
झारखंड हाई कोर्ट ने लाखों कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए यह साफ किया है कि अगर किसी कर्मचारी ने पहले ‘हायर पेंशन’ का विकल्प नहीं भी चुना था, तब भी उन्हें ज्यादा फायदे वाली पेंशन योजना का लाभ मिल सकता है। यह फैसला मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है जो पहले CPF योजना में थे, लेकिन बाद में उनके लिए GPF पेंशन योजना ज्यादा फायदेमंद साबित हुई। अब विकल्प न चुनने की वजह से किसी भी कर्मचारी को ज्यादा पेंशन के हक से वंचित नहीं किया जाएगा।
कर्मचारियों के हक में कोर्ट की उदार व्याख्या
झारखंड हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी समय पर यह जानकारी नहीं देता कि वह ‘कंट्रीब्यूटरी प्रोविडेंट फंड’ (CPF) में रहना चाहता है, तो उसे अपने आप ही बेहतर ‘जनरल प्रोविडेंट फंड’ (GPF) योजना का हिस्सा मान लिया जाएगा। अदालत का मानना है कि पेंशन का उद्देश्य कर्मचारियों का कल्याण करना है, इसलिए नियमों की सख्ती या किसी भी तरह के भेदभाव की वजह से उन्हें उनके लाभ से दूर नहीं रखा जाना चाहिए।
रिटायर्ड शिक्षक की लंबी कानूनी लड़ाई और जीत
यह पूरा मामला केंद्रीय विद्यालय के एक सेवानिवृत्त शिक्षक से जुड़ा है, जिन्होंने 1995 से 2019 तक अपनी सेवाएँ दीं। नौकरी के शुरुआती दिनों में उन्होंने CPF स्कीम चुनी थी, लेकिन बाद में नियम बदलने के बावजूद विभाग ने उनसे दोबारा विकल्प नहीं माँगा। जब उन्होंने पेंशन स्कीम बदलवाने की कोशिश की, तो उनकी बात नहीं सुनी गई। इसके बाद, उन्होंने सूचना का अधिकार (RTI) और कानूनी रास्ता अपनाया, जिसके परिणामस्वरूप अब कोर्ट ने उनके हक में फैसला सुनाया है।
बिना सहमति के नहीं रोक सकते पेंशन का लाभ
सूचना के अधिकार (RTI) से यह अहम बात सामने आई कि विभाग के पास ऐसा कोई लिखित रिकॉर्ड या फॉर्म नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि कर्मचारी ने CPF योजना में ही रहने की इच्छा जताई थी। इसी आधार पर यह दलील दी गई कि नियमों के तहत कर्मचारी को अपने आप GPF योजना का पात्र माना जाना चाहिए था। हाई कोर्ट ने इस तर्क को पूरी तरह सही माना और स्पष्ट किया कि ठोस सबूत के अभाव में कर्मचारी को बेहतर पेंशन के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
पेंशन के लाभ में भेदभाव पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि कोई योजना कर्मचारी के भविष्य के लिए अधिक फायदेमंद है, तो उसे उस लाभ से रोकना पूरी तरह गलत है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल समय पर विकल्प (Option) न चुन पाने के कारण किसी व्यक्ति को बेहतर पेंशन से वंचित करना उसके साथ भेदभाव होगा। कोर्ट का मानना है कि नियम कर्मचारियों की सुविधा के लिए होने चाहिए, न कि उनके हक को छीनने के लिए।
पेंशन कर्मचारियों का कानूनी हक
झारखंड हाई कोर्ट ने अपने निर्णय को पुख्ता करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के 2022 के एक ऐतिहासिक फैसले का संदर्भ दिया। कोर्ट ने दोहराया कि पेंशन कोई खैरात या मेहरबानी नहीं है, बल्कि यह कर्मचारी का मेहनत से कमाया गया कानूनी अधिकार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्मचारी पेंशन योजना बदलने में देरी भी कर देता है, तो भी उसे इस लाभ से नहीं रोका जा सकता, क्योंकि नियम कर्मचारियों के कल्याण के लिए बनाए गए हैं।
इन 3 स्थितियों में बदल सकते हैं अपनी पेंशन योजना
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में उन तीन खास परिस्थितियों को स्पष्ट किया है, जिनमें पेंशन योजना का बदलाव मान्य होगा। पहला, यदि कर्मचारी ने शुरुआत में कोई विकल्प (Option) ही नहीं दिया था। दूसरा, यदि कर्मचारी तय समय सीमा के भीतर अपना विकल्प जमा नहीं कर पाया। और तीसरा, यदि कर्मचारी ने पहले CPF चुना था लेकिन अब वह ज्यादा फायदेमंद पेंशन योजना का लाभ लेना चाहता है। कोर्ट के अनुसार, इन तीनों ही स्थितियों में कर्मचारियों को अपनी पेंशन स्कीम बदलने का पूरा कानूनी अधिकार है।
केंद्रीय विद्यालय संगठन की याचिका खारिज, कोर्ट का दखल से इनकार
झारखंड हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) द्वारा दायर की गई चुनौती याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। संगठन ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की थी, लेकिन अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस मामले में ट्रिब्यूनल का पिछला फैसला पूरी तरह सही है। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि कर्मचारी के हक में दिए गए इस निर्णय में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है, जिससे अब कर्मचारियों के लिए लाभ का रास्ता साफ हो गया है।
कर्मचारियों के लिए बड़ी जीत
यह फैसला उन सभी कर्मचारियों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है जो पेंशन और CPF के बीच चुनाव को लेकर असमंजस में थे। अब यह कानूनी रूप से स्पष्ट हो चुका है कि यदि कोई पेंशन योजना कर्मचारी के लिए अधिक फायदेमंद है, तो बिना औपचारिक विकल्प चुने भी उन्हें उसका लाभ दिया जा सकता है। इस निर्णय से न केवल वर्तमान कर्मचारियों, बल्कि सेवानिवृत्त हो चुके लोगों को भी बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी, जिससे उनकी वर्षों पुरानी कानूनी और वित्तीय परेशानियां समाप्त हो जाएंगी।









