
सड़क दुर्घटना के बाद मानसिक तनाव तो होता ही है, लेकिन असली चुनौती इंश्योरेंस क्लेम के दौरान आती है। अक्सर जटिल कागजी कार्रवाई और लंबी प्रक्रिया के कारण कंपनियां क्लेम खारिज कर देती हैं या उसमें देरी होती है। इन मुश्किलों से बचने के लिए हम आपको कुछ ऐसे जरूरी टिप्स और स्टेप-बाय-स्टेप तरीका बता रहे हैं, जिससे आप बिना किसी झंझट के ऑनलाइन क्लेम फाइल कर सकेंगे। सही प्रक्रिया अपनाकर आप न केवल अपना समय और पैसा बचा सकते हैं, बल्कि खुद को मानसिक चिंता से मुक्त रखकर अपनी आर्थिक सुरक्षा भी पक्की कर सकते हैं।
एक्सीडेंट के बाद सबसे पहले क्या करें? सुरक्षा के जरूरी उपाय
दुर्घटना होने पर घबराने के बजाय अपनी और दूसरों की सुरक्षा पर ध्यान देना सबसे जरूरी है। सबसे पहले खुद को और आसपास के लोगों को चेक करें कि कहीं कोई गंभीर चोट तो नहीं लगी है। सड़क पर ट्रैफिक जाम न हो, इसके लिए अपनी बाइक को किनारे लगाकर इंजन बंद कर दें और हैज़र्ड लाइट चालू कर दें। अगर किसी को चोट लगी है, तो बिना देरी किए मेडिकल हेल्प को फोन करें। यदि बाइक चलने की स्थिति में नहीं है, तो तुरंत रोडसाइड असिस्टेंस को कॉल करें। याद रखें, इंश्योरेंस क्लेम से पहले आपकी जान की सुरक्षा सर्वोपरि है।
बाइक क्लेम के लिए कब ज़रूरी है FIR? जानें सही नियम
हर एक्सीडेंट के बाद पुलिस रिपोर्ट लिखवाना अनिवार्य नहीं है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह बहुत ज़रूरी हो जाता है। अगर आपकी बाइक चोरी हो गई है, किसी तीसरे व्यक्ति को चोट लगी है या किसी की संपत्ति का बड़ा नुकसान हुआ है, तो FIR दर्ज कराना ज़रूरी है। हालांकि, छोटे-मोटे हादसों में जहाँ कोई तीसरा पक्ष (Third Party) शामिल न हो, वहां बीमा कंपनियां FIR की मांग नहीं कर सकतीं। एक आधिकारिक पुलिस रिपोर्ट आपके क्लेम को मज़बूत बनाती है और भविष्य में किसी भी कानूनी विवाद या पूछताछ के समय एक ठोस सबूत के रूप में काम आती है।
क्लेम के लिए तुरंत सूचना दें
एक्सीडेंट के बाद जैसे ही स्थिति सामान्य हो, अपनी इंश्योरेंस कंपनी को तुरंत सूचित करें। क्लेम की जानकारी देने में देरी करने से आपका क्लेम रिजेक्ट भी हो सकता है, क्योंकि कंपनियों की एक तय समय सीमा होती है। आप कंपनी के मोबाइल ऐप, वेबसाइट या हेल्पलाइन नंबर के जरिए घर बैठे ऑनलाइन क्लेम रजिस्टर कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के समय अपना पॉलिसी नंबर, हादसे की जगह, तारीख और समय जैसी जरूरी जानकारी पास रखें। क्लेम रजिस्टर होते ही आपको एक रेफरेंस नंबर मिलेगा, जिसे भविष्य के लिए संभाल कर रखना बहुत जरूरी है।
क्लेम पास कराने के लिए सही फोटो और वीडियो हैं ज़रूरी
