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अब सरकारी नौकरी में भाई होने पर भी बहन को मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति; MP हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

क्या परिवार में एक सदस्य के सरकारी नौकरी में होने से दूसरे का अनुकंपा नियुक्ति का हक खत्म हो जाता है? मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस पर एक ऐतिहासिक और मानवीय फैसला सुनाया है, जो हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आया है। पूरी खबर विस्तार से यहाँ पढ़ें।

By Pinki Negi

अब सरकारी नौकरी में भाई होने पर भी बहन को मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति; MP हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
MP हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक बहुत ही मानवीय और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि यदि परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में है, लेकिन वह अपने परिवार से अलग रह रहा है और उनकी मदद नहीं करता, तो इस आधार पर घर के दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देने से मना नहीं किया जा सकता।

इस फैसले के तहत कोर्ट ने देवास बैंक नोट प्रेस से हटाई गई एक महिला कर्मचारी को दोबारा नौकरी पर रखने और उन्हें पिछला पूरा वेतन देने का आदेश भी जारी किया है।

अनाथ बेटी के हक में आया कोर्ट का फैसला

यह मामला देवास की रहने वाली मनीषा (अनुसूचित जनजाति वर्ग) का है, जिन्होंने अपने माता-पिता दोनों को खोने के बाद पूरी तरह निराश्रित होने पर इंसाफ की गुहार लगाई थी। मनीषा के पिता बैंक नोट प्रेस, देवास में सीनियर चेकर थे और सेवाकाल के दौरान ही उनकी मृत्यु हो गई थी।

माता-पिता के निधन के बाद आर्थिक संकट से जूझ रही मनीषा को उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर जनवरी 2025 में ‘जूनियर ऑफिस असिस्टेंट’ के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी। हालांकि, बाद में इस नियुक्ति पर सवाल उठाए गए, जिसके खिलाफ मनीषा ने अपनी कानूनी लड़ाई शुरू की।

विभाग ने जानकारी छुपाने के आरोप में बेटी को निकाला

मनीषा को नौकरी मिलने के मात्र चार महीने बाद ही एक बड़ा झटका लगा, जब विभाग ने उन्हें पद से हटाने का नोटिस दे दिया। विभाग का तर्क था कि मनीषा ने अपने बड़े भाई के पुलिस में होने की बात छिपाई है। मनीषा ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि उनका भाई साल 2013 से ही सरकारी सेवा में है, लेकिन वह अपने अलग परिवार के साथ रहता है और उनका मनीषा या उनके पिता के खर्चों से कोई लेना-देना नहीं है। इसके बावजूद, विभाग ने उनकी बात नहीं मानी और उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया, जिसे अब हाई कोर्ट ने गलत ठहराया है।

बिना जांच नौकरी से निकालना गलत

हाई कोर्ट ने इस मामले में विभाग की लापरवाही को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मनीषा को नौकरी से निकालने से पहले कोई औपचारिक विभागीय जांच नहीं की गई, जो कि नियमों के खिलाफ है। अदालत ने स्पष्ट रूप से माना कि चूंकि मनीषा का भाई अपने पिता पर निर्भर नहीं था और अपना अलग घर-परिवार चला रहा है, इसलिए उसकी नौकरी मनीषा के हक को नहीं छीन सकती। साथ ही, कोर्ट ने यह भी नोट किया कि विभाग मनीषा की बहन के रोजगार को लेकर भी कोई पुख्ता सबूत नहीं दे पाया। इन दलीलों के आधार पर कोर्ट ने मनीषा की बर्खास्तगी को पूरी तरह गलत करार दिया।

हाई कोर्ट ने दिया बहाली और पिछला पूरा वेतन देने का आदेश

इंदौर हाई कोर्ट ने देवास बैंक नोट प्रेस द्वारा मनीषा को नौकरी से निकालने के आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया है। अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए विभाग को निर्देश दिया है कि मनीषा को तुरंत ‘जूनियर ऑफिस असिस्टेंट’ के पद पर वापस रखा जाए। इतना ही नहीं, कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि मनीषा को बर्खास्तगी के समय से लेकर अब तक का पूरा पिछला वेतन (Back Wages) दिया जाए। इसके साथ ही उन्हें सेवा में निरंतरता और अन्य सभी सरकारी लाभ भी मिलेंगे, जैसे कि उन्होंने कभी नौकरी छोड़ी ही न हो।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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