
आजकल के जमाने में माता-पिता की संपत्ति पर बच्चों की नजर टेढ़ी होने लगी है। देखभाल की जगह दुर्व्यवहार, भरण-पोषण की बजाय तिरस्कार। लेकिन कानून अब माता-पिता के साथ खड़ा है। अगर बच्चे बुजुर्गों की परवाह न करें, तो स्व-अर्जित संपत्ति से उन्हें बेदखल किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट और नए नियमों ने ये हक दिया है। पैतृक संपत्ति अलग बात है, लेकिन अपनी कमाई की दौलत पर माता-पिता राज करेंगे। आइए, इसकी गहराई में उतरें।
बुजुर्गों का भरण-पोषण कानून
2007 का माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम तो सुना ही होगा। ये कानून कहता है कि बच्चे माता-पिता की देखभाल करेंगे। उल्टा होने पर? माता-पिता घर से निकाल सकते हैं। खासकर अगर संपत्ति उन्होंने अपनी नौकरी, व्यापार से कमाई हो। सुप्रीम कोर्ट ने हाल के फैसलों में साफ कहा – दुर्व्यवहार पर कोई रहम नहीं। 2025-26 के अपडेट्स ने इसे और मजबूत किया। अब ट्रिब्यूनल में शिकायत करो, बच्चे बाहर। लेकिन याद रखो, ये हक सिर्फ स्व-अर्जित प्रॉपर्टी पर।
स्व-अर्जित vs पैतृक फर्क समझ लो
सोचो, पापा ने 30 साल नौकरी की, प्लॉट खरीदा, घर बनाया। ये उनकी मेहनत की फसल है। ऐसे में बेटा अगर बुजुर्गों को तंग करे, तो पिता वसीयत से किसी और को दे सकता है या बेदखल कर सकता है। लेकिन पैतृक संपत्ति? वो दादा-परदादा से चली आ रही है। उस पर बच्चों का जन्मसिद्ध हक। पिता इसे एकतरफा छीन नहीं सकता। हाईकोर्ट ने भी यही कहा – आर्थिक रूप से स्वतंत्र बुजुर्ग सिर्फ झगड़े पर बच्चे नहीं निकालें। बैलेंस जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट का 2025 का धमाका
पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया, वो गेम चेंजर है। कहा गया – अगर बच्चे माता-पिता को भूला दें, देखभाल न करें, तो घर से बाहर का रास्ता। ये नए कानूनों से जुड़ा है, जो बुजुर्गों को ताकत देता है। केस स्टडी सोचो: एक बेटा मां को परेशान कर रहा था, कोर्ट ने संपत्ति से हटा दिया। लेकिन शर्त ये कि संपत्ति स्व-अर्जित हो। पैतृक में शेयरिंग बनी रहती है। ये फैसला पूरे देश में चर्चा का विषय बना।
बहू-दामाद का क्या रोल?
बहू या दामाद को सास-ससुर की प्रॉपर्टी पर हक? बिल्कुल नहीं। ये सीधा बच्चों का मामला है। अगर बेटा निकाला गया, तो पत्नी का भी कोई दावा नहीं। लेकिन अगर माता-पिता रहम दिल हों, तो वसीयत से कुछ दे सकते हैं। वकीलों से सुना है – ज्यादातर केसों में यही होता है। नए नियमों ने क्लियर कर दिया कि दुर्व्यवहार पर कोई छूट नहीं। परिवार टूटे, तो कानून परिवार बनेगा।
क्या करें माता-पिता?
सबसे पहले, संपत्ति के कागजात चेक करो – स्व-अर्जित है या पैतृक? वसीयत बना लो, रजिस्टर करा लो। अगर परेशानी हो, तो तहसील या ट्रिब्यूनल में जाओ। पुलिस भी मदद करेगी। जागरूकता फैलाओ – मोहल्ले में बताओ, वृद्धाश्रम न जाना पड़े। बच्चे समझें कि मां-बाप की मेहनत लूट नहीं। सरकार ने हेल्पलाइन भी दी है। ये कदम उठाओ, तो बुढ़ापा सुरक्षित।
भविष्य की उम्मीद
कानून तो ठीक है, लेकिन दिल से देखभाल हो तो बेहतर। बच्चे सोचो – आज जो करोगे, कल तुम्हारे साथ होगा। माता-पिता, हक इस्तेमाल करो लेकिन सोच-समझकर। ये बदलाव समाज को मजबूत बनाएगा। कालाबाजारी संपत्ति की नहीं चलेगी। कुल मिलाकर, कानून ने बुजुर्गों को पंख दिए हैं। अब जिम्मेदारी हमारी।









