
मध्य प्रदेश सरकार ‘मापवा’ (MAPWA) योजना के जरिए प्रदेश की महिला किसानों को खेती की नई पहचान दिला रही है। इस विशेष योजना का उद्देश्य महिलाओं को केवल आर्थिक रूप से मजबूत करना ही नहीं, बल्कि उन्हें खेती-किसानी की आधुनिक तकनीकों और मशीनों के उपयोग में माहिर बनाना भी है। इसके माध्यम से महिला किसान खेती के नए तरीके सीख सकेंगी, जिससे उनकी लागत कम होगी और पैदावार बढ़ने से मुनाफा दोगुना होगा। यह योजना ग्रामीण महिलाओं को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
खेती में महिलाओं का बढ़ेगा दबदबा
मध्य प्रदेश में खेती-किसानी में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के बराबर है, जिसे देखते हुए सरकार ने उन्हें सशक्त बनाने का फैसला किया है। ‘मापवा’ योजना के तहत महिला किसानों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे वे ऐसी तकनीकें सीख सकें जिनमें खर्च कम और मुनाफा ज्यादा हो। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य न केवल उनकी फसल की क्वालिटी सुधारना है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से इतना स्वतंत्र बनाना है कि वे खेती से जुड़े बड़े फैसले खुद ले सकें। इससे ग्रामीण महिलाओं के जीवन स्तर में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
कौन सी महिला किसान ले सकती हैं लाभ और कैसे होगा चयन?
मध्य प्रदेश सरकार की यह खास योजना राज्य के सभी जिलों में समान रूप से लागू है। इसका लाभ एमपी की कोई भी मूल निवासी महिला किसान ले सकती है, चाहे वह किसी भी जाति या वर्ग की हो। योजना के लिए लाभार्थियों का चयन बेहद पारदर्शी तरीके से किया जाता है। कृषि विस्तार अधिकारी अपने क्षेत्र के 2 से 4 गांवों के बीच से 25 से 50 महिला किसानों की एक टीम चुनते हैं। इस चयन के लिए महिला के पास उपलब्ध कृषि भूमि, सिंचाई की सुविधा और पशुधन (मवेशी) जैसे जरूरी मानकों को आधार माना जाता है, ताकि जरूरतमंद और मेहनती महिलाओं तक ट्रेनिंग का लाभ पहुँच सके।
ट्रेनिंग के लिए अपने कृषि अधिकारी से मिलें
मध्य प्रदेश की जो महिला किसान ‘मापवा’ योजना का लाभ उठाकर आधुनिक खेती सीखना चाहती हैं, उन्हें अपने क्षेत्र के कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क करना होगा। अधिकारी ही आवेदन और चयन की प्रक्रिया में आपकी मदद करेंगे ताकि आप कम लागत में बेहतर मुनाफा कमा सकें।
‘मापवा’ योजना के शानदार फायदे
इस योजना के जरिए महिला किसानों को निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:
- आधुनिक ट्रेनिंग: खेती की नई और वैज्ञानिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है।
- अध्ययन भ्रमण: महिलाओं को दूसरे जिलों के सफल खेतों का दौरा कराया जाता है ताकि वे नया अनुभव ले सकें।
- समूह शक्ति: महिलाओं को संगठित करने के लिए स्व-सहायता समूहों (SHG) का गठन और उन्हें चलाने की ट्रेनिंग मिलती है।
- आत्मनिर्भरता: योजना का मुख्य लक्ष्य महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना और उन्हें बड़े फैसले लेने के काबिल बनाना है।









