
भारत सरकार आधार कार्ड के तकनीकी सिस्टम को पहले से ज्यादा सुरक्षित और आधुनिक बनाने की तैयारी कर रही है। देश में बढ़ते डिजिटल लेनदेन और साइबर धोखाधड़ी के खतरों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य करोड़ों लोगों की पहचान प्रक्रिया को और अधिक सटीक बनाना और डेटा को सुरक्षित रखना है। इसके लिए एक खास रणनीति तैयार की गई है, जिसमें भविष्य की नई तकनीकों का इस्तेमाल कर आधार के पूरे ढांचे को अपडेट किया जाएगा ताकि आम जनता को और भी बेहतर डिजिटल सेवाएं मिल सकें।
अब अंगूठा लगाने की जरूरत नहीं
पहचान सत्यापन की नई योजना के तहत सरकार अब एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब तक फिंगरप्रिंट यानी अंगूठे के निशान को मुख्य पहचान माना जाता था, लेकिन अब इसकी जगह ‘चेहरे की पहचान’ (फेशियल रिकग्निशन) को प्राथमिकता दी जाएगी। इस तकनीक के आने से आधार सत्यापन पहले से कहीं अधिक तेज और आसान हो जाएगा, साथ ही उन बुजुर्गों या मजदूरों को भी बड़ी राहत मिलेगी जिनके फिंगरप्रिंट समय के साथ धुंधले हो जाते हैं।
हर महीने 100 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन का बड़ा लक्ष्य
वर्तमान में हर दिन लगभग 9 करोड़ आधार ऑथेंटिकेशन किए जाते हैं, जिनमें से केवल 1 करोड़ में ही चेहरे की पहचान का उपयोग होता है। सरकार इस तकनीक को बड़े स्तर पर बढ़ावा देना चाहती है ताकि भविष्य में हर महीने 100 करोड़ सत्यापन केवल फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए ही पूरे किए जा सकें। यह कदम डिजिटल पहचान की प्रक्रिया को और अधिक आधुनिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ी छलांग है, जिससे फिंगरप्रिंट न मिलने जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलेगा।
AI और ब्लॉकचेन से लैस होगा आपका डिजिटल आईडी सिस्टम
आधार को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए सरकार अब इसमें AI, ब्लॉकचेन और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी दुनिया की सबसे एडवांस तकनीकों को शामिल करने जा रही है। इन आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से आधार का पूरा डेटाबेस पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और तेज हो जाएगा। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा पहचान सिस्टम तैयार करना है, जिसे हैक करना या जिसमें धोखाधड़ी करना नामुमकिन हो, ताकि आम नागरिकों की डिजिटल जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहे।
फिंगरप्रिंट की झंझट खत्म, अब AI और चेहरा पहचान से होगा हर काम
आधार के सीईओ भुवनेश कुमार के अनुसार, सरकार ‘विजन 2032’ पर काम कर रही है, जिसका उद्देश्य आधार सत्यापन को पूरी तरह आधुनिक बनाना है। इस योजना के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके चेहरे से पहचान करने की प्रक्रिया को इतना सटीक बनाया जाएगा कि लोगों को बार-बार फिंगरप्रिंट देने की झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। इस नई तकनीक से न केवल पहचान प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक आसान और तेज होगी, बल्कि सिस्टम में आने वाली तकनीकी बाधाएं भी काफी हद तक कम हो जाएंगी।
सितंबर 2026 तक मिलेगी मुफ्त सुविधा, 5 करोड़ ने उठाया लाभ
बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार आधार डेटा को अपडेट करने पर विशेष जोर दे रही है। उम्र बढ़ने के साथ बच्चों के बायोमैट्रिक (उंगलियों के निशान और आँखों की पुतली) में बदलाव आता है, जिसे सही करना जरूरी है ताकि भविष्य में उन्हें पहचान साबित करने में कोई दिक्कत न हो। अब तक 5 करोड़ बच्चों का डेटा अपडेट किया जा चुका है और अच्छी बात यह है कि सितंबर 2026 तक यह सुविधा पूरी तरह मुफ्त रहेगी।
मार्च में आएगी रिपोर्ट, 2032 तक के लिए बदलेगा पूरा डिजिटल सिस्टम
आधार के नए और सुरक्षित भविष्य की रूपरेखा तैयार करने के लिए गठित समिति अगले महीने अपना ड्राफ्ट पेश करेगी। मार्च 2026 में यह रिपोर्ट UIDAI को सौंप दी जाएगी, जो आने वाले 5 सालों के लिए आधार की नई तकनीकी दिशा तय करेगी। चूंकि वर्तमान तकनीकी अनुबंध 2027 में समाप्त हो रहा है, इसलिए सरकार 2032 तक के लिए एक नया और आधुनिक समझौता करने जा रही है, जिससे आधार सिस्टम को पूरी तरह अपडेट कर दिया जाएगा।
एक्सपर्ट्स के हाथों में आधार का भविष्य
आधार को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से ढालने के लिए एक विशेष टीम काम कर रही है। अक्टूबर में UIDAI के चेयरमैन नीलकांत मिश्रा की अगुवाई में एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई थी, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीक जगत के बड़े दिग्गज शामिल हैं। यह टीम शिक्षा और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर आधार को और अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने का रोडमैप तैयार कर रही है ताकि आने वाले समय में डिजिटल पहचान की प्रक्रिया में कोई चूक न रहे।









