
प्रदेश के राशनकार्ड धारकों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। खाद्य एवं रसद विभाग ने बरेली मंडल के चारों जिलों में राशन वितरण (Ration Distribution) के पैटर्न में बदलाव का ऐलान किया है। फरवरी से अंत्योदय कार्ड (Antyodaya Card) और पात्र गृहस्थियों (Eligible Households) को कोटे (Quota) पर मिलने वाले गेहूं (Wheat) और चावल (Rice) की मात्रा में बदलाव होगा।
इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों की खाद्य आदतों (Food Habits) और उपभोक्ता मांग में अंतर बताया जा रहा है। विभाग ने साफ किया है कि वितरण सीमा (Distribution Limit) में कोई बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि केवल प्रत्येक यूनिट को मिलने वाले गेहूं और चावल के अनुपात में सुधार किया गया है।
बरेली मंडल में नए राशन स्केल का विवरण
खाद्य और रसद विभाग के अनुसार, अगले माह से अंत्योदय कार्ड धारकों को प्रति यूनिट निम्नलिखित मात्रा में राशन मिलेगा:
- गेहूं (Wheat): 21 किलो
- चावल (Rice): 14 किलो
वहीं, पात्र गृहस्थियों को प्रति यूनिट निम्नलिखित मात्रा में राशन मिलेगा:
- गेहूं (Wheat): 3 किलो
- चावल (Rice): 2 किलो
इस बदलाव के बाद बरेली मंडल के चारों जिलों – बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत और फर्रुखाबाद – में कोटे पर गेहूं का वितरण बढ़ जाएगा, जबकि चावल का वितरण पहले के स्तर से कम हो जाएगा।
बदलाव के पीछे की वजह
खाद्य एवं रसद विभाग का कहना है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों की खाद्य आदतों (Regional Food Preferences) और स्थानीय उपभोग पैटर्न को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि इस बदलाव से लोगों की दैनिक आहार जरूरतें प्रभावित नहीं होंगी, बल्कि वितरण अधिक संतुलित और जरूरतों के अनुरूप होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, बरेली मंडल में गेहूं का सेवन चावल की तुलना में अधिक होता है। इसी आधार पर नया वितरण पैटर्न तैयार किया गया है ताकि राशन वितरण अधिक उपयोगी और क्षेत्रीय मांग के अनुरूप हो।
राशन वितरण में तकनीकी सुधार और पारदर्शिता
विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि राशन वितरण (Ration Distribution) अब अधिक तकनीकी और पारदर्शी (Transparent) तरीके से किया जाएगा। डिजिटल रिकॉर्डिंग (Digital Record-Keeping) और मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी अंत्योदय कार्ड धारक और पात्र गृहस्थी अपने कोटे के अनुसार राशन प्राप्त कर सकें।
खाद्य और रसद विभाग ने कहा कि इस बदलाव से राशन वितरण में हेराफेरी (Fraud) और गलत वितरण की संभावना कम होगी। यह कदम सरकार की ‘जन-हितैषी नीति’ (Pro-People Policy) के अनुरूप लिया गया है।
राशनकार्ड धारकों के लिए क्या मायने रखता है यह बदलाव?
- गेहूं का अधिक कोटा: फरवरी से गेहूं की उपलब्धता बढ़ने से बरेली मंडल के परिवारों को उनकी दैनिक आहार जरूरतों के अनुसार अधिक गेहूं मिलेगा।
- चावल का कम कोटा: चावल की मात्रा कम होने के बावजूद भी विभाग का दावा है कि स्थानीय खाद्य आदतों के अनुसार यह पर्याप्त है।
- पारदर्शी वितरण: डिजिटल रिकॉर्डिंग से राशन वितरण अधिक आसान और दोषरहित होगा।
- समय पर राशन वितरण: अब प्रत्येक पात्र गृहस्थी को उनके यूनिट के अनुसार नियमित राशन मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव केवल बरेली मंडल तक सीमित है, लेकिन अगर मॉडल सफल रहा तो इसे पूरे उत्तर प्रदेश में लागू करने की योजना बनाई जा सकती है।
सरकार का संदेश
खाद्य और रसद विभाग के अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने राशन वितरण केंद्र (Ration Shop) पर समय से राशन लें और किसी प्रकार की शिकायत होने पर तुरंत विभागीय हेल्पलाइन का इस्तेमाल करें।
अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव आम जनता की भलाई और खाद्य सुरक्षा (Food Security) को ध्यान में रखकर किया गया है।









