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Uttarakhand News: बच्चों के टीकाकरण के लिए बनेगी डिजिटल आईडी! यू-विन पोर्टल और डिजी लॉकर से मिलेगी सुविधा; जानें क्या है योजना

उत्तराखंड में अब बच्चों के टीकाकरण का रिकॉर्ड नहीं खोएगा! सरकार हर बच्चे के लिए 'डिजिटल आईडी' बनाने जा रही है। जानें कैसे यू-विन और डिजी लॉकर के जरिए आपको मिलेंगे टीके के समय पर एसएमएस अलर्ट और डिजिटल सर्टिफिकेट।

By Pinki Negi

Uttarakhand News: बच्चों के टीकाकरण के लिए बनेगी डिजिटल आईडी! यू-विन पोर्टल और डिजी लॉकर से मिलेगी सुविधा; जानें क्या है योजना।
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देश में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण को और भी आसान बनाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) अब ‘डिजिटल आईडी’ तैयार करेगा। इसके तहत यू-विन (U-Win) पोर्टल को डिजी लॉकर के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे टीके का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध होगा और प्रमाणपत्र भी आसानी से डाउनलोड किए जा सकेंगे।

इस डिजिटल प्रणाली का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि टीके की अगली खुराक आने पर माता-पिता को मोबाइल पर SMS अलर्ट मिलेगा, जिससे कोई भी टीका नहीं छूटेगा। अब देशभर में कहीं भी रहने पर क्यूआर कोड के जरिए टीकाकरण का विवरण तुरंत प्राप्त किया जा सकेगा, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुलभ हो जाएगी।

यू-विन पोर्टल और डिजी लॉकर के मिलन से आसान होगा स्वास्थ्य रिकॉर्ड

स्वास्थ्य विभाग अब बच्चों के टीकाकरण अभियान को पूरी तरह हाईटेक बनाने जा रहा है। स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए हैं कि यू-विन (U-Win) पोर्टल को डिजी लॉकर के साथ एकीकृत किया जाए, ताकि हर बच्चे की एक यूनिक डिजिटल आईडी बनाई जा सके।

इससे न केवल माता-पिता को टीकाकरण का रिकॉर्ड रखने में आसानी होगी, बल्कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए भी डेटा अपडेट करना काफी सरल हो जाएगा। एनएचएम की निदेशक रश्मि पंत के अनुसार, इस डिजिटल एकीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस कदम से अब देश के किसी भी हिस्से में बच्चों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को एक क्लिक पर देखा और प्रमाणित किया जा सकेगा।

दुर्गम क्षेत्रों के बच्चों के लिए ‘एयर एम्बुलेंस’

स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत एक सराहनीय निर्णय लिया है। अब उच्च हिमालयी और सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले उन बच्चों को फ्री हेलीकॉप्टर सेवा दी जाएगी, जिन्हें सर्जरी की सख्त जरूरत है। यह सेवा विशेष रूप से उन बच्चों के लिए होगी जो जन्मजात हृदय दोष, कटे हुए होंठ या तालु, टेढ़े पैर (क्लबफुट) और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भौगोलिक चुनौतियों को दूर कर उन मासूमों तक समय पर इलाज पहुँचाना है, जो दुर्गम इलाकों में रहने के कारण बड़े अस्पतालों तक नहीं पहुँच पाते थे।

टीबी के खिलाफ बड़ा अभियान, 11 लाख लोगों की होगी जांच,

‘टीबी मुक्त भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। विभाग ने इस साल सितंबर तक 11 लाख संवेदनशील व्यक्तियों की स्क्रीनिंग का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। जांच प्रक्रिया को और अधिक सटीक और आसान बनाने के लिए सरकार जल्द ही आधुनिक हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें खरीदने जा रही है। इन पोर्टेबल मशीनों की मदद से स्वास्थ्य कर्मी दूर-दराज के इलाकों और घर-घर जाकर संदिग्ध मरीजों के फेफड़ों की जांच कर सकेंगे, जिससे टीबी के मामलों की पहचान शुरुआती स्तर पर ही की जा सकेगी और समय रहते इलाज शुरू हो सकेगा।

यह भी दिए निर्देश

  • फरवरी में आयोजित किया जाएगा एनीमिया पखवाड़ा।
  • डेंगू नियंत्रण की कार्ययोजना बनाने को अन्य राज्यों की कार्ययोजना का भी करें अध्ययन।
  • ब्रेस्ट स्क्रीनिंग के लिए आधुनिक उपकरणों का हो इस्तेमाल।
  • कैंसर को अधिसूचित रोग के रूप में किया जाए शामिल। इससे अस्पतालों व लैब को इसकी जानकारी सरकार को देना अनिवार्य होगा।
Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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