
बजट 2026 के करीब आते ही शेयर बाजार के निवेशकों की नजरें सरकार के अगले कदमों पर टिकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार सरकार किसी बड़े चौंकाने वाले ऐलान के बजाय पुराने सुधारों को जारी रखने और वित्तीय अनुशासन पर ध्यान देगी। हालांकि बजट के दौरान बाजार में थोड़ी उथल-पुथल दिख सकती है, लेकिन लंबी अवधि में बाजार की चाल कंपनियों की कमाई और कैश फ्लो पर ही निर्भर करेगी। आइए देखते हैं कि विशेषज्ञों के अनुसार वे कौन से 10 प्रमुख सेक्टर हैं, जिन पर इस बजट में सबसे ज्यादा फोकस रहने वाला है।
डिफेंस सेक्टर में 8-10% की बढ़त की उम्मीद
डिफेंस सेक्टर हमेशा से निवेशकों का पसंदीदा रहा है, लेकिन हाल ही में इसके वैल्यूएशन में 15-20% की गिरावट देखी गई है। बजट 2026 को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे वैश्विक हालातों को देखते हुए रक्षा बजट में 8-10% की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, किसी बड़े चमत्कार की उम्मीद कम है क्योंकि असली चुनौती अब नए ऑर्डर हासिल करने की नहीं, बल्कि पुराने ऑर्डर्स को समय पर पूरा करने (एग्जीक्यूशन) की है। ऑर्डर बुक तो भरी हुई है, लेकिन काम की धीमी रफ्तार निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
₹2.65 लाख करोड़ के भारी निवेश की तैयारी
रेलवे सेक्टर के लिए पिछला साल काफी शानदार रहा है, जहां आवंटित बजट का 80% से अधिक हिस्सा दिसंबर 2025 तक ही खर्च किया जा चुका है। अब बजट 2026 में सरकार का फोकस न केवल नई ट्रेनें (जैसे वंदे भारत और अमृत भारत) चलाने पर है, बल्कि पुराने ट्रैक को आधुनिक बनाने और सिग्नलिंग सिस्टम को सुधारने पर भी है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार रेल बजट में 5% की बढ़ोतरी के साथ कुल आवंटन ₹2.65 लाख करोड़ तक पहुँच सकता है, जिससे बुनियादी ढांचे में बड़े सुधार की उम्मीद है।
बजट 2026 में प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने पर रहेगा बड़ा फोकस
इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को लेकर सरकार की रणनीति अब नई घोषणाओं से ज्यादा अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क, रेलवे, रक्षा और पावर सेक्टर के बुनियादी ढांचे पर बड़ा खर्च जारी रहेगा। पिछले साल के ₹11.2 लाख करोड़ के भारी-भरकम बजट के बाद, इस बार सड़क परिवहन मंत्रालय के लिए आवंटन में 9-10% की और बढ़ोतरी की उम्मीद है। साथ ही, प्रोजेक्ट्स में देरी या बाधाओं से बचने के लिए सरकार ₹25,000 करोड़ का एक ‘सेफ्टी बफर’ बनाने पर भी विचार कर रही है, जिससे इस क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के लिए तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे।
निर्यात को मिलेगी नई संजीवनी
वैश्विक व्यापार में बढ़ते टैरिफ (Global Tariff) की वजह से कपड़ा, सीफूड और जेम्स एंड ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों के निर्यात में काफी मुश्किलें आ रही हैं। ऐसे में विशेषज्ञों को उम्मीद है कि बजट 2026 में सरकार इन ‘श्रम-प्रधान’ (Labour-intensive) उद्योगों को बड़ी राहत दे सकती है। इस पॉलिसी सपोर्ट का मुख्य उद्देश्य निर्यात को बढ़ावा देना और रोजगार के अवसरों को सुरक्षित करना है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की पकड़ फिर से मजबूत हो सके।
EV क्रांति को मिलेगी नई रफ़्तार
भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अब केवल एक प्रयोग नहीं, बल्कि एक बड़ी जरूरत बन चुके हैं, जिसकी गवाही पिछले साल बिकी 23 लाख गाड़ियाँ दे रही हैं। इस रफ़्तार को बरकरार रखने के लिए विशेषज्ञ बजट 2026 में चार्जिंग स्टेशनों के जाल और स्थिर सरकारी नीतियों की उम्मीद कर रहे हैं। सरकार अपनी ‘PM E-DRIVE’ योजना के जरिए ₹10,900 करोड़ का भारी-भरकम निवेश कर रही है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा केवल चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए होगा।