बीमा कंपनी से क्लेम पास कराने में सही सबूत सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। एक्सीडेंट के बाद अपनी बाइक के नुकसान की अलग-अलग एंगल से साफ फोटो और वीडियो ज़रूर लें। ध्यान रखें कि कम से कम एक फोटो में बाइक की नंबर प्लेट साफ दिखे। साथ ही, टूटे हुए पार्ट्स, दुर्घटना वाली जगह और यदि कोई दूसरी गाड़ी शामिल है, तो उसके क्लोज-अप शॉट भी लें। यदि संभव हो, तो बाइक को मौके से हटाने से पहले ही ये विजुअल्स रिकॉर्ड कर लें। ये सबूत बीमा कंपनी को नुकसान का सही अंदाज़ा लगाने में मदद करते हैं और आपके क्लेम प्रोसेस को तेज़ कर देते हैं।
क्लेम के समय झंझटों से बचें
इंश्योरेंस क्लेम करने से पहले यह जानना बहुत ज़रूरी है कि आपकी पॉलिसी वास्तव में क्या-क्या कवर करती है। यदि आपके पास कॉम्प्रिहेंसिव (Comprehensive) इंश्योरेंस है, तो इसमें आपकी बाइक के नुकसान (Own-Damage) और दूसरों के नुकसान (Third-Party) दोनों का कवर मिलता है। पॉलिसी के नियमों, शर्तों और डिडक्टिबल (Deductible) को ध्यान से पढ़ने से आपको यह साफ हो जाएगा कि कंपनी कितना पैसा देगी और कितना आपको अपनी जेब से भरना होगा। सही जानकारी होने पर डैमेज असेसमेंट और सेटलमेंट के दौरान कंपनी के साथ किसी भी विवाद या देरी की संभावना कम हो जाती है।
क्लेम फॉर्म भरते समय बरतें सावधानी
इंश्योरेंस पाने के लिए आपको क्लेम फॉर्म भरना होगा, जिसे आप कंपनी की वेबसाइट या ऐप पर ऑनलाइन आसानी से भर सकते हैं। ऑनलाइन फॉर्म भरना न सिर्फ तेज़ है, बल्कि इससे आप अपने क्लेम का स्टेटस भी ट्रैक कर सकते हैं। फॉर्म में अपनी पॉलिसी की जानकारी, एक्सीडेंट का सही ब्यौरा और मरम्मत का अनुमानित खर्च (Estimate) ध्यान से भरें। सबसे ज़रूरी बात यह है कि फॉर्म में दी गई जानकारी वही होनी चाहिए जो आपने शुरुआत में कंपनी को बताई थी; जानकारी में बदलाव होने पर क्लेम अटक सकता है।
इन डॉक्यूमेंट्स की पड़ेगी जरूरत
- बाइक इंश्योरेंस पॉलिसी डॉक्यूमेंट
- रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट (RC) की कॉपी
- एक्सीडेंट के समय राइडर का ड्राइविंग लाइसेंस
- FIR कॉपी, अगर लागू हो
- रिपेयर का अंदाज़ा और फ़ाइनल इनवॉइस
- पूरे डॉक्यूमेंट्स सबमिट करने से देरी से बचने में मदद मिलती है।
बिना अनुमति न कराएं मरम्मत
क्लेम फाइल करने के बाद इंश्योरेंस कंपनी एक सर्वेयर (Surveyor) भेजती है, जो बाइक के नुकसान का जायजा लेता है। सर्वेयर यह जांचता है कि बाइक में हुआ डैमेज आपके बताए गए ब्यौरे से मेल खाता है या नहीं। सबसे जरूरी बात यह है कि जब तक सर्वेयर अपनी जांच पूरी न कर ले और कंपनी आपको लिखित मंजूरी न दे दे, तब तक बाइक की मरम्मत शुरू न कराएं। इंस्पेक्शन के दौरान सर्वेयर के साथ पूरा सहयोग करें और उसे फोटो लेने या ज़रूरी कागज़ात मांगने में मदद करें, ताकि वह अपनी रिपोर्ट जल्दी सबमिट कर सके।









