार के ऊंचे स्तर पर पहुँचते ही निवेशकों ने तेजी से अपना मुनाफा कमाना (प्रॉफिट बुकिंग) शुरू कर दिया, जिससे कीमतें गिर गईं। खास बात यह रही कि वायदा बाजार के मुकाबले गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ (ETF) में 20% तक की और भी बड़ी गिरावट देखी गई।
अमेरिकी फैसलों और डॉलर की मजबूती का कीमतों पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने-चांदी की कीमतों में आई इस गिरावट के पीछे अमेरिका में हो रही बड़ी हलचल का हाथ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फेडरल रिजर्व के अगले चेयरमैन के रूप में केविन वार्श के नाम की चर्चा ने बाजार में दबाव बढ़ा दिया है। वार्श को अपनी सख्त आर्थिक नीतियों (हॉकीश रुख) के लिए जाना जाता है, जिससे यह उम्मीद जगी है कि आगे चलकर ब्याज दरें ऊंची रह सकती हैं। इस संभावना के कारण अमेरिकी डॉलर और मजबूत हुआ है, जिससे निवेशकों का रुझान सोने-चांदी से हटकर डॉलर की तरफ बढ़ गया और कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
वैश्विक बाजारों में मंदी और रिकॉर्ड स्तर से गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार (कॉमेक्स) में भी कीमती धातुओं में जबरदस्त बिकवाली का माहौल रहा। चांदी की कीमतें करीब 17% गिरकर 95.12 डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर पर आ गईं, जबकि एक दिन पहले ही इसने 121.78 डॉलर का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया था। इसी तरह, सोना भी करीब 392 डॉलर (7.32%) टूटकर 4,962.7 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जो कि गुरुवार को 5,626.8 डॉलर के अपने उच्चतम स्तर पर था। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी ऊँचाई पर पहुँचने के बाद वैश्विक स्तर पर निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे कीमतें अचानक नीचे आ गईं।