रियल एस्टेट
रियल एस्टेट सेक्टर के लिए पिछला साल काफी चुनौतीपूर्ण रहा है, जहां लगातार चार तिमाहियों से घरों की बिक्री में कमी देखी गई है। खासकर किफायती और मध्यम आय वाले घरों की मांग घटने से यह सेक्टर दबाव में है। बजट 2026 से निवेशकों को उम्मीद है कि सरकार ‘PMAY-हाउसिंग फॉर ऑल’ योजना को नई ऊर्जा देगी और स्टाम्प ड्यूटी व जीएसटी में राहत जैसे बड़े कदम उठाएगी। अगर सरकार टैक्स में छूट और सब्सिडी बढ़ाती है, तो गिरती बिक्री को दोबारा पटरी पर लाया जा सकता है, जिससे प्रीमियम और किफायती दोनों तरह के हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को फायदा होगा।
बाजार में खरीदारी बढ़ाने पर फोकस
टैक्स में छूट और सरकारी योजनाओं के जरिए लोगों के हाथों में पैसा आने से बाजार में खरीदारी (Consumption) फिर से बढ़ने लगी है। इसमें सबसे बड़ा योगदान ग्रामीण इलाकों की मांग का है, जबकि शहरों में अभी भी मिला-जुला असर दिख रहा है। बजट 2026 में FMCG और रिटेल सेक्टर को उम्मीद है कि सरकार ऐसे कदम उठाएगी जिससे आम आदमी की खर्च करने की शक्ति बढ़े। साथ ही, कच्चे माल पर आयात शुल्क (Import Duty) को स्थिर रखकर और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर कंपनियां अपनी बढ़ती लागत को कम करने और मुनाफे को सुधारने की कोशिश में हैं।
ऑटो सेक्टर की उम्मीदें
आयकर में ₹12 लाख तक की छूट और GST दरों में सुधार के बाद अब ऑटोमोबाइल सेक्टर की नजरें बजट 2026 पर टिकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इस बार टैक्स सिस्टम को स्थिर रखकर वाहनों को और अधिक किफायती (Affordable) बनाने पर ध्यान देगी। साथ ही, ऑटो निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ₹7,000 करोड़ की ‘ग्लोबल वैल्यू चेन’ पहल के जरिए स्थानीय उत्पादन और लॉजिस्टिक्स को मजबूत किया जाएगा। मारुति सुजुकी और बजाज ऑटो जैसी दिग्गज कंपनियों को उम्मीद है कि इन कदमों से न केवल घरेलू बिक्री बढ़ेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारतीय वाहनों की मांग में जबरदस्त सुधार आएगा।
चिप मेकिंग में आत्मनिर्भर बनेगा भारत
भारत के टेक भविष्य के लिए सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है। बजट 2026 में उम्मीद है कि सरकार नई घोषणाओं के बजाय पहले से मंजूर प्रोजेक्ट्स को जमीन पर उतारने (एग्जीक्यूशन) पर पूरा जोर देगी। चूंकि भारत आज भी अपनी चिप जरूरत का 100% आयात करता है, इसलिए ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ और चिप डिजाइनिंग के लिए बड़े वित्तीय सहयोग की मांग की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बजट में घरेलू चिप उत्पादन और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए विशेष फंड आवंटित किया जा सकता है, जिससे भारत की विदेशों पर निर्भरता कम होगी।
टैक्स और कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर
फर्टिलाइजर सेक्टर के लिए बजट 2026 काफी अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि सरकार इस बार टैक्स के नियमों को आसान बनाने और इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड की प्रक्रिया को तेज करने जैसे जरूरी कदम उठाएगी। हालांकि खाद्य सब्सिडी जारी रहेगी, लेकिन सरकार का असली फोकस अब खेती के बुनियादी ढांचे (Agriculture Infrastructure) को आधुनिक बनाने और पब्लिक-प्राइवेट निवेश के जरिए पैदावार बढ़ाने पर शिफ्ट हो सकता है। लाइसेंस लेने की प्रक्रिया को सरल बनाकर सरकार इस क्षेत्र में नई कंपनियों और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने की कोशिश में है।









