
भारत में सड़कों पर सुरक्षित ड्राइविंग के लिए मोटर वाहन अधिनियम के तहत कई कड़े नियम बनाए गए हैं, जिनमें से एक कार में म्यूजिक बजाने से संबंधित है। बहुत से लोग अपनी कार में बेहद तेज आवाज (Loud Music) में गाने बजाते हैं, लेकिन ऐसा करना कानूनी रूप से गलत है। ट्रैफिक नियमों के अनुसार, यदि आपके वाहन का म्यूजिक इतना तेज है कि वह आसपास के लोगों को परेशान करे या चालक का ध्यान भटकाए, तो पुलिस आप पर जुर्माना लगा सकती है और आपकी गाड़ी जब्त भी की जा सकती है। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि चालक को एम्बुलेंस या अन्य वाहनों के हॉर्न सुनाई दे सकें और सड़क पर दुर्घटना का खतरा कम हो।
कार में म्यूजिक का शौक कब यह मनोरंजन बन जाता है अपराध?
अक्सर लोगों में यह भ्रम रहता है कि क्या कार के अंदर गाने बजाना मना है? इसका सीधा जवाब है— नहीं। अगर आप अपनी कार में बैठकर सामान्य आवाज में संगीत सुन रहे हैं, तो यह किसी नियम का उल्लंघन नहीं है। मुश्किल तब शुरू होती है जब आपकी कार की खिड़कियों से आवाज बाहर निकलकर सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों या निवासियों के लिए परेशानी का सबब (Public Nuisance) बनने लगती है।
कितना तेज बजा सकते हैं कार में गाना?
भारत में हर नागरिक को अपनी पसंद का काम करने की स्वतंत्रता है, लेकिन कानून की नज़र में यह तब तक ही जायज है जब तक आपकी पसंद दूसरों के लिए परेशानी न बने। कार में गाना बजाना आपका अधिकार है, लेकिन जैसे ही यह आवाज़ आपकी गाड़ी की दीवारों को लांघकर बाहर शोर मचाने लगती है, तो यह कानूनी अपराध (Public Nuisance) की श्रेणी में आ जाता है।
सावधान! रिहायशी इलाकों में तेज म्यूजिक बजाने पर 5 साल की जेल और ₹1 लाख जुर्माना
अक्सर लोग कॉलोनियों या घरों के बाहर कार खड़ी करके तेज आवाज में गाने बजाते हैं, लेकिन यह शौक आपको भारी मुसीबत में डाल सकता है। भारत के कानून के अनुसार, सार्वजनिक शांति भंग करना और ध्वनि प्रदूषण फैलाना सख्त मना है। यदि आपकी कार का म्यूजिक सिस्टम ‘नॉइज़ पॉल्यूशन’ (ध्वनि प्रदूषण) की तय सीमा को पार करता है, तो आप पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
रिहायशी इलाकों के लिए क्या है नियम?
रिहायशी इलाकों (Residential Areas) में दिन के समय ध्वनि की सीमा 55 डेसीबल और रात के समय (10 बजे के बाद) 45 डेसीबल तय की गई है। इसके अलावा, अस्पताल, स्कूल और कोर्ट के आसपास के ‘साइलेंस ज़ोन’ में तो हॉर्न बजाना या म्यूजिक चलाना और भी गंभीर माना जाता है।
महत्वपूर्ण नोट: कानून यह मानता है कि आपकी मौज-मस्ती किसी दूसरे की नींद, पढ़ाई या स्वास्थ्य (जैसे बीमार और बुजुर्गों) में बाधा नहीं बननी चाहिए।









