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Tenant vs Landlord: हाईकोर्ट के फैसले ने बदला खेल! मकान मालिकों को बड़ी राहत, किरायेदारों को तगड़ा झटका

किरायेदार और मकान मालिक के विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! अब निजी ज़रूरत होने पर मकान मालिक अपनी संपत्ति आसानी से खाली करा सकेंगे। क्या हैं आपके नए कानूनी अधिकार और कैसे इस फैसले ने रेंट एग्रीमेंट के समीकरण बदल दिए हैं? विस्तार से जानें।

By Pinki Negi

Tenant vs Landlord: हाईकोर्ट के फैसले ने बदला खेल! मकान मालिकों को बड़ी राहत, किरायेदारों को तगड़ा झटका
Tenant vs Landlord

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि यदि मकान मालिक को अपनी संपत्ति की व्यक्तिगत ज़रूरत है, तो वह किरायेदार से घर खाली करने की मांग कर सकता है और किरायेदार को इसे मानना होगा। हालांकि, अदालत ने संतुलन बनाए रखने के लिए यह भी शर्त रखी है कि मकान मालिक की ज़रूरत वैध और वास्तविक (Genuine) होनी चाहिए। केवल किरायेदार को परेशान करने के लिए घर खाली नहीं कराया जा सकता। फैसला सुनाने से पहले कोर्ट यह पक्का करेगा कि मकान मालिक की मांग के पीछे कोई ठोस और सच्ची वजह है या नहीं, ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।

मकान मालिक की निजी जरूरत होने पर खाली करनी होगी दुकान

न्यायमूर्ति अजित कुमार ने एक याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि मकान मालिक को अपने निजी इस्तेमाल के लिए संपत्ति की आवश्यकता है, तो किरायेदार को उसे छोड़ना ही होगा। कोर्ट ने कहा कि जब मकान मालिक की ज़रूरत ‘वास्तविक’ (Genuine) साबित हो जाती है, तो कानूनी तौर पर उसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

इस मामले में, मकान मालिक ने अपनी दो दुकानों को निजी काम के लिए खाली कराने की मांग की थी। अदालत ने पाया कि मालिक की आवश्यकता किरायेदार की कठिनाई से अधिक महत्वपूर्ण और सच्ची थी। ऐसे मामलों में संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि संपत्ति पर मालिक का अधिकार प्राथमिक होता है।

बिज़नेस शुरू करने के लिए खाली कराई जा सकती है दुकान

इस मामले में मकान मालिक ने अपनी दुकानों को खाली कराने के पीछे एक स्पष्ट और ठोस कारण दिया था—वह उन दुकानों में मोटरसाइकिल और स्कूटर मरम्मत (Repair Shop) का अपना व्यवसाय शुरू करना चाहता था। कोर्ट और संबंधित अधिकारियों (Prescribed Authority) ने इस मांग को पूरी तरह जायज माना।

कानून की भाषा में इसे ‘वास्तविक आवश्यकता’ कहा जाता है। अदालत ने पाया कि मकान मालिक को अपना स्वरोजगार शुरू करने की ज़रूरत, किरायेदार की दुकान न छोड़ने की मजबूरी से कहीं अधिक बड़ी और महत्वपूर्ण थी। इसी आधार पर कोर्ट ने फैसला सुनाया कि मालिक को अपनी संपत्ति का उपयोग अपने विकास के लिए करने का पूरा हक है।

मकान मालिक ही तय करेगा कि उसके बिजनेस के लिए कौन सी जगह सही है

हाई कोर्ट ने किरायेदार की अपील खारिज करते हुए कानून की एक बहुत महत्वपूर्ण बात स्पष्ट की है। कोर्ट ने कहा कि जब बात मकान मालिक की निजी ज़रूरत की आती है, तो यह मकान मालिक को ही तय करने का हक है कि उसके व्यवसाय या काम के लिए कौन सी जगह सबसे अच्छी है।

अदालत ने फैसले के दौरान इन बिंदुओं पर ज़ोर दिया:

  • वैकल्पिक आवास (Alternative Accommodation): कोर्ट यह ज़रूर देखता है कि क्या किरायेदार के पास कहीं और जाने का विकल्प है, लेकिन यह अंतिम फैसला नहीं होता।
  • मालिक की पसंद सर्वोपरि: अगर मकान मालिक के पास एक से ज़्यादा जगहें हैं, तो किरायेदार उसे यह मजबूर नहीं कर सकता कि वह अपनी दुकान किसी दूसरी जगह पर खोले। मालिक ही यह तय करने का सबसे बेहतर जज (Arbitrator) है कि उसके परिवार की ज़रूरत और बिज़नेस के लिए कौन सी जगह फिट है।
  • नियम 1972 का पालन: कोर्ट ने माना कि निर्धारित प्राधिकारी द्वारा दुकान खाली कराने का आदेश नियम 16(1)(डी) के तहत पूरी तरह सही था, क्योंकि मकान मालिक की ज़रूरतें कानूनी तौर पर खरी उतरीं।
Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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