
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है, लेकिन सैन्य विशेषज्ञों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ईरान की मिसाइलें सात समंदर पार अमेरिका तक पहुँच सकती हैं? अगर हम नक्शे पर नज़र डालें, तो तेहरान से अमेरिकी मुख्य भूमि (Mainland) की दूरी बहुत ज़्यादा है, जिससे सीधा हमला करना ईरान के लिए लगभग असंभव है।
भले ही ईरान की सेना दुनिया की 16वीं सबसे बड़ी शक्ति है और उसके पास आधुनिक ड्रोन व एयर डिफेंस सिस्टम है, लेकिन उसकी मिसाइलों की रेंज अमेरिका तक नहीं पहुँचती। ऐसे में अमेरिका को जवाब देने के लिए ईरान ने एक अलग रणनीति बनाई है। ईरान के निशाने पर सीधे अमेरिका के बजाय वे 8 देश होंगे जहाँ अमेरिकी बेस या उनके सहयोगी मौजूद हैं। इसी खतरे को देखते हुए ईरान ने अपना एयरस्पेस बंद कर मिसाइलों को अलर्ट मोड पर डाल दिया है।
मिसाइल की रेंज और अमेरिका की दूरी
ईरान के पास बैलिस्टिक मिसाइलों का बड़ा जखीरा है, लेकिन उनकी अधिकतम मारक क्षमता 2,000 से 2,500 किलोमीटर तक ही है। इस रेंज में वह इजरायल और मध्य पूर्व के अमेरिकी सैन्य अड्डों को तो निशाना बना सकता है, लेकिन 11,000 किलोमीटर दूर स्थित अमेरिका तक पहुँचना उसके लिए असंभव है। तकनीकी रूप से ईरान की मिसाइलें अमेरिका तक की दूरी का एक चौथाई हिस्सा भी तय नहीं कर पाती हैं, जिससे सीधा हमला मुमकिन नहीं दिखता।
क्या ईरान अमेरिका को दे पाएगा मुंहतोड़ जवाब?
ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को उत्तर कोरिया, रूस और चीन जैसे देशों से तकनीकी मदद मिलती रही है। हालांकि उसकी सबसे चर्चित ‘शेजिल’ मिसाइल की रेंज भी 2,500 किमी तक ही सीमित है, लेकिन ईरान की असली ताकत उसके ‘शहीद’ (Shahed) ड्रोन हैं। इन ड्रोनों का लोहा दुनिया मान चुकी है, क्योंकि रूस ने यूक्रेन के खिलाफ और सूडान संघर्ष में इनका घातक इस्तेमाल किया है। सीधा अमेरिका तक न पहुँच पाने के बावजूद, ईरान अपने इस ड्रोन नेटवर्क और मिसाइलों के जरिए मध्य पूर्व (Middle East) में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उनके मित्र देशों को भारी नुकसान पहुँचाने की क्षमता रखता है।
अमेरिकी अड्डों पर संकट
ईरान की मारक क्षमता को देखते हुए अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपने सैन्य अड्डों को खाली करना शुरू कर दिया है। रॉयटर्स के अनुसार, तेहरान ने पड़ोसी देशों को चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने हमला किया, तो वह उनकी धरती पर मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा। कतर, बहरीन और यूएई जैसे देशों में स्थित अमेरिकी बेस ईरान की 2,500 किमी वाली मिसाइल रेंज के भीतर हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा बढ़ गया है।
ईरान की मिसाइल रेंज में अमेरिका के 8 ‘अभेद्य’ किले
ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच, पश्चिम एशिया में फैले अमेरिकी सैन्य अड्डे सबसे ज़्यादा खतरे में हैं। ये अड्डे न केवल सैन्य ताकत का केंद्र हैं, बल्कि ईरान की 2,500 किलोमीटर की मिसाइल रेंज के भीतर आते हैं। कतर के विशाल एयरबेस से लेकर तुर्की के परमाणु ठिकानों तक, अमेरिका ने रणनीतिक रूप से पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर रखी है। यदि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच युद्ध छिड़ता है, तो ये 8 देश मुख्य रणभूमि बन सकते हैं।
अमेरिकी सैन्य अड्डों का पूरा विवरण
| देश | सैन्य अड्डे का नाम | महत्व और ताकत | |
| 1 | कतर | अल-उदेद (Al Udeid) | सबसे बड़ा बेस: 10,000 जवान; सेंट्रल कमांड का मुख्यालय। |
| 2 | बहरीन | 5वां बेड़ा (5th Fleet) | नेवी हेडक्वार्टर: लाल सागर और हिंद महासागर पर नियंत्रण। |
| 3 | तुर्की | इनसर्लिक (Incirlik) | परमाणु ठिकाना: यहाँ अमेरिकी न्यूक्लियर वॉरहेड होने की चर्चा है। |
| 4 | UAE | अल धाफरा एयर बेस | एयरफोर्स हब: ISIS के खिलाफ जंग का मुख्य केंद्र। |
| 5 | सऊदी अरब | प्रिंस सुल्तान एयर बेस | मिसाइल डिफेंस: 2,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात। |
| 6 | कुवैत | कैंप आरिफ़जान (सीमा के पास) | लॉजिस्टिक हब: इराक सीमा के पास विशाल सैन्य मौजूदगी। |
| 7 | इराक | अल-असद एयरबेस | रणनीतिक ठिकाना: नाटो और इराकी सेना की मदद का केंद्र। |
| 8 | जॉर्डन | अल साल्टी एयर बेस | निगरानी केंद्र: अम्मान के पास एयरफोर्स की बड़ी मौजूदगी। |









